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चतुर्थी और गुरुवार का योग 12 मार्च को, प्रथम पूज्य गणपति के साथ करें विष्णुजी की पूजा

एक वर्ष पहले
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जीवन मंत्र डेस्क. गुरुवार, 12 मार्च को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की गणेश चतुर्थी व्रत है। गुरुवार को ये तिथि होने से इस दिन गणेशजी के साथ ही भगवान विष्णु और गुरु ग्रह के लिए विशेष पूजा-पाठ करनी चाहिए। उज्जैन के इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पं. सुनील नागर के अनुसार गणेशजी की पूजा में पूरा शिव परिवार शामिल करना चाहिए। शिव परिवार में शिवजी, माता पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय स्वामी, नंदी और गणेशजी की पत्नियां रिद्धि-सिद्धि शामिल हैं। इन सभी देवी-देवताओं की पूजा एक साथ करनी चाहिए। 

पूजा में दीपक जलाकर बोलें गणेशजी के मंत्र

गणेशजी की पूजा में इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
इस मंत्र का सरल अर्थ यह है कि वक्र तुंड यानी मुड़ी हुई सूंड वाले, महाकाय यानी विशाल शरीर वाले, सूर्यकोटि समप्रभ यानी करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। दूसरी लाइन का अर्थ यह है कि गणेशजी मेरे सारे काम बिना विघ्न पूरे करें।

गणेश चतुर्थी व्रत की सरल विधि
ये व्रत करने वाले भक्त स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में सोने, चांदी, पीतल, तांबा या मिट्टी से बनी गणेश और पूरे शिव परिवार की प्रतिमाएं स्थापित करें। सभी देवी-देवताओं को सिंदूर, दूर्वा, फूल, चावल, फल, प्रसाद चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें। भगवान के सामने व्रत करने का संकल्प लें और पूरे दिन अन्न ग्रहण न करें। व्रत में फलाहार कर सकते हैं। पानी, दूध, फलों का रस आदि चीजें भी ले सकते हैं। इस पूजा में भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की मूर्तियां भी रख सकते हैं। विष्णु मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें।