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सूर्य के उत्तरायण होने पर भीष्म ने त्यागे थे प्राण, युद्ध से पहले युधिष्ठिर को दिया था जीत का आशीर्वाद

9 महीने पहले
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  • पितामह ने पांडवों को बताया था खुद की मृत्यु का रहस्य, भीष्म की वजह से श्रीकृष्ण हो गए थे क्रोधित

जीवन मंत्र डेस्क. बुधवार, 15 जनवरी को मकर संक्रांति है। संक्रांति पर सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है। इस पर्व के बाद सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन हो जाता है। भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायन होने पर ही प्राण त्यागे थे। महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत ग्रंथ में भीष्म पितामह प्रमुख पात्रों में से एक हैं। इच्छामृत्यु के वरदान से भीष्म बाण लगने के बाद भी सूर्य उत्तराण होने के जीवित रहे थे। जानिए भीष्म पितामह से जुड़ी कुछ खास बातें...

  • पितामह ने पांडवों को बताया था अपनी मृत्यु का रहस्य

भीष्म कौरव सेना के सेनापति थे। युद्ध में पांडवों के लिए भीष्म को काबू कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा था। वे लगातार पांडव सेना को खत्म कर रहे थे। जब पांडवों को लगा कि वे किसी भी तरह पितामह को पराजित नहीं कर पाएंगे तो उन्होंने भीष्म से ही इसका उपाय पूछा। तब भीष्म पितामह ने बताया कि तुम्हारी सेना में जो शिखंडी है, वह पहले एक स्त्री था, बाद में पुरुष बना है। अर्जुन शिखंडी को आगे करके मुझ पर बाणों का प्रहार करे। शिखंडी जब मेरे सामने होगा तो मैं बाण नहीं चलाऊंगा, क्योंकि मैं स्त्रियों पर प्रहार नहीं करता हूं। अर्जुन ने भीष्म द्वारा बताई गई योजना के अनुसार शिखंडी को आगे करके बाण चलाए और पितामह को घायल कर दिया।

  • भीष्म पिछले जन्म में एक वसु थे

भीष्म पितामह पूर्व जन्म में एक वसु थे। वसु एक प्रकार के देवता माने गए हैं। वसु ने ऋषि वसिष्ठ की गाय का हरण कर लिया था, इससे क्रोधित होकर ऋषि ने उन्हें मनुष्य रूप में जन्म लेने और आजीवन ब्रह्मचारी रहने का शाप दिया था।

  • युधिष्ठिर को दिया था जीत का आशीर्वाद

महाभारत युद्ध शुरू होने से पहले युधिष्ठिर अपने पितामह से युद्ध करने की आज्ञा लेने गए थे। पितामह ने प्रसन्न होकर युधिष्ठिर को युद्ध में जीतने का आशीर्वाद दिया था।

  • भीष्म की वजह से श्रीकृष्ण हो गए थे क्रोधित

युद्ध में भीष्म पांडवों की सेना को लगातार खत्म कर रहे थे। इससे श्रीकृष्ण क्रोधित हो गए। अर्जुन भीष्म पर पूरी शक्ति से प्रहार नहीं कर रहे थे। ये देखकर श्रीकृष्ण स्वयं चक्र लेकर भीष्म को मारने दौड़ पड़े थे। तब अर्जुन ने श्रीकृष्ण को रोका और पूरी शक्ति से भीष्म से युद्ध करने लगे।

  • 10 दिनों तक सेनापति रहे थे भीष्म

भीष्म कौरव सेना के पहले सेनापति थे और वे 10 दिनों तक सेनापति रहे। युद्ध 18 दिनों तक चला था। भीष्म के बाद 8 दिनों में ही पांडवों ने युद्ध जीत लिया था।

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