देवउठनी एकादशी / शालिग्राम घर में रखना चाहते हैं तो इसकी प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं



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शालिग्राम घर में रखने से और रोज पूजा करने से दूर होते हैं वास्तु के कई दोष

Dainik Bhaskar

Nov 07, 2019, 04:24 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। देवउठनी एकादशी पर तुलसी और शालीग्राम का विवाह कराने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। इस साल ये तिथि शुक्रवार, 8 नवंबर को है। शालिग्राम नेपाल में गंडकी नदी के तल में मिलते हैं। ये काले रंग के चिकने, अंडाकार होते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार अगर शालिग्राम घर में रखना चाहते हैं तो इसकी प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती है। शालिग्राम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।

  • शालिग्राम अलग-अलग कई रूपों में मिलते हैं। कुछ अंडाकार होते हैं, कुछ में एक छेद होता है। इन पत्थरों पर शंख, चक्र, गदा या पद्म के शुभ चिह्न बने होते हैं। शालिग्राम की पूजन तुलसी के बिना पूर्ण नहीं मानी जाती है।
  • तुलसी और शालिग्राम विवाह करवाने से वही पुण्य फल प्राप्त होता है जो कन्यादान करने से मिलता है। पूजा में शालिग्राम को स्नान कराना चाहिए। चंदन लगाकर तुलसी दल अर्पित करना चाहिए।
  • मान्यता है कि घर में भगवान शालिग्राम हो, वह तीर्थ के समान माना जाता है। जिस घर में शालिग्राम का रोज पूजन होता है, वहां वास्तु दोष और अन्य बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।
  • स्कंदपुराण के कार्तिक महात्म्य में शिवजी ने भी शालिग्राम की स्तुति की है। ब्रह्मवैवर्तपुराण के प्रकृतिखंड अध्याय में बताया गया है कि जहां शालिग्राम की पूजा होती है वहां भगवान विष्णु के साथ भगवती लक्ष्मी भी निवास करती हैं।
  • शालिग्राम शिला का जल जो अपने ऊपर छिड़कता है, वह समस्त यज्ञों और संपूर्ण तीर्थों में स्नान के समान फल पा लेता है।
  • जो व्यक्ति रोज सुबह शालिग्राम शिला का जल से अभिषेक करता है, वह संपूर्ण दान के पुण्य और पृथ्वी की प्रदक्षिणा के उत्तम फल का अधिकारी बन जाता है।
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