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भक्ति / महाभारत युद्ध हो गया था खत्म, श्रीकृष्ण द्वारिका लौट रहे थे, तब कुंती ने उपहार में दुख मांगे

Mahabharata, Krishna Dwarka, krishna and kunti, prerak prasang, mahabharata facts in hindi, life management tips by mahabharata
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  • दुख ही नहीं सुख के दिनों में भी ध्यान करना चाहिए भगवान का

दैनिक भास्कर

Dec 04, 2019, 12:27 PM IST
जीवन मंत्र डेस्क। अधिकतर लोग भगवान को सिर्फ दुख के दिनों में ही याद करते हैं, जब सुख के दिन होते हैं, सफलता मिल रही होती है, तब व्यक्ति भगवान को याद नहीं करता है। इस संबंध में महाभारत का एक प्रसंग प्रचलित है। इस प्रसंग में कुंती ने बताया है कि भक्ति के लिए दुख के दिन ही सबसे अच्छे होते हैं, क्योंकि इन दिनों में हम भगवान को सच्चे मन से याद करते हैं। जानिए ये प्रसंग...
  • महाभारत में कौरव और पांडवों के बीच चल रहा युद्ध खत्म हो गया था। दुर्योधन मारा जा चुका था और युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर की राजगादी संभाल ली थी। धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे थे। ये देखकर एक दिन भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के सामने द्वारिका लौटने की इच्छा बताई। ये सुनकर सभी को दुख हुआ, लेकिन श्रीकृष्ण ने अपने नगरी लौटने का मन बना लिया और तैयारी शुरू कर दी।
  • जब श्रीकृष्ण अपनी नगरी द्वारिका जाने के लिए पांडवों से विदा ले रहे थे, तब वे सभी लोगों को कुछ न कुछ उपहार भी दे रहे थे। अंत में श्रीकृष्ण माता कुंती से मिले। कुंती से श्रीकृष्ण ने कहा कि बुआ आप भी अपने लिए कुछ मांग लो, आपने आज तक मुझसे अपने लिए कुछ नहीं मांगा है। मैं आज आपको कुछ देना चाहता हूं।
  • कुंती की आंखों से आंसु बहने लगे। कुंती ने कहा कि कृष्ण तुम मुझे कुछ देना चाहते हो तो दुख दे दो। ये बात सुनकर श्रीकृष्ण बोले कि बुआ आप दुख क्यों चाहती हैं?
  • इस प्रश्न के जवाब में कुंती ने कहा कि कृष्ण हमारे जीवन में जब-जब दुख आया हमने तुम्हें पूरे मन से याद किया और तुम भी दुख के दिनों में हर पल साथ रहे। सिर्फ बुरे समय में ही हम तुम्हारा ध्यान कर पाते हैं। सुख के दिनों में तो तुम्हारी याद कभी-कभी ही आती है। अगर जीवन में दुख रहेंगे तो मैं हर पल तुम्हारी पूजा करूंगी, तुम्हारा ध्यान करूंगी। यही सच्ची भक्ति है।

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