नवरात्रि 2018: पढ़ें दुर्गा जी की आरती कैसे करें, जानिए पूरी विधि और जरुरी बातें / नवरात्रि 2018: पढ़ें दुर्गा जी की आरती कैसे करें, जानिए पूरी विधि और जरुरी बातें

Maa Durga Aarti Jai Ambe Gauri: आरती से पहले मां दुर्गा के मंत्रों से तीन बार पुष्पांजलि देनी चाहिए और जयकार करनी चाहिए।

dainikbhaskar.com

Oct 11, 2018, 04:15 PM IST
Maa Durga Aarti Jai Ambe Gauri: Maa Durga Poojan Vidhi Durga ji Ki Aarti

नवरात्रि में रोज सुबह-शाम मां दुर्गा की आरती करनी चाहिए। आरती करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। वहीं आरती में शामिल होने वालों पर भी मां की कृपा बनी रहती है। मां दुर्गा की आरती में कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। आरती से पहले मां दुर्गा के मंत्रों से तीन बार पुष्पांजलि देनी चाहिए। इसके बाद शंख, घड़ियाल, ढोल और नगाड़े आदि महावाद्यों से जय-जयकार करना चाहिए। फिर घी या कपूर से विषम संख्या में (1,5,7,11,21,101) बत्तियाँ जलाकर आरती शुरू करें। विषम संख्याओ में तीन बत्तियों का प्रयोग न करें।
ज्यादातर पांच बत्तियों से आरती की जाती है, इसे पंचप्रदीप भी कहा जाता है। कहीं-कहीं एक, सात या उससे भी अधिक बत्तियों से आरती की जाती है। कपूर से भी आरती होती है। पद्मपुराण में कहा गया है कि ‘कुंकुम, अगर, कपूर, घृत और चन्दन की सात या पाँच बत्तियाँ बनाकर या दीपक की (रुई और घी की) बत्तियाँ बनाकर सात बत्तियों से शंख, घण्टा आदि बाजे बजाते हुए आरती करनी चाहिए। आरती करते समय सबसे पहले देवि प्रतिमा के चरणों में चार बार घुमाएं, दो बार नाभि प्रदेश में, एक बार मुख मण्डल पर और सात बार समस्त अंगों पर घुमाएं इस तरह चौदह बार आरती घुमानी चाहिए।

दुर्गा जी की आरती -

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी,
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवजी।

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को,
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै,

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी,
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती,
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती,
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे,
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी,
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों,
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी,
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती,
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे,
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥ ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी,
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवजी। ॥ॐ जय अम्बे गौरी...॥

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