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प्रसंग / जैसी परिस्थिति है, उसे ठीक समझें और उसके अनुकूल खुद को ढाल लेने से सुख बना रहता है

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motivational story about happy life, inspirational story, prerak prasang, life management tips, prerak katha

एक आश्रम में नया शिष्य आया, संत ने उसे गाय की सेवा में लगा दिया, शिष्य बहुत खुश था, क्योंकि उसे पीने के लिए रोज दूध मिल रहा था, कुछ दिन बाद गाय कहीं चली गई, शिष्य दुखी हो गया

दैनिक भास्कर

Feb 06, 2020, 01:47 PM IST
जीवन मंत्र डेस्क. एक लोक कथा के अनुसार पुराने समय में किसी गांव में एक विद्वान संत रहते थे। गांव के आसपास के क्षेत्र के सभी लोग उनका बहुत सम्मान करते थे। लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके आश्रम जाते और संत उन्हें समस्याओं का हल बताते थे। एक दिन संत के पास एक दुखी व्यक्ति आया और बोला की गुरुजी मैं जीवन में आने वाली परेशानियां से बहुत दुखी हूं। कृपया मुझे अपना शिष्य बना लें, मैं सेवा करना चाहता हूं। संत ने उसकी बात समझी और कहा कि तुम अब यहीं रहो और आश्रम की गाय की देखभाल करो, सुबह-शाम दूध का सेवन करो। गायत्री मंत्र का जाप करो।
> संत की बात सुनकर व्यक्ति खुश हो गया, क्योंकि उसे सुबह-शाम ताजा दूध मिलेगा। व्यक्ति ने गाय की देखभाल शुरू कर दी, कुछ ही दिनों में वह तंदुरुस्त हो गया। उसने संत से कहा कि गुरुदेव अब बहुत आनंद है। मैं गाय की देखभाल करता हूं, मस्त रहता हूं। गुरु ने कहा कि ठीक है।
> एक दिन गाय आश्रम से कहीं चली गई। बहुत खोजने के बाद भी शिष्य को गाय नहीं मिली। गाय न मिलने की वजह से वह शिष्य दुखी हो गया। उसने अपने गुरु को इस बात की जानकारी दी। गुरु ने कहा कि यह भी ठीक है।
> कुछ दिनों के बाद शिष्य को गाय फिर मिल गई। शिष्य खुश हो गया। उसने गुरु को बताया कि गाय मिल गई है। गुरु ने कहा है कि यह भी ठीक है।
> शिष्य ये सुनकर हैरान हो गया। उसने गुरु से कहा कि गुरुदेव जब मैंने आपको बताया था कि गाय के दूध सेवन से मैं आनंद में हूं, तब आपने कहा था ठीक है। इसके बाद जब गाय गुम हो गई, तब भी आपने कहा था कि यह भी ठीक है और जब गाय मिल गई है, तब भी आप यही कह रहे हैं कि ठीक है। ऐसा क्यों?
> गुरु ने शिष्य से कहा कि यही जीवन को जीने का सही तरीका है। हमारे जीवन में जैसी परिस्थितियां, हमें उन्हें ठीक समझना चाहिए। परिस्थितियों के अनुसार खुद ढाल लेना चाहिए। यही सुखी जीवन का मूल मंत्र है।

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