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पति की दीर्घायु के लिए 12 सितंबर को महिलाएं करेंगी व्रत



Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 04:05 PM IST

रिलिजन डेस्क. बुधवार, 12 सितंबर को महिलाओं का विशेष पर्व हरितालिका तीज है। इस दिन शिवजी और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस तीज पर की गई पूजा से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और पति का दुर्भाग्य दूर होता है और उसकी उम्र लम्बी होती है। अगर कोई अविवाहित कन्या इस दिन पूजा-पाठ करती है तो उसे मनचाहा जीवन साथी मिल सकता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत और रात्रि जागरण कर शिव पार्वती का पूजन करती हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए घर की खुशहाली के लिए महिलाओं के लिए कुछ खास उपाय जो इस दिन किए जा सकते हैं...

आइए जाने इससे जुड़ी मान्यताएं और उपाय

  1. उपाय

    1.सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद किसी शिव मंदिर जाएं। मंदिर में शिवलिंग के सामने बैठकर शिवजी और माता पार्वती की पूजा करें। पूजा में इस मंत्र का जाप 108 बार करें...
    मंत्र
    गौरी मे प्रीयतां नित्यं अघनाशाय मंगला।
    सौभाग्यायास्तु ललिता भवानी सर्वसिद्धये।।
    अर्थ: गौरी नित्य मुझ पर प्रसन्न रहें, मंगला मेरे पापों का विनाश करें। ललिता मुझे सौभाग्य प्रदान करें और भवानी मुझे सब सिद्धियां प्रदान करें।
    2.माता पार्वती के लिए सुहाग का सामान जैसे लाल चूड़ियां, लाल चुनरी, कुमकुम आदि चीजें मंदिर में चढ़ाएं।
    3.शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर ऊँ सांब सदा शिवाय नम: मंत्र का जाप 108 बार करें। वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर करने की प्रार्थना करें।
    4.घर की सुख-शांति के लिए शिव-पार्वती से पहले गणेशजी की पूजा जरूर करें। गणेशजी को दूर्वा चढ़ाएं। मोदक का भोग लगाएं।
    5.किसी गरीब सुहागिन को सुहाग का सामान दान करें। लाल साड़ी उपहार में दें।

  2. पूजन विधि

    हरतालिका तीज पूजन प्रदोष काल में किया जाता है। पूजन के लिए सबसे पहले मिट्टी और बालू रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की प्रतिमा बनाएं। 

    - फुलेरा बनाकर उसे सजाएं। रंगोली डालकर उसपर पट्टा या चौकी रखें। चौकी पर सातिया बनाएं और उस पर थाली रखें। अब उस थाल में केले के पत्ते रखें। 

    - तीनों प्रतिमाओं को केले के पत्तों पर आसीत करें। इसके बाद शिव का पूजन करें और फिर गौरी पर पूरा शृंगार करें।

  3. हरतालिका तीज व्रत से जुड़े नियम 

    इस व्रत को निर्जला और निराहार किया जाता है। सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाता। 

    - व्रत को कुंवारी कन्याएं और सुहागन स्त्रियां करती है। हर वर्ष पूरे नियम और विधान के साथ व्रत को किया जाता है। इस दिन रतजगा किया जाता है।

  4. क्यों कहते हैं हरतालिका

    यह दो शब्दों के मेल से बना माना जाता है हरत और आलिका. हरत का तात्पर्य हरण से लिया जाता है और आलिका सखियों को संबोंधित करता है।

    - मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती की सहेलियां उनका हरण कर उन्हें जंगल में ले गई थीं. जहां माता पार्वती ने भगवान शिव को वर रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था।

    - हरतालिका तीज के पिछे एक मान्यता यह भी है कि जंगल में स्थित गुफा में जब माता भगवान शिव की कठोर आराधना कर रही थी तो उन्होंने रेत के शिवलिंग को स्थापित किया था।

    - मान्यता है कि यह शिवलिंग माता पार्वती के जरिए हस्त नक्षत्र में भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि को स्थापित किया था। इसी कारण इस दिन को हरतालिका तीज के रूप में मनाया जाता है।

  5. तीज के बाद विराजेंगे गणेश 

    हरतालिका तीज के व्रत के बाद 13 सितंबर को गणेश चतुर्थी, 14 सितंबर को ऋषि पंचमी, 15 सितंबर को मोरछठ, 16 सितंबर को संतान सप्तमी और 17 सितंबर राधा अष्टमी, 20 सितंबर को डोल ग्यारस, 22 सितंबर प्रदोष व्रत और 23 सितंबर को अनंत चतुर्दशी व्रत रहेगा। इस दिन गणेश विसर्जन भी होगा।