पर्व / गीता जयंती रविवार को, इस ग्रंथ के उपदेश ध्यान में रखने से दूर हो सकती हैं सभी परेशानियां

Gita Jayanti on Sunday, gita jayanti 2019, lord krishna and arjun, mahabharata, gita sar, geeta saar
X
Gita Jayanti on Sunday, gita jayanti 2019, lord krishna and arjun, mahabharata, gita sar, geeta saar

  • महाभारत युद्ध की शुरूआत में अर्जुन ने रख दिए थे शस्त्र, तब श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया और अर्जुन को कर्मों का महत्व बताया था

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 12:27 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। रविवार, 8 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी है। द्वापर युग में अगहन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता उपदेश दिया था। इसी वजह से इस तिथि को गीता जंयती के नाम से भी जाना जाता है। महाभारत में जब कौरव और पांडवों के बीच युद्ध की शुरूआत हो रही थी, तब अर्जुन ने श्रीकृष्ण के सामने शस्त्र रख दिए थे और कहा था कि मैं अपने ही कुल के लोगों पर प्रहार नहीं कर सकता। इसके बाद श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया और अर्जुन को कर्मों का महत्व बताया था।

  • भगवद्गीता में कई विद्याएं बताई गई हैं। इनमें चार प्रमुख हैं- अभय विद्या, साम्य विद्या, ईश्वर विद्या और ब्रह्म विद्या। अभय विद्या मृत्यु के भय को दूर करती है। साम्य विद्या राग-द्वेष से मुक्ति दिलाती है। ईश्वर विद्या से व्यक्ति अहंकार से बचता है। ब्रह्म विद्या से अंतरात्मा में ब्रह्मा भाव को जागता है।
  • एक मात्र ग्रंथ जिसकी जयंती मनाई जाती है
  • गीता एक मात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। हिंदू धर्म में भी सिर्फ गीता जयंती मनाने की परंपरा पुराने समय से ही चली आ रही है, क्योंकि अन्य ग्रंथ किसी मनुष्य द्वारा लिखे गए या संकलित किए गए हैं, जबकि गीता का जन्म भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण के श्रीमुख से हुआ है।
  • श्रीगीताजी की उत्पत्ति धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को हुई थी। यह तिथि मोक्षदा एकादशी के नाम से विख्यात है। गीता एक सार्वभौम ग्रंथ है। यह किसी काल, धर्म, संप्रदाय या जाति विशेष के लिए नहीं अपितु संपूर्ण मानव जाति के लिए हैं। इसे स्वयं श्रीभगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर कहा है इसलिए इस ग्रंथ में कहीं भी श्रीकृष्ण उवाच शब्द नहीं आया है बल्कि श्रीभगवानुवाच का प्रयोग किया गया है।
  • गीता के 18 अध्यायों में सत्य, ज्ञान और कर्म का उपदेश है। इस से किसी भी मनुष्य की सारी समस्याओं को दूर किया जा सकता है और जीवन को सफल बनाया जा सकता है।

ये है गीता से जुड़ा प्रसंग

  • महाभारत में जब कौरवों व पांडवों में युद्ध प्रारंभ होने वाला था। तब अर्जुन ने कौरवों के साथ भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य आदि श्रेष्ठ लोगों को देखकर युद्ध करने से मना कर दिया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। इस उपदेश के बाद अर्जुन ने युद्ध में भाग लिया। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो ज्ञान दिया, उसका सारांश इस प्रकार है...
  • क्यों व्यर्थ चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सकता है? आत्मा ना पैदा होती है, न मरती है। जो हुआ, अच्छा हुआ, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा।
  • तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया? जो लिया यहीं से लिया। जो दिया, यहीं पर दिया। जो आज तुम्हारा है, कल और किसी का था, परसों किसी और का होगा।
  • परिवर्तन संसार का नियम है। जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है। न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के। यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है और इसी में मिल जायेगा।
  • मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो। तुम अपने आपको भगवान को अर्पित करो। यही सबसे उत्तम सहारा है।
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना