समाज में मान-सम्मान पाने के लिए घर में रखें सूर्य देव की लकड़ी की मूर्ति, तांबे की मूर्ति लाती है सकारात्मकता

सूर्य पंचदेवों में से एक माना गया है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत में इनकी पूजा करनी जरूरी हाेता है।

Dainikbhaskar.com| Last Modified - Aug 11, 2018, 01:25 PM IST

धर्म डेस्क. सूर्य पंचदेवों में से एक माना गया है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत में इनकी पूजा करनी जरूरी है। ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है। इस कारण कुंडली में इस ग्रह की शुभ-अशुभ स्थिति से हमारा पूरा जीवन बदल सकता है। सूर्य देव की कृपा पाने के लिए रोज सुबह सूर्यास्त से पहले उठ जाना चाहिए। नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार भविष्य पुराण के ब्राह्म पर्व में सूर्य देव की मूर्तियों के बारे में बताया गया है। घर में पूर्व दिशा की दीवार पर सूर्य की मूर्ति लगानी चाहिए। यहां जानिए किस मनोकामना के लिए घर में सूर्य की कौन सी प्रतिमा रखनी चाहिए...
लकड़ी की मूर्ति
सूर्य देव की लकड़ी से बनी मूर्ति घर रखने और रोज उसकी पूजा करने से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। भाग्य का साथ मिलता है।
पत्थर या मिट्टी से बनी मूर्ति
अगर आपके कार्यों में बार-बार बाधाएं आ रही हैं तो घर में पत्थर या मिट्टी से बनी सूर्य प्रतिमा रख सकते हैं। इसकी पूजा करने से सफलता मिलती है।
तांबे से बनी मूर्ति
घर में सकारात्मकता बनाए रखने के लिए तांबे से बनी मूर्ति घर में रखनी चाहिए। इसके शुभ असर से सभी परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है।
चांदी से बनी मूर्ति
कार्य क्षेत्र में वर्चस्व बनाए रखने के लिए घर में चांदी से बनी सूर्य प्रतिमा रख सकते हैं।
सोने से बनी मूर्ति
सोने से बनी सूर्य प्रतिमा घर में रखने और उसकी पूजा करने से घर में धन-धान्य बढ़ता है, सुख-समृद्धि बनी रहती है।
सूर्य को माना जाता है ग्रहों का राजा
- ज्योतिष के अनुासार 12 ग्रह होते हैं और सूर्य को इनका राजा माना जाता है। ऐसे में माना जाता है कि सूर्य देव की साधना करने से बाकि ग्रह भी आपको परेशानी नहीं पहुंचाते।  
- वेदों में सूर्य को संसार की आत्मा माना गया है। ऋग्वेद के देवताओं कें सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है। यजुर्वेद के अनुसार सूर्य को भगवान का नेत्र माना जाता है। 
- छान्दोग्यपनिषद के अनुसार सूर्य की ध्यान साधना करने से पुत्र की प्राप्ति होती है। ब्रह्मवैर्वत पुराण तो सूर्य को परमात्मा स्वरूप मानता है।
राम भगवान भी करते थे सूर्य पूजा
- भगवान राम हर दिन सूर्य पूजा करते थे वहीं महाभारत में कर्ण भी हर रोज सूर्य की पूजा करते थे और सूर्य को अर्घ्य देते थे। 
- ऐसा माना गया है कि इससे व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलता है और भाग्योदय में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं।

 

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