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चैत्र नवरात्र की अष्टमी / धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए इस विधि से करें मां महागौरी की पूजा

Dainik Bhaskar

Apr 12, 2019, 07:48 PM IST


poojan vidhi of mahagauri mata on navratri ashtami tithi
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poojan vidhi of mahagauri mata on navratri ashtami tithi
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रिलिजन डेस्क. नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। मां महागौरी का रंग अत्यंत गौरा है इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। मान्यता के अनुसार अपनी कठिन तपस्या से मां ने गौर वर्ण प्राप्त किया था। तभी से इन्हें उज्जवला स्वरूपा महागौरी, धन ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी त्रैलोक्य पूज्य मंगला, शारीरिक मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली माता महागौरी का नाम दिया गया।

पूजन विधि

  1. सबसे पहले चौकी (बाजोट) पर माता महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें।

    • चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका(सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें। 
    • इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा माता महागौरी सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। 
    • इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, - नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।
    • अगर आपके घर अष्‍टमी पूजी जाती है तो आप पूजा के बाद कन्याओं को भोजन भी करा सकते हैं। ये शुभ फल देने वाला माना गया है।

  2. ध्यान मंत्र

    श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:।
    महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥


    अर्थ - मां दुर्गा का आठवां स्वरूप है महागौरी का। देवी महागौरी का अत्यंत गौर वर्ण हैं। इनके वस्त्र और आभूषण आदि भी सफेद ही हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। महागौरी का वाहन बैल है। देवी के दाहिने ओर के ऊपर वाले हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है। बाएं ओर के ऊपर वाले हाथ में डमरू और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है। इनका स्वभाव अति शांत है।

  3. अष्टमी के शुभ मुहूर्त

    सुबह 11:17 से दोपहर 01:38 तक 

    • दोपहर 01:38 से 03:32 तक
    • दोपहर 03:32 से शाम 05:01 तक

  4. महागौरी की आरती

    जय महागौरी जगत की माया। जया उमा भवानी जय महामाया॥
    हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरी वहां निवासा॥
    चंद्रकली ओर ममता अंबे। जय शक्ति जय जय माँ जगंदबे॥
    भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्यता॥
    हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
    सती सत हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
    बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
    तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥
    शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
    भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥

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