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नवरात्रि 2018: महाष्टमी और नवमी है 17-18 अक्टूबर को, जानिए क्यों होता है कन्या पूजन और इसके नियम

Dainik Bhaskar

Oct 15, 2018, 03:39 PM IST

Navratri 2018, Maha Ashtami and Navami: महाष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर इनकी पूजा की जाता है।

Navratri 2018: Maha Ashtami and Navami on 17th & 18th Oct, Know Why Kanya Poojan in Navratri

महाष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर इनका स्वागत किया जाता है। माना जाता है की कन्याओं को देवियों की तरह आदर सत्कार और भोज कराने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख समृधि का वरदान देती हैं। नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्त का नवरात्र व्रत पूरा होता है। अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें भोग लगाकर दक्षिणा देने मात्र से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं।

शास्त्रों के अनुसार कन्या पूजन के लिए दुर्गाष्टमी के दिन को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और शुभ माना गया है। कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर तथा 10 वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए और एक बालक भी होना चाहिए जिसे हनुमानजी या भैरव का रूप माना जाता है।

कन्या पूजन के नियम

महाष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन के कुछ नियम श्रीमद् देवीभागवत में बताए गए हैं। जिसके अनुसार एक साल की कन्या को नहीं बुलाना चाहिए, क्योंकि वह कन्या गंध भोग आदि पदार्थों के स्वाद से बिल्कुल अनजान रहती है इसलिए 2 से 10 साल तक की कन्याओं की पूजा की जा सकती है। कन्याओं को बुलाने के बाद उनकी पूजा करनी चाहिए। फिर सभी को खीर या हलवा और पुड़ी के साथ अन्य चीजों से खाना खिलाएं। भोजन के बाद कन्याओं के पैर धुलवाएं और उनके पैर के अंगूठे की पूजा करें। इस पूजा में कुमकुम, चंदन, फूल और चावल का उपयोग करें। फिर कन्याओं की आरती उतारें और अपनी श्रद्धा अनुसार उनको दक्षिणा, फल और वस्त्र दान करें। उसके बाद कन्याओं को प्रणाम कर के विदा करें। कन्या पूजन से दरिद्रता और शत्रुओं का नाश होता है। धन और आयु की वृद्धि होती है। वहीं विद्या, विजय, सुख-समृद्धि भी मिलती है

किस उम्र की कन्या को कौन सी देवि का रुप माना जाता है -

2 वर्ष की कन्या को ' कुमारिका ' कहते हैं और इनके पूजन से धन आयु और बल बढ़ता है।

3 वर्ष की कन्या को ' त्रिमूर्ति ' कहते हैं और इनके पूजन से घर में सुख-समृद्धि आती है।


4 वर्ष की कन्या को ' कल्याणी ' कहते हैं और इनके पूजन से सुख और लाभ मिलते हैं।
5 वर्ष की कन्या को ' रोहिणी ' कहते हैं इनके पूजन से शारीरिक सुख मिलता है।
6 वर्ष की कन्या को ' कालिका ' कहते हैं इनके पूजन से शत्रुओं का नाश होता है।
7 वर्ष की कन्या को ' चण्डिका ' कहते हैं इनके पूजन से संपन्नता और ऐश्वर्य मिलता है।
8 वर्ष की कन्या को ' साम्भवी ' कहते हैं इनके पूजन से दुःख-दरिद्रता का नाश होता है।
9 वर्ष की कन्या को ' दुर्गा ' कहते हैं इनकी पूजा करने से कठिन काम भी पूरे हो जाते हैं।
10 वर्ष की कन्या को ' सुभद्रा ' कहते हैं इनके पूजन से मोक्ष मिलता है।

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Navratri 2018: Maha Ashtami and Navami on 17th & 18th Oct, Know Why Kanya Poojan in Navratri
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