व्रत / स्कंद षष्ठी आज, संतान प्राप्ति और दुश्मनों पर जीत के लिए की जाती है भगवान कार्तिकेय की पूजा



Todays Skanda Satishi: Lord Kartikeya Is Worshiped To Receive Child And Win Over Enemies
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Todays Skanda Satishi: Lord Kartikeya Is Worshiped To Receive Child And Win Over Enemies

Dainik Bhaskar

Jun 07, 2019, 06:54 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. स्कन्द षष्ठी का व्रत हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाता है। कुछ ग्रंथों के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी को स्कन्द षष्ठी कहा जाता है। यह व्रत संतान षष्ठी नाम से भी जाना जाता है। इस दिन संतान प्राप्ति और दुश्मनों पर जीत के लिए भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है और दिनभर व्रत रखा जाता है। भगवान कार्तिकेय का ही एक नाम स्कंद है। ये व्रत साल के किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को शुरू किया जा सकता है। कुछ लोग आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भी स्कन्द षष्ठी मानते हैं, लेकिन यह व्रत हर माह कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाता है। 

 

  • भगवान स्कंद शक्ति के अधिदेव हैं। ये देवताओं के सेनापति भी कहे जाते हैं। इनकी पूजा दक्षिण भारत मे सबसे ज्यादा होती है। यहाँ पर ये मुरुगन नाम से भी प्रसिद्ध है। भगवान स्कंद हिंदू धर्म के प्रमुख देवों मे से एक हैं। स्कंद को कार्तिकेय और मुरुगन नामों से भी पुकारा जाता है। दक्षिण भारत में पूजे जाने वाले प्रमुख देवताओं में से एक भगवान कार्तिकेय शिव पार्वती के पुत्र हैं। कार्तिकेय भगवान के अधिकतर भक्त तमिल हिन्दू हैं। इनकी पूजा खासतौर से तमिलनाडु और भारत के दक्षिणी राज्यों में होती है। भगवान स्कंद का  सबसे प्रसिद्ध मंदिर तमिलनाडू में ही है।

 

  • पूजा और व्रत के नियम

स्कंद षष्ठी पर भगवान शिव और पार्वती की पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है। इसमें स्कंद देव (कार्तिकेय) की स्थापना और पूजा होती है। अखंड दीपक भी जलाए जाते हैं। भगवान को स्नान करवाया जाता है। भगवान को भोग लगाते हैं। इस दिन विशेष कार्य की सिद्धि के लिए कि गई पूजा-अर्चना फलदायी होती है। इस दिन मांस, शराब, प्याज, लहसुन का त्याग करना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी होता है। पूरे दिन संयम से भी रहना होता है।

 

  • स्कंद षष्ठी व्रत का महत्व

स्कंदपुराण के नारद-नारायण संवाद में संतान प्राप्ति और संतान की पीड़ाओं को दूर करने वाले इस व्रत का विधान बताया गया है। एक दिन पहले से उपवास करके षष्ठी को कुमार यानी कार्तिकेय की पूजा करनी चाहिए। भगवान कार्तिकेय का ये व्रत करने से दुश्मनों पर जीत मिलती है। वहीं हर तरह की परेशानियां भी दूर हो जाती हैं। पुराणों के अनुसार स्कंद षष्ठी की उपासना से च्यवन ऋषि को आँखों की ज्योति प्राप्त हुई। ब्रह्मवैवर्तपुराण में बताया गया है कि स्कंद षष्ठी की कृपा से ही प्रियव्रत का मृत शिशु जीवित हो जाता है। 

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