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पितृपक्ष / अगर आपको याद नहीं है पितरों के श्राद्ध का दिन तो सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर करें उनका श्राद्ध



sarvpitra moksh amavasya on 8 October
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sarvpitra moksh amavasya on 8 October

Dainik Bhaskar

Oct 06, 2018, 11:22 AM IST

रिलिजन डेस्क. कई बार आपको अपने पितरों के श्राद्ध का दिन पता नहीं होता या हमको याद भी नहीं रहता। तिथियों पर श्राद्ध तो उन्हीं का ही किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि हमको याद हो। ऐसे में श्राद्ध को लेकर यह भ्रांति रहती है कि हम अपने पितरों का श्राद्ध कब करें। इसके लिए हमारे पुराणों में सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या का दिन निश्चित किया गया है, जो इस बार 8 अक्टूबर को है। 
 

इस तरह घर पर ही कर सकते हैं श्राद्ध और तर्पण

  1. श्राद्ध तिथि पर सूर्योदय से दिन के 12 बजकर 24 मिनट की अवधि के बीच ही श्राद्ध करें।

     

    • इसके लिए सुबह उठकर नहाएं, उसके बाद पूरे घर की सफाई करें। घर में गंगाजल और गौमूत्र भी छीड़कें।
    • दक्षिण दिशा में मुंह रखकर बांए पैर को मोड़कर, बांए घुटने को जमीन पर टीका कर बैठ जाएं। इसके बाद तांबे के चौड़े बर्तन में काले तिल, गाय का कच्चा दूध, गंगाजल और पानी डालें। उस जल को दोनों हाथों में भरकर सीधे हाथ के अंगूठे से उसी बर्तन में गिराएं। इस तरह 11 बार करते हुए पितरों का ध्यान करें।
    • घर के आंगन में रंगोली बनाएं। महिलाएं शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन बनाएं। श्राद्ध के अधिकारी व्यक्ति यानी श्रेष्ठ ब्राह्मण को न्यौता देकर बुलाएं। ब्राह्मण को भोजन करवाएं और निमंत्रित ब्राह्मण के पैर धोने चाहिए। ऐसा करते समय पत्नी को दाहिनी तरफ होना चाहिए।
    • पितरों के निमित्त अग्नि में गाय के दूध से बनी खीर अर्पण करें। ब्राह्मण भोजन से पहले पंचबलि यानी गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।
    • दक्षिणाभिमुख (दक्षिण दिशा में मुंह रखकर) होकर कुश, जौ, तिल, चावल और जल लेकर संकल्प करें और एक या तीन ब्राह्मण को भोजन कराएं। इसके बाद भोजन थाली अथवा पत्ते पर ब्राह्मण हेतु भोजन परोसें।
    • प्रसन्न होकर भोजन परोसें। भोजन के उपरांत यथाशक्ति दक्षिणा और अन्य सामग्री दान करें। इसमें गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी तथा नमक (जिसे महादान कहा गया है) का दान करें। इसके बाद निमंत्रित ब्राह्मण की चार बार प्रदक्षिणा कर आशीर्वाद लें। ब्राह्मण को चाहिए कि स्वस्तिवाचन तथा वैदिक पाठ करें तथा गृहस्थ एवं पितर के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त करें।
    • श्राद्ध में सफेद फूलों का ही उपयोग करें। श्राद्ध करने के लिए दूध, गंगाजल, शहद, सफेद कपड़े, अभिजित मुहूर्त और तिल मुख्य रूप से जरूरी है।

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