संघर्ष के दिनों में निराशा से बचें और धैर्य बनाए रखें, तभी परेशानियां दूर हो सकती हैं

3 वर्ष पहले
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  • बार-बार असफलता मिलने से व्यक्ति निराश हो गया था, वह एक संत से मिला, संत ने उसे बताया बांस का पौधा पहले जड़ें मजबूत करता है, फिर तेजी से बढ़ता है

जीवन मंत्र डेस्क। दुख के दिनों में धैर्य से काम लेना चाहिए, वरना सुख कभी नहीं मिल पाता है। संघर्ष के समय में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार पुराने समय में एक व्यक्ति बहुत गरीब था। वह गरीबी दूर करने के लिए बार-बार कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे धन लाभ नहीं पाता था। लगातार मिल रही असफलता से वह हिम्मत हार गया और निराश रहने लगा। कुछ दिनों के बाद गांव में एक संत आए। गांव के सभी लोग संत से मिलने पहुंचे।

  • निराश युवक भी संत के पास पहुंचा। उसने संत को अपनी परेशानियां बता दीं। संत ने उससे कहा कि इस तरह निराश होने से कोई लाभ नहीं मिलेगा। तुम अपनी कोशिश करते रहो, इस तरह हारकर बैठ जाओगे तो परेशानियां दूर होने की उम्मीद भी खत्म हो जाएगी। ये बात सुनकर व्यक्ति ने कहा कि मैं हार चुका हूं और अब मैं कुछ नहीं कर सकता।
  • संत को समझ आ गया कि ये व्यक्ति नकारात्मक विचारों में बुरी तरह उलझ गया है। तब संत ने उससे कहा कि मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं। कहानी से तुम्हारी निराशा दूर हो जाएगी। संत ने कहानी सुनाना शुरू किया। एक छोटे बच्चे ने एक बांस का और एक कैक्टस का पौधा लगाया। बच्चा रोज दोनों पौधों की देखभाल करता। धीरे-धीरे कैक्टस का पौधा तो पनप गया, लेकिन बांस का पौधा वैसा का वैसा था। उसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ। कई महीने व्यतीत हो गए।
  • छोटे बच्चे ने हिम्मत नहीं हारी। वह बांस के पौधे की भी देखभाल करता रहा। इसी तरह कुछ दिन और निकल गए, लेकिन बांस का पौधा नहीं पनपा था। बच्चा निराश नहीं हुआ और उसने पौधे को पानी देना जारी रखी। कुछ महीनों के बाद बांस पौधा भी पनप गया और कुछ ही दिनों में वह कैक्टस के पौधे से भी बड़ा हो गया।
  • संत ने उस व्यक्ति से कहा इस कथा की सीख यह है कि बांस का पौधा पहले अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था, इसीलिए उसे पनपने में समय लगा। हमारे जीवन में जब भी संघर्ष आए तो हमें हमारी जड़ें मजबूत करनी चाहिए, निराश नहीं होना चाहिए। जैसे ही हमारी जड़ें मजूबत हो जाएंगी, हम तेजी से हमारे लक्ष्य की ओर बढ़ने लगेंगे। तब तक धैर्य रखना चाहिए। वह युवक संत की बात समझ गया और उसने एक बार फिर से पूरे उत्साह के साथ काम करना शुरू कर दिया।
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