पर्व / गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की आराधना से प्रसन्न होती हैं देवी, 3 से 10 जुलाई तक रहेगी यह नवरात्रि



Gupt Navaratri 3 to 10 July: Goddesses Durga is pleased with the worship of Dash Mahavidhya In Gupt Navaratri
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Gupt Navaratri 3 to 10 July: Goddesses Durga is pleased with the worship of Dash Mahavidhya In Gupt Navaratri

Dainik Bhaskar

Jul 01, 2019, 11:59 AM IST

जीवन मंत्र डेस्क. आमतौर पर लोगों को केवल दो नवरात्रों के बारे में मालूम होता हैं, आश्विन या शारदीय नवरात्र। इसके अतिरिक्त दो और नवरात्र भी हैं जिनमेें विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है। कम लोगों को इसका ज्ञान होने के कारण या इसके छिपे हुए होने के कारण इसको गुप्त नवरात्र कहते हैं। 3 जुलाई से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि शुरू हो रही है। 

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस साधना के परिणाम बड़े आश्चर्यचकित करने वाले मिलते हैं। जहां तक पूजा की विधि का सवाल है मान्यतानुसार गुप्त नवरात्रि के दौरान भी पूजा अन्य नवरात्र की तरह ही करनी चाहिए। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा को घटस्थापना कर प्रतिदिन सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा की जाती है। अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। गुप्त नवरात्रि में देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं, लेकिन इसमें साधकों को पूर्ण संयम और शुद्धता से देवी आराधना करना होती है। 

 

  • बन रहे हैं शुभ संयोग 

इस बार आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि आठ दिनों की है। सप्तमी तिथि का क्षय होने के कारण यह स्थिति बनी है। 3 जुलाई को गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी और 10 जुलाई को भड़ली नवमी के साथ गुप्त नवरात्रि पूर्ण होगी। गुप्त नवरात्रि में इस बार सर्वार्थसिद्धि और रवि योग के साथ ही अत्यंत शुभ माना जाने वाला गुरु-पुष्य संयोग भी बन रहा है। यह संयोग 4 जुलाई को बनेगा। इसके अलावा विनायक चतुर्थी, कुमार षष्ठी, जैसे पर्व भी आएंगे। गुप्त नवरात्रि के आठ दिनों में तीन बार रवियोग और एक बार सर्वार्थसिद्धि योग आएगा। 

 

  • गुप्त नवरात्रि में करें दुर्गासप्तशती का पाठ 

गुप्त नवरात्रि में अधिकांश साधक देवी की आराधना कर अधिक से अधिक लाभ-पुण्य कमाने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्रि के दिन तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन माने गए हैं। कई साधक इन दिनों में दसों महाविद्याओं की साधना भी करते हैं। इनसे न केवल स्वयं के जीवन की परेशानियों का अंत होता है, बल्कि वे दूसरों की भलाई के काम भी कर सकते हैं। गृहस्थ साधक जो सांसारिक वस्तुएं, भोग-विलास के साधन, सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन पाना चाहते हैं उन्हें इन नौ दिनों में दुर्गासप्तशती का पाठ करना चाहिए। गुप्त नवरात्रि में मानसिक पूजा की जाती है। माता की आराधना मनोकामनाओं को पूरा करती है। 

 

  • इन नौ दिनों में सतर्कता रखना जरूरी 

इन नवरात्र में मानसिक पूजा का महत्व है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि गुप्त नवरात्र केवल तांत्रिक विद्या के लिए ही होते हैं। इनको कोई भी कर सकता है, लेकिन थोड़ी सतर्कता रखनी आवश्यक है। दस महाविद्या की पूजा सरल नहीं। नौ दिनों के लिए कलश की स्थापना की जा सकती है। अगर कलश की स्थापना की है तो दोनों वेला मंत्र जाप, चालीसा या सप्तशती का पाठ करना चाहिए। दोनों ही समय आरती भी करना अच्छा होगा। मां को दोनों वेला भोग भी लगाएं। मां के लिए लाल फूल सर्वोत्तम होता है पर ध्यान रखना चाहिए मां को आक, मदार, दूब और तुलसी बिल्कुल न चढ़ाएं। 

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