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नवरात्र चौथा दिन / योग-ध्यान की देवी हैं देवी कूष्मांडा, इनकी पूजा से भय का होता है नाश

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2019, 04:15 PM IST


worship methord of goddess kushmanda
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रिलिजन डेस्क. कूष्मांडा देवी का चौथा स्वरूप है। ग्रंथों के अनुसार इन्हीं देवी की मंद मुस्कार से अंड यानी ब्रह्मांड की रचना हुई थी। इसी कारण इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। ये देवी भय दूर करती हैं। भय यानी डर ही सफलता की राह में सबसे बड़ी मुश्किल होती है। जिसे जीवन में सभी तरह के भय से मुक्त होकर सुख से जीवन बिताना हो, उसे देवी कुष्मांडा की पूजा करनी चाहिए।

पूजन विधि और मंत्र

  1. ऐसा है मां का स्वरुप

    कुष्मांडा देवी की आठ भुजाएं हैं, जिनमें कमंडल, धनुष-बाण, कमल पुष्प, शंख, चक्र, गदा और सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है। मां के पास इन सभी चीजों के अलावा हाथ में अमृत कलश भी है। इनका वाहन सिंह है और इनकी भक्ति से आयु, यश और आरोग्य की वृद्धि होती है।

  2. ऐसे करें पूजा

    माता कुष्मांडा के दिव्य रूप को मालपुए का भोग लगाकर किसी भी दुर्गा मंदिर में ब्राह्मणों को इसका प्रसाद देना चाहिए। इससे माता की कृपा स्वरूप उनके भक्तों को ज्ञान की प्राप्ति होती है, बुद्धि और कौशल का विकास होता है।

    • देवी को लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चूड़ी भी अर्पित करना चाहिए। देवी योग-ध्यान की देवी भी हैं। देवी का यह स्वरूप अन्नपूर्णा का भी है। उदराग्नि को शांत करती हैं। पूजन के बाद देवी के मंत्र का जाप करें।

  3. मां कूष्मांडा का मंत्र 

    या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


    अर्थ - हे मां! सर्वत्र विराजमान और कूष्मांडा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं। हे मां, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

  4. कुष्मांडा देवी की आरती

    कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
    मुझ पर दया करो महारानी॥

    पिगंला ज्वालामुखी निराली।
    शाकंबरी माँ भोली भाली॥

    लाखों नाम निराले तेरे ।
    भक्त कई मतवाले तेरे॥

    भीमा पर्वत पर है डेरा।
    स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

    सबकी सुनती हो जगदंबे।
    सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥

    तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
    पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

    माँ के मन में ममता भारी।
    क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

    तेरे दर पर किया है डेरा।
    दूर करो माँ संकट मेरा॥

    मेरे कारज पूरे कर दो।
    मेरे तुम भंडारे भर दो॥

    तेरा दास तुझे ही ध्याए।
    भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

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