ज्ञान / राम नवमी का महत्व, पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था श्रीराम का जन्म ये है पौराणिक कथा



Ram Navami 2019: Ram Navami Katha and Importance of Ram Navami, Ram Navami Puja and fast
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Ram Navami 2019: Ram Navami Katha and Importance of Ram Navami, Ram Navami Puja and fast

Dainik Bhaskar

Apr 12, 2019, 07:47 PM IST

राम नवमी पर पुनर्वसु नक्षत्र में श्रीराम का जन्म हुआ था। श्रीराम के जन्म समय के दौरान ग्रहों की स्थिति बहुत शुभ थी। इस दिन पांच ग्रह - सूर्य, मंगल, बृहस्पति, शुक्र और शनि अपनी उच्च राशि में स्थित थे। इन ग्रहों के शुभ प्रभाव से त्रेता युग में राजा दशरथ के यहां भगवान विष्णु के अवतार यानी मर्यादा पुरुषोत्तम के रुप में ज्ञानी, तेजस्वी और पराक्रमी पुत्र का जन्म हुआ।

 

  • राम जन्म की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम का अवतार त्रेता युग में हुअा था। अयोध्या के राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया और यज्ञ से प्राप्त खीर की। दशरथ ने अपनी प्रिय पत्नी कौशल्या को दे दिया। कौशल्या ने उसमें से आधा हिस्सा कैकेयी को दिया इसके बाद दोनों ने अपने हिस्से से आधा-आधा खीर तीसरी पत्नी सुमित्रा को दे दिया। इस खीर के सेवन से चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र एवं कर्क लग्न में माता कौशल्या की कोख से भगवान श्री राम का जन्म हुअा। इसी तरह कैकेयी से भरत तो सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया।

 

  • राम नवमी ऐसे मनाते हैं 

रामनवमी पर सुबह जल्दी उठकर सूर्य को जल चढ़ाया जाता है। इसके बाद पूरे दिन नियम और संयम के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम का व्रत किया जाता है। इसके साथ ही राम दरबार यानी भगवान श्रीराम के सहित लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान जी की पूजा और आरती की जाती है। राम जन्मोत्सव की खुशी पर ब्राह्मणों और अन्य लोगों को भोजन करवाया जाता है और प्रसाद बांटते हैं। इस दिन रामचरित मानस का पाठ करवाया जाता है। मान्यता है कि राम नवमी के दिन उपवास रखने से सुख समृद्धि आती है और पाप और बुराइयों का नाश होता है। 

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