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गुरु ने अपने 10 शिष्यों को दूसरे आश्रम पर जाने के लिए भेजा, कुछ दिनों बाद खबर आई कि वहां सिर्फ 1 ही शिष्य पहुंचा है, शेष 9 शिष्यों के साथ क्या हुआ?

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 06:00 PM IST

मंजिल पर जाने के लिए हजारों लोग चलते हैं, लेकिन पहुंचता कोई 1 ही है

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रिलिजन डेस्क। एक गुरु के दो आश्रम थे। एक शहर में और दूसरा गांव में। गुरु शहर वाले आश्रम में रहते थे और गांव वाला आश्रम उन्होंने एक बूढ़े साधु को सौंप रखा था। एक दिन गांव वाले आश्रम की देख-भाल कर बूढ़े साधु की तबीयत खराब हो गई।
उन्हें लगना लगा कि वो अब नहीं बचेंगे। बूढ़े साधु ने शहर वाले आश्रम में खबर भिजवाई कि एक नया उत्तराधिकारी भेजा जाए, जिसे वे आश्रम की जिम्मेदारी सौंप सकें। जब ये खबर शहर के आश्रम में रह रहे गुरु को बता चली तो अपने 10 शिष्यों को गांव वाले आश्रम में भेज दिया।
सभी शिष्यों को आश्चर्य हुआ कि गांव वाले आश्रम में तो सिर्फ एक उत्तराधिकारी भेजना था तो गुरुजी ने 10 शिष्यों को क्यों भेजा। एक शिष्य ने ये बात जाकर गुरु से पूछी। गुरु ने कहा कि- उनमें से कोई 1 ही अपनी मंजिल तक पहुंच पाएगा, शेष रास्ते में ही रूक जाएंगे।
जब वे 10 शिष्य गांव वाले आश्रम जा रहे थे तो रास्ते में एक नगर आया। वहां बहुत सारे लोग इकट्‌ठा थे। संन्यासियों को देखकर उन्होंने कहा कि- हमारे गांव के मंदिर के पुजारी की मृत्यु हो चुकी है। क्या आपमें से कोई मंदिर का पुजारी बन सकता है। उनमें से 1 शिष्य इसके लिए राजी हो गया।
जब दूसरा नगर आया तो वहां के राजा की बेटी की शादी हो रही थी। राजा के सैनिकों ने 3 शिष्यों को शादी में पुरोहित बनने के लिए रोक लिया। इस तरह किसी-न-किसी वजह से अन्य शिष्य भी कम होते गए। अंत में सिर्फ एक शिष्य ही गांव वाले आश्रम में पहुंच पाया।
यह बात जब शहर वाले आश्रम में रह रहे शिष्यों को पता चली तो उन्होंने गुरु से पूछा- यहां से तो 10 लोग गए थे, मगर वहां एक ही इंसान कैसे पहुंचा, शेष लोग कहां है? गुरु ने कहा- ऐसा ही होता है। ये मेरा निजी अनुभव है, इसलिए मैंने यहां से 10 लोगों को भेजा था।

लाइफ मैनेजमेंट
जब बहुत सारे लोग मिलकर किसी एक काम को करते हैं तो उनमें से बहुत से स्वार्थवश या किसी मजबूरी के कारण वो काम बीच में ही छोड़ देते हैं। कुछ ही लोग अपनी मंजिल तक पहुंच पाते हैं। इसलिए कहते हैं चलते हजारों हैं, लेकिन पहुंचता 1 है।

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