पर्व / मार्गशीर्ष अमावस्या पर दीपावली की तरह ही किया जाता है लक्ष्मी पूजन

Lakshmi Puja is performed like Deepawali on Margashirsha Amavasya.
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Lakshmi Puja is performed like Deepawali on Margashirsha Amavasya.

मार्गशीर्ष अमावस्या को माना जाता है पूर्वजों की पूजा का दिन

Dainik Bhaskar

Nov 24, 2019, 05:06 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. मार्गशीर्ष अमावस्या को एक अन्य नाम अगहन अमावस्या  से भी जाना जाता है। यह अमावस्या मार्गशीर्ष माह में पड़ती है। इस अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या से कम नहीं है। जिस प्रकार कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मीजी का पूजन कर दीपावली मनाई जाती है, उसी प्रकार इस दिन भी देवी लक्ष्मी का पूजन करना शुभ माना गया है। अमावस्या होने के कारण इस दिन स्नान, दान और अन्य धार्मिक कार्य सम्पन किए जाते हैं। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों के कार्य विशेष रूप से किए जाते हैं तथा यह दिन पूर्वजों के पूजन का दिन माना गया है। मार्गशीर्ष अमावस इस वर्ष 26 नवंबर को है।

  • धार्मिक कार्यों का अक्षय फल

ऐसी मान्यता है कि सत युग में देवों ने मार्ग-शीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही वर्ष का प्रारम्भ कि या था। मार्गशीर्ष अमावस के दिन पवित्र नदि यों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मार्गशीर्ष माह की अमावस्या तिथि प्रत्येक धार्मिक कार्य के लिए अक्षय फल देने वाली मानी गई है। इस तिथि पर पितरों की शान्ति के लिए अमावस्या व्रत पूजन का विशेष महत्व है।

  • महत्व

विष्णु पुराण के अनुसार श्रद्धा भाव से अमावस्या का उपवास रखने से पितृ गण ही तृप्त नहीं होते, अपितु ब्रह्मा, इंद्र, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षी और समस्त भूत प्राणी भी तृप्त होकर प्रसन्न होते हैं। जो लोग अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति, सदगति के लिए कुछ करना चाहते है उन्हें इस माह की अमावस्या को उपवास रख, पूजन कार्य करना चाहिए। जिन व्यक्तियों की कुण्डली में पितृ दोष हो, संतान हीन योग बन रहा हो, उन व्यक्तियों को यह उपवास अवश्य रखना चाहिए।

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