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एक सेठ के पास अपार धन-संपत्ति थी, एक दिन सेठ को पता चला कि इतनी संपत्ति से उसकी 7 पीढ़ियां बिना काम किए भी बैठ कर खा सकती हैं, ये सुनते ही सेठ को एक अजीब चिंता सताने लगी

आज की बचत ही कल का सहारा होती है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होनी चाहिए

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 08:00 PM IST
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रिलिजन डेस्क। किसी नगर में एक सेठ रहता था। उसके पास अपार धन-संपत्ति थी। एक दिन उसने सोचा क्यों न, अपने पूरे धन का मूल्यांकन करवाया जाए। पता तो चले मेरे पास कितना धन है। सेठ ने उसी समय एक लेखा अधिकारी को बुलाया और इस काम में लगा दिया।
करीब एक सप्ताह बाद लेखा अधिकारी ने सेठ से कहा कि- मोटे तौर पर कहूं तो आपकी 7 पीढ़ी बिना कुछ किए अपना जीवन आराम से बिता सकती हैं, आपके पास इतना धन है। लेखा अधिकारी की बात सुन सेठ चिंता में डूब गया और सोचने लगा- तो क्या मेरी आठवीं पीढ़ी के पास पैसा नहीं होगा?
सेठ को दिन-रात ये चिंता सताने लगी कि उसकी आठवीं पीढ़ी का क्या होगा? इसी चिंता में सेठ एक संत से मिलने गए।
सेठ ने संत को बताया कि- मेरे पास सिर्फ सात पीढ़ी के लिए पर्याप्त धन है, मेरी इसके आगे की पीढ़ियां भूखी न मरें, इसके लिए कोई उपाय बताएं।
संत ने सेठ से कहा कि- इसका हल तो बहुत आसान है। यहां से कुछ दूर एक बस्ती है, वहां एक बुढ़िया रहती है। उसके यहां कोई कमाने वाला नहीं है। उसे मात्र आधा किलो आटा दान कर दो। इसी से तुम्हारी हर मनोकामना पूरी हो जाएगी और तुम जो चाहते हो, वो मिल जाएगा।
सेठ तुरंत उस बुढ़िया के पास पहुंच गए। संत ने आधा किलो आटे की बात कही थी, लेकिन सेठ एक बोरी आटा ले गए।
सेठ ने बूढ़ी माताजी से कहा- मैं आपके लिए आटा लाया हूं, इसे स्वीकार कीजिए।
बूढ़ी मां ने कहा- बेटा, आटा तो मेरे पास है, मुझे नहीं चाहिए।
सेठ ने कहा- फिर भी रख लीजिए।
बूढ़ी मां ने कहा- क्या करूंगी रख के, मुझे आवश्यकता नहीं है।
सेठ ने कहा- कोई बात नहीं, क्विंटल नहीं तो यह आधा किलो तो रख लीजिए।
बूढ़ी मां ने कहा- बेटा, आज मेरे खाने का इंतजाम हो चुका है।
सेठ ने कहा- तो फिर इसे कल के लिए रख लीजिए।
बूढ़ी मां ने कहा- कल की चिंता मैं आज क्यों करुं। जैसे हमेशा प्रबंध होता है कल के लिए भी कल ही प्रबंध हो जाएगा।
बूढ़ी मां की बात सुनकर सेठ की आंखें खुल चुकी थी। सेठ ने सोचा- एक गरीब बुढ़िया कल के भोजन की चिंता नहीं कर रही और मेरे पास अथाह धन सामग्री होते हुए भी मैं आठवी पीढ़ी की चिंता में घुला जा रहा हूं। मेरी चिंता का कारण अभाव नहीं तृष्णा है।

लाइफ मैनेजमेंट
भविष्य की चिंता करना अच्छी बात है, क्योंकि आज की बचत ही कल का सहारा होती है। लेकिन इसकी भी एक सीमा है। यदि किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त पैसा हो और उसके बाद भी यदि वह और अधिक धन की इच्छा रखता हो तो उसे लालच कहते हैं और लालच ही कई बुराइयों की जड़ है।

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