मकर संक्रांति पर है दान का विशेष महत्व, इसी दिन सूर्य होता है उत्तरायण और शुरू होता है देवताओं का दिन / मकर संक्रांति पर है दान का विशेष महत्व, इसी दिन सूर्य होता है उत्तरायण और शुरू होता है देवताओं का दिन

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2019, 06:00 PM IST

भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नाम से मनाई जाती है मकर संक्रांति

Makar Sankranti 2019, The Importance of Makar Sankranti, When the Makar Sankranti in 2019

रिलिजन डेस्क। ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों के राजा सूर्य वर्ष भर में मेष राशि से लेकर मीन राशि में भ्रमण करते हैं। इसी क्रम में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। अधिकांशत: ये पर्व 14 जनवरी को ही मनाया जाता है, लेकिन इस बार ये पर्व 15 जनवरी, मंगलवार को मनाया जाएगा।
- उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्‌ट के अनुसार, इस बार सूर्य 14 जनवरी की रात मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसलिए इसी दिन पुण्यकाल रहेगा, यानी स्नान, दान का महत्व इसी दिन का माना जाएगा।
- धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन किए गए दान का फल सौ गुना होकर मिलता है। मकर संक्रांति पर विशेष रूप से घी और कंबल दान करने का महत्व है। मकर संक्रांति से ही सूर्य अपनी कक्षा में परिवर्तन करके दक्षिणायन से उत्तरायण होता है।
- हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, उत्तरायण को देवताओं का दिन एवं दक्षिणायन को रात कहा गया है। इस दिन गंगा नदी में स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
- भारत के अलग-अलग प्रांतों में यह पर्व भिन्न-भिन्न नामों से मनाया जाता है। पंजाब इसे लोहड़ी के रूप में मनाते हैं। असम में बिहू कहते हैं और तमिलनाड़ु में मकर संक्रांति को पोंगल के रूप में मनाया जाता है।

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