गायत्री जयंती / गायत्री मंत्र का जप करते समय इन बातों का रखें ध्यान, क्या है इस महामंत्र का अर्थ

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2019, 04:14 PM IST



Gayatri Jayanti 2019: Keep Care While Chanting Gayatri Mantra What is The Meaning of This Mantra
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Gayatri Jayanti 2019: Keep Care While Chanting Gayatri Mantra What is The Meaning of This Mantra

जीवन मंत्र डेस्क. गायत्री मंत्र को वेदों में बड़ा ही चमत्कारी और फायदेमंद बताया गया है। वेदों की कुल संख्या चार है। इन चारों वेदों में गायत्री मंत्र का उल्लेख किया गया है। माना जाता है कि इस मंत्र में इतनी शक्ति है कि नियमित तीन बार इसका जप करने वाले व्यक्ति के आस-पास नकारात्मक शक्त‌ियां नहीं फटकती हैं। गायत्री मंत्र के जप से कई प्रकार का लाभ मिलता है। इस मंत्र के जप से बौद्ध‌िक क्षमता और मेधा शक्ति यानी स्मरण क्षमता बढ़ती है।

 

गायत्री मंत्र और उसका अर्थ - 

 

मंत्र -  ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।

 

ॐ - ईश्वर 

भू: - प्राणस्वरूप 

भुव: - दु:खनाशक

स्व: - सुख स्वरूप 

तत् - उस 

सवितु: - तेजस्वी 

वरेण्यं - श्रेष्ठ 

भर्ग: - पापनाशक 

देवस्य - दिव्य

धीमहि - धारण करे 

धियो - बुद्धि

यो - जो 

न: - हमारी 

प्रचोदयात् - प्रेरित करे

 

अर्थ -  सभी को जोड़ने पर अर्थ है- उस प्राणस्वरूप, दु:ख नाशक, सुख स्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देव स्वरूप परमात्मा को हम अन्तरात्मा में धारण करें। वह ईश्वर हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।

 

गायत्री मंत्र जप करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए - 

 

1. गायत्री मंत्र को पढ़ते समय आरामदायक स्थिति में बैठना चाहिए, जैसे पदमासन, अर्ध पद्मासन और सिद्धआसन। किसी आसान पर बैठकर ही गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए।

 

2. इस मंत्र का जाप नहाधोकर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर करना चाहिए।

 

3. गायत्री मंत्र का जप सूर्योदय से दो घंटे पूर्व से लेकर सूर्यास्त से एक घंटे बाद तक कि‌या जा सकता है। मौन यानी मानसि‌क जप कभी भी कर सकते हैं, लेकि‌न रात्रि‌ में इस मंत्र का जप नहीं करना चाहि‌ए। माना जाता है कि‌ रात में गायत्री मंत्र का जप लाभकारी नहीं होता है।

 

4. अगर माला से गायत्री मंत्र का जप करना चाहते हैं तो 108 मनकों की माला को रखें। इसके लिए तुलसी या चंदन की माला रखें।

 

5. इस मंत्र को जल्दी -जल्दी नहीं पढ़ना चाहिए। इसके महत्व और अर्थ को समझकर ही उच्चारण करना चाहिए।

 

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