तीर्थ दर्शन / भगवान कृष्ण ने भालका तीर्थ में त्यागी थी देह, तीर लगने से हुई थी मृत्यु



special story bhalka teerth in gujrat
कृष्ण भगवान के तलवे में बाण लगा था । कृष्ण भगवान के तलवे में बाण लगा था ।
इस मंदिर में बनी भगवान श्री कृष्ण और जरा(शिकारी) की प्रतिमा उनके अंतिम समय के बारे में बताती है। इस मंदिर में बनी भगवान श्री कृष्ण और जरा(शिकारी) की प्रतिमा उनके अंतिम समय के बारे में बताती है।
भालका तीर्थ में बना कुंड जहां लगा है पीपल का पेड़। भालका तीर्थ में बना कुंड जहां लगा है पीपल का पेड़।
इस जगह को आज दुनिया भर में देहोत्सर्ग तीर्थ के नाम से मशहूर है। इस जगह को आज दुनिया भर में देहोत्सर्ग तीर्थ के नाम से मशहूर है।
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कृष्ण भगवान के तलवे में बाण लगा था ।कृष्ण भगवान के तलवे में बाण लगा था ।
इस मंदिर में बनी भगवान श्री कृष्ण और जरा(शिकारी) की प्रतिमा उनके अंतिम समय के बारे में बताती है।इस मंदिर में बनी भगवान श्री कृष्ण और जरा(शिकारी) की प्रतिमा उनके अंतिम समय के बारे में बताती है।
भालका तीर्थ में बना कुंड जहां लगा है पीपल का पेड़।भालका तीर्थ में बना कुंड जहां लगा है पीपल का पेड़।
इस जगह को आज दुनिया भर में देहोत्सर्ग तीर्थ के नाम से मशहूर है।इस जगह को आज दुनिया भर में देहोत्सर्ग तीर्थ के नाम से मशहूर है।

Dainik Bhaskar

Jan 31, 2019, 01:56 PM IST

रिलिजन डेस्क. हमारे देश में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं जो हिंदू धर्म की द्रष्टि से बहुत महत्व रखते हैं। ऐसा ही एक स्थान सोमनाथ मंदिर से करीब 5 किलोमीटर दूर गुजरात के वेरावल में स्थित है जिसका नाम भालका तीर्थ स्थल है। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में श्री कृष्ण नें अपनी का देह त्याग किया था। लोगों का मानना है कि भगवान कृष्ण यहां आने वालों की सभी मुरादें पूरी करते हैं। इस स्थान पर एक परपल का पेड़ भी है जो करीब 5 हजार साल पुराना है और अभी तक हरा-भरा है। यहां आने वाले लोग इस पेड़ की भी पूजा करते हैं।

इस तीर्थ स्थान से जुड़ी कुछ खास बातें

  1. लगा था जरा शिकारी का तीर...

    लोक कथाओं के अनुसार महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद 36 साल बाद तक यादव कुल मद में आ गए। आपस में  लड़ने लगे। इसी कलह से परेशान होकर कृष्ण सोमनाथ मंदिर से करीब सात किलोमीटर दूर वैरावल की इस जगह पर विश्राम करने आ गए। 

    • ध्यानमग्र मुद्दा में लेटे हुए थे तभी जरा नाम के भील को कुछ चमकता हुआ नजर आया। उसे लगा कि यह किसी मृग की आंख है और बस उस ओर तीर छोड़ दिया, जो सीधे कृष्ण के बाएं पैर में जा धंसा। 
    • जब जरा करीब पहुंचा तो देखकर भगवान से इसकी माफी मांगने लगा। जिसे उसने मृग की आंख समझा था, वह कृष्ण के बाएं पैर का पदम था, जो चमक रहा था। भील जरा को समझाते हुए कृष्ण ने कहा कि क्यों व्यर्थ ही विलाप कर रहे हो, जो भी हुआ वो नियति है।
    • बाण लगने से घायल भगवान कृष्ण भालका से थोड़ी दूर पर स्थित हिरण नदी के किनारे पहुंचे। कहा जाता है कि उसी जगह पर भगवान पंचतत्व में ही विलीन हो गए।

  2. आज भी मौजूद है यहां भगवान कृष्ण के चरणों के निशान.

    हिरण नदी सोमनाथ से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। यहां नदी के किनारे आज भी भगवान के चरणों के निशान मौजूद हैं। इस जगह को आज दुनिया भर में देहोत्सर्ग तीर्थ के नाम से मशहूर है।

  3. कैसे पहुंचे 

    यह तीर्थ स्थान रेल/ सड़क/ वायु मार्गों से जुड़ा हुआ है। यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल है। हवाई मार्ग के लिए आप राजकोट /केशोद हवाई अड्डे का सहारा ले सकते हैं। आप चाहें तो यहां सड़क मार्गों से भी पहुंच सकते हैं। भालका गुजरात के बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
     

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