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  • Tirupati Balaji Mandir Venkateswara: Tirumala Tirupati Devasthanam Trust Planning To Build Tirupati Balaji Mandir In Tribal Areas

देश के पिछड़े और आदिवासी इलाकों में तिरुपति बालाजी के भव्य मंदिर बनाए जाएंगे, ऐसा पहला मंदिर अमरावती में

8 महीने पहलेलेखक: नितिन आर. उपाध्याय
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तिरुमाला स्थित भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर 2000 साल पुराना है।
  • देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक तिरुमाला तिरुपति ट्रस्ट ने फंड जुटाना शुरू किया
  • श्रीवाणी ट्रस्ट के जरिए बनाए जाएंगे तिरुपति मंदिर, अभी तक 3.2 करोड़ का फंड मिला
  • इस ट्रस्ट में प्रति व्यक्ति दान राशि 10 हजार रु. तय, बदले में तिरुपति के दर्शन का मौका

भोपाल. देश के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार तिरुपति बालाजी अब आंध्र प्रदेश से बाहर निकलने की तैयारी में हैं। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट अपनी नई योजना के मुताबिक देशभर के पिछड़े और आदिवासी इलाकों में तिरुपति मंदिरों का निर्माण करने वाला है। इस प्रोजेक्ट के तहत पहला मंदिर आंध्र प्रदेश के ही अमरावती में बनना तय किया गया है। यह तिरुपति से लगभग 400 किमी दूर है। इस मंदिर को मूल तिरुपति की तर्ज पर ही भव्य रूप दिया जाएगा। इसके डिजाइन, ले-आउट पर काम हो चुका है। भूमि पूजन भी हो चुका है।


तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट के पीआरओ टी रवि के मुताबिक पहले चरण में इसके लिए फंड जुटाया जा रहा है। अभी इसके प्रचार प्रसार पर काम किया जा रहा है। श्रीवाणी ट्रस्ट (श्री वेंकटेश्वरा आलेयला निर्माणम ट्रस्ट) के जरिए आम लोगों से धन राशि जुटाई जा रही है। इसके लिए प्रति व्यक्ति 10 हजार रुपए दान राशि तय की गई है। श्रद्धालु इससे ज्यादा भी दान कर सकते हैं। इस ट्रस्ट में राशि दान करने वाले व्यक्ति को तिरुपति बालाजी के वीआईपी दर्शन कराने का प्रावधान है। आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में मंदिर बनाने के पीछे कारण है, उस इलाके को मुख्यधारा से जोड़ना। मंदिर बनने से वहां रोजगार और विकास के रास्ते खुलेंगे।


रवि ने बताया कि जिस गति से मंदिर निर्माण के लिए फंड इकट्ठा होगा, इसके आधार पर तय किया जाएगा कि किन राज्यों या इलाकों में कितने मंदिरों का निर्माण किया जाएगा। श्रीवाणी ट्रस्ट से लोग लगातार जुड़ रहे हैं, लेकिन ये प्रोजेक्ट हाल ही में शुरू हुआ है। इसे गति मिलने में थोड़ा समय लग सकता है। इस पर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट लगातार काम कर रहा है।

मंदिरों के रखरखाव का भी काम होगा
अमरावती प्रोजेक्ट के साथ ही अगले चरण में देश के उन स्थानों पर पर मंदिर बनाने की योजना है, जहां पिछड़ा, अति-पिछड़ा या आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। ट्रस्ट ऐसी जगहों पर धार्मिक परंपराओं, वैदिक कर्म और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ाने के उद्देश्य से काम कर रहा है। इसके साथ ही श्रीवाणी ट्रस्ट पौराणिक महत्व के स्थानों और मंदिरों के रखरखाव आदि का काम भी करेगा।

शुरुआती दिनों में लगभग 3.2 करोड़ का दान
श्रीवाणी ट्रस्ट को लेकर लोगों में भी उत्साह दिखाई दे रहा है। शुरुआती दिनों में ही ट्रस्ट ने करीब 3.2 करोड़ रुपए का फंड जुटा लिया है। इसमें प्रति व्यक्ति 10 हजार रुपए दान राशि है, जिसमें भगवान तिरुपति के विशेष दर्शन कराने का प्रावधान है।

अमरावती में 25 एकड़ में बनेगा तिरुपति मंदिर
अमरावती में बीते साल तिरुपति मंदिर जैसा ही मंदिर बनाने के लिए भूमि पूजन हो चुका है। करीब 25 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस मंदिर की वर्तमान लागत लगभग 150 करोड़ रुपए होगी। इसके लिए तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट और आंध्र सरकार दोनों ही काम कर रहे हैं। ये मंदिर हू-ब-हू तिरुपति की नकल होगा। इसमें चालुक्य और चोल काल का वास्तु होगा, जो आगम शास्त्र पर आधारित है।

तिरुपति ट्रस्ट - एक नजर में

  • मंदिर - 2000 साल पुराना
  • देवता - भगवान विष्णु और लक्ष्मी के अवतार वेंकटेश्वर और पद्मावती देवी
  • कुल संपत्ति - करीब 12 हजार करोड़ की धन राशि और 9 हजार किलो सोना
  • दर्शनार्थी - रोजाना औसतन 60 हजार
  • व्यवस्था - 47 हजार दर्शनार्थियों के एक साथ ठहरने की
  • बालाजी का शृंगार - लगभग 550 किलो सोने के आभूषण मौजूद
  • भोजन - देश की सबसे बड़ी भोजनशालाओं में से एक, एक समय में 4 से 5 हजार लोग खाना खाते हैं
  • प्रसाद - साल में 10 करोड़ से ज्यादा लड्डू प्रसाद की बिक्री, हर दिन लगभग 3 लाख लड्डू बिकते हैं
  • सोना या धन चढ़ाने की परंपरा - 7वीं शताब्दी से

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