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गाय, गुरु और अग्नि सहित इन 8 की ओर पैर करके बैठने से नहीं मिल पाता भाग्य का साथ

Danik Bhaskar | Aug 01, 2018, 01:12 PM IST

धर्म डेस्क. हिंदू धर्म में आचरण, संस़कार और शिष्टाचार का बहुत महत्व है हमारे पुराणों में भी इससे संबंधित कई बातें बताई गई हैं। हमारे 18 पुराणों में से एक कूर्म पुराण में भी इससे संबंधित महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। इसके एक श्लोक के अनुसार गाय, गुरु और अग्नि सहित इन 8 की ओर पैर करके (फैलाकर) बैठना या सोना नहीं चाहिए। ऐसा करने से भाग्य का साथ नहीं मिलता।


श्लोक

नाभिप्रसारयेद् देवं ब्राह्मणान् गामथापि वा।
वाय्वग्निगुरुविप्रान् वा सूर्यं वा शशिनं प्रति।।


अर्थ - देवता, ब्राह्मण, गाय, अग्नि, गुरु, विप्र, सूर्य व चंद्रमा की ओर पैर नहीं करना चाहिए।


देवता - देवताओं को पूजा जाता है इसीलिए जान-बूझकर मंदिर की दिशा की ओर या देवताओं की तस्वीर या मूर्ति की ओर पैर नहीं करना चाहिए, इससे इनका अपमान होता है।


ब्राह्मण - ऋग्वेद के अनुसार ब्राह्मणों की उत्पत्ति भगवान विष्णु के मुख से हुई है। इसलिए इनकी ओर भी पैर नहीं करना चाहिए।


गाय - गाय में सभी देवताओं का वास माना गया है। इसलिए गाय की ओर भी पैर नहीं करना चाहिए।


अग्नि - अग्नि को देवताओं का मुख कहा गया है, इसलिए उस ओर पैर नहीं फैलाने से देवता नाराज हो सकते हैं।


गुरु - गुरु को भगवान समान माना गया है इसलिए जहां गुरु बैठे हों, उस ओर पैर करके नहीं बैठना चाहिए।


विप्र - वेदों की पढ़ाई करने वाले ब्राह्मण बालक को विप्र कहते हैं। और वेदों के ज्ञाता का अपमान करने से पाप लगता है। 


सूर्य - सूर्य एक मात्र ऐसे देवता हैं जो साक्षात दर्शन देते हैं इसलिए सूर्य की ओर पैर नहीं करना चाहिए।


चंद्रमा - चंद्रमा को प्रत्यक्ष देवता भी कहा जाता है। इसलिए चंद्रमा की ओर भी पैर करना चाहिए।


कूर्म पुराण


- पुराणों की संख्या 18 बताई गई है इन्ही में से एक है कूर्म पुराण।


- इसमें विष्णु भगवान के कूर्म-अवतार का वर्णन किया गया है। इसमें चार संहिताएँ हैं ब्राह्मी, भागवती, सौरा और वैष्णवी हैं।


- सबसे पहले भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण करके इस पुराण को राजा इन्द्रद्युम्न को सुनाया था।

 

 

 

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