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मंत्र जाप करते समय करना चाहिए नियमों का पालन, बिना गिने मंत्र जाप करने से नहीं मिल पाता पूरा फायदा

माला न हो तो भी निश्चित संख्या में कर सकते हैं मंत्र जाप

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2018, 04:00 PM IST
Mantra chant rules, how to mantra chant, benefits of chant mantras

रिलिजन डेस्क। हिंदू धर्म में मंत्रों का विशेष महत्व है। मंत्रों के जाप का फल तभी मिलता है, जब उससे संबंधित नियमों का पूरी तरह के पालन किया जाए। मंत्र जप के इन नियमों में अहम है- मंत्र संख्या। बिना गिने मंत्र जाप आसुरी जाप कहे जाते हैं, जो शुभ फल नहीं देते।
यही वजह है कि निश्चित संख्या में मंत्र जाप के लिए माला का उपयोग किया जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, यदि मंत्र जाप के लिए माला उपलब्ध न हो तो भी एक आसान विधि से निश्चित संख्या में जाप किया जा सकता है। यह तरीका है - करमाला यानी उंगलियों पर मंत्रों की गिनती से मंत्र जाप। जानिए इसकी पूरी विधि…

1. दाएं हाथ की अनामिका यानी मिडिल फिंगर के बीच के पोरुओं से शुरू कर कनिष्ठा यानी लिटिल फिंगर के पोरुओं से होते हुए तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर के मूल तक के 10 पोरुओं को गिन मंत्र जाप करें।

2. अनामिका यानी मिडिल फिंगर के बीच के शेष 2 पोरुओं को माला का सुमेरू मानकर पार न करें।

3. दाएं हाथ पर दस मंत्र की गिनती कर बाएं हाथ की अनामिका यानी मिडिल फिंगर के बीच के पोरुओं से दहाई की एक संख्या गिने।

4. दाएं हाथ के साथ बाएं हाथ पर दहाई के दस बार मंत्र गिनने पर 100 मंत्र संख्या पूरी हो जाती है।

5. आखिरी आठ मंत्र जाप के लिए फिर से दाएं हाथ पर ही उसी तरह अनामिका यानी मिडिल फिंगर के मध्य भाग से गिनती शुरू कर शेष 8 मंत्र जाप कर पूरे 108 मंत्र यानी एक माला पूरी की जा सकती है।

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