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राजा ने अपने मंत्री से पूछे 3 अजीब सवाल, मंत्री ने कहा- इन सवालों का जवाब आपको कल दूंगा, सवाल ये थे- भगवान कहां रहता है, वह कैसे मिलता है और वह करता क्या है? इसके बाद मंत्री ने क्या किया?

सूझ-बूझ से हर समस्या का समाधान और सवाल का जवाब ढूंढा जा सकता है

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 08:00 PM IST
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रिलिजन डेस्क। किसी देश में एक नास्तिक राजा था। वह भगवान बिल्कुल नहीं मानता था। उसके दरबार में एक समझरा मंत्री था, जो भगवान का भक्त था। एक दिन राजा ने अपने मंत्री को नीचा दिखाने के लिए 3 प्रश्न पूछे- भगवान कहां रहता है, वह कैसे मिलता है और वह करता क्या है?
मंत्री राजा को इन प्रश्नों को सुनकर चौंक गए और बाद में बोले कि- आपके इन तीनों प्रश्नों के उत्तर मैं कल आपको दूँगा। राजा ने कहा ठीक है। मंत्री जब घर पहुंचे तो सोच में डूबे हुए थे।
उनके पुत्र ने जब इसका कारण पूछा तो उन्होंने 3 प्रश्नों वाली बात उसे बता दी। मंत्री ने ये भी कहा कि- मुझे इन सवालों को उत्तर सूझ नही रहे हैं और कल दरबार में इनका उत्तर देना है।
मंत्री के पुत्र ने कहा- पिता जी। कल आप मुझे दरबार में अपने साथ ले चलना। मैं राजा के तीनों प्रश्नों के उत्तर दूँगा। पुत्र की बात सुनकर मंत्री अगले दिन उसे अपने साथ ले गया।
दरबार में पहुंचकर मंत्री ने राजा से कहा कि- आपके प्रश्नों के उत्तर मेरा पुत्र देगा।
राजा ने मंत्री के पुत्र से पहला प्रश्न पूछा- बताओ, भगवान कहां रहता है?
मंत्री के पुत्र ने एक गिलास शक्कर मिला हुआ दूध मंगवाया और कहा- ये दूध आपको कैसा लगा?
राजा ने कहा- ये मीठा है।
पुत्र ने कहा- क्या इसमें आपको इसमें शक्कर दिखाई दे रही है?
राजा ने कहा- वह तो घुल गयी।
मंत्री पुत्र ने कहा- भगवान भी इसी प्रकार संसार की हर वस्तु में रहता है। जैसे शक्कर दूध में घुल गयी है, लेकिन दिखाई नही दे रही है।
राजा ने संतुष्ट होकर दूसरा प्रश्न पूछा- बताओ, भगवान मिलते कैसे हैं?
मंत्री पुत्र ने दही मंगवाया और राजा से पूछा- क्या आपको इसमें मक्खन दिखाई दे रहा है?
राजा ने कहा- मक्खन तो दही में है पर इसको मथने पर ही दिखाई देगा।
मंत्री पुत्र ने कहा- उसी तरह मन को मथने से ही भगवान के दर्शन हो सकते हैं।
राजा ने अंतिम प्रश्न पूछा- भगवान करता क्या है?
मंत्री पुत्र ने कहा- इस सवाल का जवाब देने से पहले आपको मुझे गुरू स्वीकार करना पड़ेगा।
राजा ने कहा- ठीक है, तुम गुरू और मैं आप का शिष्य।
मंत्री पुत्र ने कहा- गुरू तो ऊंचे आसन पर बैठता है और शिष्य नीचे।
राजा ने सिंहासन खाली कर दिया और स्वयं नीचे बैठ गए।
मंत्री पुत्र ने सिंहासन पर बैठ कर कहा– आपके अंतिम प्रश्न का उत्तर तो यही है।
राजा ने कहा- क्या मतलब? मैं कुछ समझा नहीं।
मंत्री पुत्र ने कहा- भगवान यही तो करता है। पल भर में राजा को रंक बना देता है और भिखारी को सम्राट बना देता है।
राजा को उसके सभी प्रश्नों को उत्तर मिल चुके थे। इसके बाद वो नास्तिक राजा भी भगवान में विश्वास करने लगा।


लाइफ मैनेजमेंट
ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका कोई हल न हो। जरूरत है तो बस उस समस्या को सूझ-बूझ से सुलझाने की। कई बार हम किसी परेशान का हल नहीं ढूंढ पाते, ऐसी स्थिति में हमारे आस-पास किसी विश्वासपात्र व्यक्ति से उसके बारे में पता कर सकते हैं।

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