जीवन संघर्ष है, खेल है या उत्सव? शिष्यों ने गुरु से पूछा, जवाब में गुरु ने शिष्यों को सौंपा जंगल से सूखी पत्तियां लाने का काम, शिष्यों को लगा सूखे पत्ते आसानी से मिल जाएंगे लेकिन जंगल में नजारा कुछ और था / जीवन संघर्ष है, खेल है या उत्सव? शिष्यों ने गुरु से पूछा, जवाब में गुरु ने शिष्यों को सौंपा जंगल से सूखी पत्तियां लाने का काम, शिष्यों को लगा सूखे पत्ते आसानी से मिल जाएंगे लेकिन जंगल में नजारा कुछ और था

Motivational stories in hindi: हर छोटी और बेकार चीज का भी होता है अपना महत्व, सुखी जीवन के लिए ये नजरिया है जरूरी

Dainikbhaskar.com

Feb 12, 2019, 01:24 PM IST
Motivational stories in hindi from puranas story about life pleasure struggle

रिलिजन डेस्क. बहुत पुरानी कहानी है। एक गुरुकुल में कुछ शिष्य अपने गुरु के साथ रहते थे। वो रोज गुरु से तरह-तरह के सवाल किया करते थे और गुरु जवाब देते थे। एक दिन शिष्यों ने पूछा “गुरुजी, कुछ लोग कहते हैं जीवन संघर्ष है, कुछ कहते हैं खेल है और कई लोग ये मानते हैं कि जीवन उत्सव है। आखिर वास्तव में जीवन क्या है?”

गुरु ने जवाब दिया। जीवन तीनों ही है, संघर्ष भी, खेल भी और उत्सव भी। जैसे तुम जीना चाहो। शिष्यों ने कहा, गुरुजी समझ नहीं आया, एक ही जीवन के तीन रूप कैसे हो सकते हैं। जीवन एक ही रूप में हो सकता है। गुरु ने कहा, इसे समझने के लिए नजरिए की आवश्यकता है। तुम लोग एक काम करो, जंगल से मेरे लिए कुछ लाना है, क्या तुम लोग ला सकोगे। शिष्यों ने कहा, आप आदेश कीजिए गुरुदेव, क्या लाना है। हम अवश्य लेकर आएंगे।

गुरु ने कहा, मुझे जंगल से एक बोरा भरकर सूखी पत्तियां ला दो। मुझे कुछ काम है। शिष्यों ने कहा, ये तो बहुत आसान काम है गुरुदेव, जंगल में तो पेड़ों से टूट कर गिरे हजारों पत्ते बिखरे रहते हैं, हम अभी बोरे में भरकर ले आते हैं। सारे शिष्य गुरु को प्रणाम करके जंगल की ओर चल दिए।

शिष्य खुश थे कि गुरु ने उन्हें इतना आसान काम सौंपा है कि थोड़ी ही देर में वो आश्रम पहुंच जाएंगे सूखी पत्तियां लेकर। लेकिन, जैसे ही वे जंगल पहुंचे तो देखकर दंग रह गए कि उनके पहले ही कोई और सूखी पत्तियां बटोर कर ले जा चुका था। उन्होंने आसपास देखा तो एक किसान दिखा। उन्होंने किसान से पूछा तो उसने बताया कि ये सूखी पत्तियां उसके घर में ईंधन का काम करती है। चूल्हा इसी से जलता है, खाना पकता है। किसान ने उनसे कहा कि पास के नगर में कोई व्यापारी है जो सूखी पत्तियों का कारोबार करता है, उससे पत्तियां ले सकते हैं।

सारे शिष्य नगर में उस व्यापारी के पास पहुंचे। उससे पत्तियां मांगी लेकिन व्यापारी ने कहा कि आज जितनी पत्तियां जंगल से लाए थे उनके पत्तल और दोने बनाकर बेच दिए। अब उसके पास कोई पत्तियां नहीं हैं। लेकिन, पास ही एक बुढ़िया रहती है जो रोज जंगल से कुछ सूखे पत्ते बटोरकर लाती है। शायद उससे मिल जाएं। शिष्य उस बुढ़िया के पास पहुंचे। बुढ़ी औरत से जब सूखे पत्ते मांगे तो उसने कहा मैं तो औषधि के लिए सूखे पत्ते लाती हूं, उनको पीस कर मैंने दवाई बना ली।

सारे शिष्य निराश होकर आश्रम में लौट आए। गुरु ने उनसे पूछा कि क्या पत्तियां मिल गईं। शिष्यों ने सिर झुकाकर कहा, नहीं गुरुदेव। गुरु ने फिर पूछा क्यों नहीं मिलीं। शिष्यों ने सारी बातें बताईं। तब गुरु ने कहा तुम लोगों ने सुबह प्रश्न पूछा था कि जीवन संघर्ष है, खेल है या उत्सव? ये घटना तुम्हारे सवाल का जवाब है। जब तुम्हें मैंने सूखी पत्तियां लाने को कहा तब तुम लोगों को लगा ये बहुत आसान काम है। यानी तुमने उसको खेल समझा। जब तुम लोगों को जंगल में पत्तियां नहीं मिली तो तुमने उसे जगह-जगह खोजना शुरू कर दिया, यानी प्रयास किए। यही संघर्ष है। तभी एक शिष्य ने पूछा लेकिन गुरुदेव ये तो दो हुए, इस घटना में उत्सव कहां हैं?

गुरु ने कहा उत्सव ज्ञान में है। आज तुम लोगों के ये सबक मिल गया कि सूखी हुई पत्तियों के भी कितने उपयोग होते हैं, जीवन में कई बार छोटी-छोटी चीजें जिन्हें हम तुच्छ मान लेते हैं वे कितनी बहुमूल्य होती हैं। ये ज्ञान आज तुम लोगों को मिल गया, पत्तियां मैंने तुम लोगों से इसी बात को समझाने के लिए मंगवाई थीं। आज तुम लोग जीवन का एक नया पाठ सीख गए हो। ये सुनकर सारे शिष्य अपनी असफलता के दुःख को भूलकर अचानक मुस्कुराने लगे। नया पाठ सीखकर वे सब खुश थे।

कहानी से सीख

जीवन को देखने का नजरिया हमारा अपना है। हम किसी भी चीज को अच्छे या बुरे नजरिए से देख सकते हैं। जीवन में हर छोटी चीज का अपना महत्व होता है। इसलिए किसी भी बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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