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पौराणिक महत्व / मंत्र जाप में उपयोग होने वाली हर माला का होता है विशेष महत्व

Dainik Bhaskar

Feb 11, 2019, 11:54 AM IST


right method for mantra chants according to hindu mythology
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right method for mantra chants according to hindu mythology
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रिलिजन डेस्क. यूं तो प्रार्थना करने के सभी के भिन्न भिन्न तरीके होते हैं, लेकिन मंत्र जाप करना काफी प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि ये मन को बहुत जल्द एकाग्र कर देते हैं। अलग-अलग मंत्र जाप से अलग-अलग फायदे होते हैं। इसलिए मंत्र जाप करने के लिए भी अलग-अलग मालाओं का प्रयोग करना चाहिए। आज हम आपको बताते हैं कि किस माला का क्या महत्व होता है।

मंत्र जप से जुड़ी विशेष बातें

  1. रुद्राक्ष 

    इस माला से किसी भी मंत्र का जाप आसानी से किया जा सकता है। ऐसी मान्यता है भगवान शिव को रुद्राक्ष बेहद प्रिय है। इसलिए महामृत्युंजय मन्त्र का जाप रुद्राक्ष की माला से ही करना चाहिए। वैसे इससे किसी भी देवी देवता के मंत्र का जाप किया जा सकता है। 

  2. हल्दी 

    मन की इच्छा को पूरा करने के लिए हल्दी माला का प्रयोग किया जाता है। गुरुदेव बृहस्पति और मां बगलामुखी के मंत्र का जाप इसी माला से होता है। हल्दी माला से विद्या प्राप्ति, संतान प्राप्ति और ज्ञान प्राप्ति के लिए मंत्र जाप किया जाता है। 
     

  3. स्फटिक 

    स्फटिक माला का प्रयोग धन प्राप्ति और मन की एकाग्रता के लिए किया जाता है। मां लक्ष्मी के मंत्र जाप इसी माला के द्वारा करें। उच्च रक्तचाप में इस माला को पहन सकते हैं। 

  4. चंदन 

    चंदन की माला दो प्रकार की होती है, एक सफेद चंदन और दूसरा लाल चंदन। मां दुर्गा के मंत्र का जाप लाल चंदन और कृष्ण के मंत्र का जाप सफेद चंदन से किया जाता है। 
     

  5. तुलसी

     तुलसी की माला से देवी और भगवान शिव के मंत्र का जाप नहीं किया जाता। तुलसी की माला धारण करने पर हमेशा वैष्णव रहना चाहिए। तुलसी की माला द्वारा भगवान विष्णु के मंत्र का जाप किया जाता है, इसलिए यह माला बहुत महत्वपूर्ण है। 

  6. कमलगट्टे 

    कमलगट्टे की माला का प्रयोग धन वैभव प्राप्ति के लिए किया जाता है। शत्रुओं के नाश के लिए भी कमलगट्टे का प्रयोग किया जाता है। मंत्र जाप के बाद इस माला को पूजा स्थान में रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि कमलगट्टे की माला लक्ष्मीजी को प्रिय है। 

किसी भी माला के प्रयोग के रखें ये सावधानी

  1. मंत्रजाप के लिए उपयोग की जाने वाली माला हमेशा 108 या 27 दाने की होनी चाहिए। 

    • हर दाने के बाद एक गांठ जरूर लगी हो। 
    • मंत्र जाप के समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की माला पूरी तरह से ढ़की होनी चाहिए। 
    • मंत्र जाप करते समय तर्जनी उंगली का हाथ के पंजे के अन्य हिस्सों से स्पर्श नहीं होना चाहिए। 
    • मंत्र जाप के बाद माला मंदिर में रखना चाहिए। 
    • माला हमेशा अपनी रखनी चाहिए किसी और को इसका प्रयोग ना करने दें। 

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