नॉलेज/ नवरात्र से जुड़ी हैं अनेक परंपराएं, उन्हीं में से एक है जवारे बोना, नवरात्र के पहले दिन बोए जाते हैं जवारे, क्या है इस परंपरा का महत्व? / नॉलेज/ नवरात्र से जुड़ी हैं अनेक परंपराएं, उन्हीं में से एक है जवारे बोना, नवरात्र के पहले दिन बोए जाते हैं जवारे, क्या है इस परंपरा का महत्व?

Dainikbhaskar.com

Oct 12, 2018, 01:33 PM IST

सिर्फ धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक कारणों से भी नवरात्र में बोए जाते हैं जवारे

Navaratri 2018, Traditions related to Navaratri, Benefits of wheat grass juice
रिलिजन डेस्क। इन दिनों मां दुर्गा की आराधना का पर्व नवरात्र चल रहा है। इस पर्व से जुड़ी अनेक परंपराएं भी है। उन्हीं में से एक है जवारे बोने की। नवरात्र के पहले दिन मिट्टी के एक पात्र में जवारे के बीज बोए जाते हैं। नवरात्र के नौ दिन में ये जवारे हरी पत्तियों के रूप में बदल जाते हैं। इस परंपरा के पीछे सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्य भी छिपे हैं। नवरात्र के दौरान जवारे बोने से हमें इसके आयुर्वेदिक महत्व का भी पता चलता है। आगे जानिए जवारे के रस से होने वाले फायदों के बारे में...


अनेक बीमारी दूर कर सकता है जवारे का रस...
- आयुर्वेद के अनुसार, जवारे एक प्रकार की औषधि है। इसका रस पीने से अनेक रोगों में आराम मिलता है।
- जवारों का रस शरीर के लिए शक्तिशाली टॉनिक है। इसमें शरीर को स्वस्थ रखने वाले पांचो तत्वों में से चारों तत्व कार्बोहाईड्रेट, विटामिन, क्षार एवं प्रोटीन पाए जाते हैं।
- जवारे का रस पीने से पीलिया, दमा, पेट दुखना, पाचन क्रिया की दुर्बलता, अपच, गैस, विटामिन ए की कमी से होने वाले रोग आदि बीमारियों में फायदा होता है।
- इसके अलावा विटामिन बी की कमी से होने वाले रोग, जोड़ों में सूजन, गठिया, पथरी, हृदयरोग, डायबिटीज, पायरिया रोगों में भी ये फायदेमंद है।
- स्किन एलर्जी सम्बन्धी रोग, आंखें के रोग, बालों का झाड़ना , जली त्वचा के निशान मिटाने के लिए भी जवारों का रस पीना लाभकारी है।

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