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शिवपुराण / सप्ताह के सातों दिन अलग-अलग उपाय करने से दूर हो सकती हैं सभी समस्याएं



remedies for grah dosh Redress according to shiv puran
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remedies for grah dosh Redress according to shiv puran

Dainik Bhaskar

Sep 22, 2018, 11:54 AM IST

रिलिजन डेस्क. जिन लोगों की कुंडली में ग्रहों से संबंधित दोष होते हैं, उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रहों के दोष दूर करने के लिए शिवपुराण में भी कई उपाय बताए गए हैं। इस ग्रंथ के अनुसार सप्ताह के सातों दिनों के ग्रह स्वामी अलग-अलग हैं और उन्हें प्रसन्न करने के उपाय भी अलग हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक जानिए सप्ताह के सातों दिनों के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं...

ये हैं वे उपाय

  1. रविवार

    रविवार के अधिपति देव सूर्य अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करते हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए रोज सूर्य को जल चढ़ाएं। ये उपाय रविवार से शुरू करें। किसी गरीब को गुड़ का दान करें।

  2. सोमवार

    ये चंद्र का दिन है और चंद्रदेव संपत्ति के दाता हैं। इस दिन किसी गरीब को उसकी पत्नी सहित भोजन कराएं। भोजन में शुद्ध घी से बना पकवान अवश्य रखें। शिवजी को खीर का भोग लगाएं।

  3. मंगलवार

    मंगल ग्रह इस वार के अधिपति हैं और वे बीमारियों को दूर करते हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए मंगलवार को महाकाली की पूजा करें। साथ ही, किसी गरीब को भोजन कराएं। भोजन में उड़द, मूंग या तुवर की दाल जरूर रखें।

  4. बुधवार

    इस वार का कारक ग्रह बुध है, ये ग्रह बुद्धि का स्वामी है। बुधवार को भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं और दूध से बने पकवान का भोग लगाएं। विष्णु भगवान की पूजा से भी बुध प्रसन्न होते हैं।

  5. गुरुवार

    गुरुवार के स्वामी हैं बृहस्पति देव और वे आयु बढ़ाते हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए गुरुवार को वस्त्र, यज्ञोपवीत और खीर से अपने इष्टदेव और शिवजी की पूजा करें।

  6. शुक्रवार

    सुख-सुविधा की चीजों का कारक ग्रह शुक्र है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को किसी गरीब महिला को सुहाग का सामान और अन्न दान करें।

  7. शनिवार

    शनिवार का कारक ग्रह शनि है। शनिदेव मृत्यु भय दूर करते हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए शनिवार को शिवलिंग पर तिल चढ़ाएं। किसी गरीब को तिल से बना भोजन कराएं। तेल का दान करें।

शिवपुराण

    • वेदव्यास द्वारा रचित शिवपुराण में भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों और ज्योतिर्लिंगों के महत्व का वर्णन किया गया है।
    • इसमें इन्हें पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर माना गया है। 
    • इसमें शिव-महिमा, लीला-कथाओं,पूजा-पद्धति के अलावा कई समस्याओं के निवारण के उपाय बताए गए हैं।

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