रामनवमी के नौ राम /राम से बड़ा राम का नाम, ग्रंथों के अनुसार- यह सबसे छोटा और सबसे सटीक मंत्र



special story for ramnavami, raam ke 9 roop
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special story for ramnavami, raam ke 9 roop

  • श्रीराम जन्मोत्सव पर भगवान राम के नौ अलग-अलग रूपों का ज्ञान आधारित विस्तार 
  • श्रीरामचरित मानस में  तुलसीदासजी ने विभिन्न प्रसंगों में इन्हीं पर सुंदर चौपाईयां लिखीं

Dainik Bhaskar

Apr 13, 2019, 07:51 AM IST

नितिन आर. उपाध्याय 
चैत्र शुक्ल नवमी...राम नवमी...वो तिथि जब वैकुंठ स्वामी भगवान विष्णु मानव रुप में धरती पर अवतरित हुए। नाम रखा गया “राम”। वाल्मीकि से लेकर तुलसी तक, विद्वानों ने हजारों तरह से राम की कथा को लिखा है। सार एक है, अर्थ एक है, कथा एक है, बस कहने का तरीका सबका अपना है। तुलसीदास द्वारा रची गई रामचरित मानस सबसे लोकप्रिय रामकथा है। राम के व्यक्तित्व के कई पहलुओं को इस कथा में गोस्वामी जी ने पिरोया है। राम नाम की महिमा से लेकर, पुत्र, पति, पिता, मित्र, भाई, योद्धा, परमात्मा और राजा राम। राम के व्यक्तित्व के नौ आयाम राम कथा में दिखाए गए हैं।

 

आयाम कई हैं, हरि अनंत-हरि कथा अनंता। लेकिन, हम आज राम नवमी पर श्रीराम के उन नौ रूपों के बारे में चर्चा करेंगे जो जीवन में प्रेरणा और ज्ञान भरते हैं। 


अयोध्या और दशरथ का आंगन
अयोध्या की भूमि और दशरथ का आंगन जहां भगवान नर अवतार लेकर आए। ये भी एक संकेत है, अयोध्या का मूल अर्थ है अ+युद्ध, मतलब वो स्थान जहां युद्ध ना होता हो, जो शांति की भूमि हो। और, दशरथ का अर्थ है, जो दस घोड़ों के रथ पर सवार हो। दस घोड़ों वाला रथ सिर्फ धर्म का है, अध्यात्म कहता है धर्म के दस अंग हैं। मनु ने धर्म के दस लक्षण कहे हैं - धृति: क्षमा दमोऽस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह:। धीर्विद्या सत्‍यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्‌।। (मनु स्‍मृति 6-96) 


अर्थ- धृति (धैर्य), क्षमा, दम (संयम) अस्तेय (चोरी ना करना). शौच (भीतर और बाहर की पवित्रता), इंद्रिय निग्रह (इंद्रियों को वश में रखना), धी (बुद्धि), विद्या, सत्य और अक्रोध। ये दस धर्म के लक्षण हैं। जो इन दस घोड़ों के रथ पर सवार है, वही दशरथ है। सीधा अर्थ है, जिस मन में भावनाओं का युद्ध ना हो, मन का स्वामी धर्म के दस लक्षणों से युक्त हो तो राम उसके मन में जन्म लेंगे। 


राम होने का अर्थ क्या? 
राम शब्द जितना छोटा है, इसकी व्याख्या उतनी ही विशाल है। पुराण कहते हैं “रमंते सर्वत्र इति रामः” अर्थात जो सब जगह व्याप्त है वो राम है। संस्कृत व्याकरण और शब्द कोष कहता है “रमंते” का अर्थ है राम, अर्थात जो सुंदर है, दर्शनीय है वो राम है। मनोज्ञ शब्द को भी राम से जोड़ा जाता है। मनोज्ञ का अर्थ है मन को जानने वाला। हिंदी व्याख्याकार राम का अर्थ बताते हैं जो आनंद देने वाला हो, संतुष्टि देने वाला हो। 

 

श्रीराम नाम महिमा…..

चहुँ जुग तीनि काल तिहुँ लोका। भए नाम जपि जीव बिसोका।।
बेद पुरान संत मत एहु। सकल सुकृत राम सनेहु।। (बालकांड, दोहा - 26/चौपाई-1)

 

अर्थ - चारों युगों में, तीनों कालों में और तीनों लोकों में, नाम को जप कर जीव शोक रहित हुए हैं। वेद, पुराण और संतों का मत यही है कि समस्त पुण्यों का फल श्रीरामजी (या राम नाम) में प्रेम होना है।

 

तुलसीदास ने बालकांड में राम नाम की महिमा का बखान किया है। राम शब्द को कई ग्रंथों ने संपूर्ण मंत्र तक माना है। राम नाम ग्रंथों में सबसे छोटा और सबसे सटीक मंत्र कहा गया है। ये इतना आसान है कि प्राचीन काल से राम शब्द भारतीय संस्कृति में अभिवादन करने के लिए भी उपयोग किया जाता है। स्वर विज्ञान कहता है, दीर्घ स्वर में राम शब्द का उच्चारण करने से शरीर पर वैसा ही असर पड़ता है, जैसा ऊँ के उच्चारण से होता है।

 

 

  • पुत्र श्रीराम…

    पुत्र श्रीराम…

    अर्थ - श्री रघुनाथ प्रातः काल उठकर माता-पिता और गुरु को मस्तक नवाते हैं। और, उनकी आज्ञा लेकर नगर का काम करते हैं। उनके चरित्र को देखकर राजा दशरथ मन में बड़े हर्षित होते हैं। 


    राम पुत्र के रुप में सबसे आदर्श व्यक्तित्व हैं। पिता के एक वचन के लिए राज्य का त्याग करके वनवास स्वीकार करने वाले राम रोज सुबह अपने माता-पिता और गुरु के चरण छूकर आशीर्वाद लेते हैं। राज्य के काम में पिता की सहायता करते हैं। 

  • पति श्रीराम… 

    पति श्रीराम… 

    अर्थ - एक बार सुंदर फूल चुनकर श्रीराम ने अपने हाथों से भांति-भांति के गहने बनाए और सुंदर स्फटिक शिला पर बैठे हुए प्रभु ने आदर के साथ वे गहने श्रीसीताजी को पहनाए। 


    मर्यादा पुरुषोत्तम राम का सीता के प्रति अगाध प्रेम है। वनवास के दौरान प्रसंग मिलता है कि अपने हाथों से सीता के लिए फूलों के गहने बनाए और आदर के साथ उन्हें पहनाए। राम संकेत कर रहे हैं कि आदर्श पति वो ही है जो पत्नी को प्रेम के साथ उचित आदर भी दे। वैवाहिक जीवन में एक-दूसरे के आत्मसम्मान और व्यक्तित्व की गरिमा का ध्यान रखना भी पति-पत्नी का कर्तव्य है। 

  • भाई श्री राम…

    भाई श्री राम…

    अर्थ - भरत के समान जगत में मुझे कौन प्यारा है। शकुन का बस यही फल है, दूसरा नहीं। श्रीरामचंद्रजी को अपने भाई का दिन रात ऐसा सोच रहता है, जैसा कछुए का हृदय अंडों में रहता है। 


    भगवान राम का अपने भाइयों के प्रति बहुत स्नेह था। उन्होंने लक्ष्मण को अपने साथ पुत्र के समान रखा, वहीं, भरत को वो सबसे ज्यादा प्रेम करते थे। एक भाई को अपने साथ स्थान दिया और दूसरे को मन में स्थान दिया। प्रेम के संतुलन का ये सूत्र सिर्फ श्रीराम ही जानते थे। रामचरित मानस में विभीषण, हनुमान और सुग्रीव तीनों को वो ही स्थान दिया, जिसकी तुलना वे भरत से करते हैं। तुम्ह मम प्रिय भरतहिं सम भाई….। 

  • मित्र श्री राम 

    मित्र श्री राम 

    अर्थ - जो लोग मित्र के दुःख से दुःखी नहीं होते, उन्हें देखने से ही बड़ा पाप लगता है। अपने पर्वत समान दुःख को धूल के समान और मित्र के धूल के समान दुःख को सुमेरु (बड़े भारी पर्वत) के समान जानें।

     
    मित्रता निभाने में भगवान राम से बढ़कर कभी कोई नहीं हुआ। जिसे भी मित्र बनाया, पहले उसकी इच्छा पूरी की। सुग्रीव से दोस्ती की तो बालि को मारकर उसे राजा बना दिया, विभीषण शरण में आया तो बिना कहे लंका का राजा घोषित कर दिया। राम में मित्रता का वो गुण है, जो किसी में नहीं। वे लेने के अपेक्षा नहीं रखते, पहले अपनी ओर से देते हैं। 

  • राजा श्री राम….

    राजा श्री राम….

    अर्थ - श्रीरामचंद्रजी के राज पर प्रतिष्ठित होने पर तीनों लोक हर्षित हो गए। उनके सारे शोक जाते रहे। कोई किसी से वैर नहीं करता। श्रीराम चंद्रजी के प्रताप से सबकी विषमता (आंतरिक भेदभाव) मिट गई। 


    राम शब्द का अर्थ ही आनंद और संतुष्टि है। जहां राम राजा बन जाएं वहां कोई भेदभाव, शत्रुता और दुःख हो ही नहीं सकते। रामराज्य की कल्पना ही इसलिए की जाती है, क्योंकि राम के राज्य में ही आंतरिक क्लेश, गरीबी, दुःख आदि का स्थान नहीं है। अगर इंसान के मन में राम का राज हो जाए तो उसका जीवन इन पीड़ाओं से मुक्त हो जाता है। 

  • परमात्मा श्री राम....

    परमात्मा श्री राम....

    अर्थ - कोई मनुष्य जो संपूर्ण जड़-चेतन जगत का द्रोही हो, यदि वह भी भयभीत होकर मेरी शरण तककर आ जाए और मद, मोह और नाना प्रकार के छल-कपट त्याग दे, तो मैं भी उसे शीघ्र ही साधु के समान निष्पाप कर देता हूं। 


    राम ने अपने परमतत्व की खूबी बताई है। जब इंसान सच्चे मन से उनके सामने आ जाता है, तो उसी समय जन्मों के पाप क्षण भर में मिट जाते हैं। सच्चे मन से का अर्थ ही है कि शरण में आ गए तो फिर लौटेंगे नहीं। सुंदरकांड में भगवान ने विभीषण से कहा है “सन्मुख होइ जीव मोहि जबही, जन्म कोटि अघ नासै तबहीं।”

  • योद्धा श्री राम 

    योद्धा श्री राम 

    अर्थ - श्रीराम अपने भुजदंडों से बाण और धनुष फिरा रहे हैं। शरीर पर रुधिर (रक्त) के कण अत्यंत सुंदर लगते हैं। मानो तमाल के वृक्ष पर बहुत सी लालमुनियां चिड़िया अपने महान सुख में मग्न हुई निश्चल बैठी हों। 


    राम जितने कोमल और सुदर्शन व्यक्तित्व हैं, उतने ही विकट योद्धा भी। वाल्मीकि ने पंचवटी में खर-दूषण और उनके 14 हजार राक्षसों की सेना से राम के युद्ध का प्रसंग लिखा है। 14 हजार राक्षसों की सेना के सामने ने अकेले राम। सबको मार दिया। अकेले ही पूरी सेना का नाश किया। 

  • पिता श्रीराम….

    पिता श्रीराम….

    अर्थ -  श्रीसीताजी ने दो सुंदर पुत्र लव और कुश को जन्म दिया। वेद-पुराणों ने जिनका वर्णन किया है। वे दोनों ही विजयी और विनयी व गुणों के धाम हैं। और, अत्यंत सुंदर हैं, मानो श्रीहरि के प्रतिबिंब ही हों। 


    राम ने जैसे पुत्र थे, वैसे ही पिता भी थे। जो आदर उन्होंने अपने पिता दशरथ को दिया, वो लव-कुश से पाया। यहां राम का जीवन संकेत करता है कि आप जैसा व्यवहार करते हैं, वो लौटकर आपके पास आता है। राम पिता दशरथ के आज्ञाकारी थे, लव-कुश राम के लिए वैसा ही सम्मान और प्रेम रखते थे। राम के स्वलोकगमन के बाद अयोध्या और राम राज्य की परिकल्पना को लव-कुश ने जीवित रखा।

  • शिष्य श्री राम….

    शिष्य श्री राम….

    अर्थ - श्रीरघुनाथ जी गुरु के गृह विद्या पढ़ने को गए। थोड़े ही समय में उनको सब विद्याएं आ गईं। चारों वेद जिनके स्वभाविक श्वास हैं, वे भगवान पढ़ें, ये भारी अचरज है। 


    शिष्य के रुप में पहले श्रीराम ने वसिष्ठ और फिर गुरु विश्वामित्र से शिक्षा ली। दोनों ही गुरु उनकी महिमा और स्वरुप को जानते थे। लेकिन, सारी विद्याओं के ज्ञाता श्रीराम ने सांसारिक संस्कारों को सुरक्षित रखने के लिए वैसे ही गुरु के आश्रमों में शिक्षा ग्रहण की जैसे कि आम विद्यार्थी करता है। ये संकेत है कि आप जिस परंपरा में रहें उसे पूरे मन से निभाएं, गुरु जो शिक्षा दे उसे पूरे मन से सीखें, कम समय में सीखें, इस तरह उसे जीवन में उतारें कि वो आपके लिए मार्गदर्शक का काम करे। 

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