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गणेश चतुर्थी / 13 सितंबर को होगी गणेश स्थापना, पुराणों में वर्णित स्वरुप के अनुसार होनी चाहिए प्रतिमा



some Essential things  for murti sthapana on ganesh chaurth
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some Essential things  for murti sthapana on ganesh chaurth

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 09:59 AM IST

रिलिजन डेस्क. इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 13 सितंबर से शुरू हो रहा है जो कि 23 सितंबर तक चलेगा। कई बार अनजाने में गलत जगह या वास्तु के अनुसार गलत दिशा में गणेशजी की मूर्ति स्थापित हो जाती है। इसके कारण पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता। गणेश जी की ऐसी मूर्ति घर लानी चाहिए जो शास्त्रों के अनुसार सही हो। यानी पुराणों और ग्रंथों में जैसा गणेशजी का स्वरूप बताया गया है उनकी मूर्ति भी वैसी ही होनी चाहिए। गणेशजी की मूर्ति जनेऊ, रंग, सूंड, वाहन, अस्त्र-शस्त्र, हाथों की संख्या और आकृति जैसी कुछ खास बातों को ध्यान में रखकर खरीदनी चाहिए। 

शास्त्रों के अनुसार हो गणेशजी की मूर्ति 

  1. मूर्ति स्थापना में इनका रखें ध्यान 

    • गणेश जी को विराजमान करने के लिए ब्रह्म स्थान, पूर्व दिशा और उत्तर पूर्व कोण शुभ माना गया है लेकिन भूलकर भी इन्हें दक्षिण और दक्षिण पश्चिम कोण यानी नैऋत्य में नहीं रखें, इससे हानि होती है। 
    • घर या ऑफिस में एक ही जगह पर गणेश जी की दो मूर्ति एक साथ नहीं रखें। वास्तु विज्ञान के अनुसार इससे उर्जा का आपस में टकराव होता है जो कि अशुभ फल का कराण बनता है। 
    • गणेश जी की स्थापना के समय ये ध्यान रखें कि मूर्ति का मुख दरवाजे की तरफ नहीं होना चाहिए। ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि गणेश जी के मुख की तरफ समृद्धि, सिद्धि, सुख और सौभाग्य होता है।

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