कॉमनवेल्थ गेम्स : 8 साल बाद भी दिल्ली के मुकाबले आधी लागत में हो जाएंगे गोल्ड कोस्ट गेम्स

कॉमनवेल्थ गेम्स का नाम अब तक तीन बार बदला गया। पहला कॉमनवेल्थ गेम्स 1930 में हुआ था।

DainikBhaskar.com| Last Modified - Apr 05, 2018, 07:20 AM IST

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Common Wealth Games 2018, Gold Coast, CWG, कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 का आगाज आज, 88 साल में 1000 गुना बढ़ा बजट

  • गोल्ड कोस्ट में बुधवार को भारतीय समयानुसार शाम 6:09 बजे प्रिंस चार्ल्स ने की कॉमनवेल्थ गेम्स के शुरू होने की घोषणा।
  • इन खेलों में 71 देश भाग ले रहे हैं। भारतीय दल में 271 एथलीट शामिल हैं।

 

गोल्ड कोस्ट.  ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में बुधवार से कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू हो गए। कनाडा में 1930 में शुरू हुए कॉमनवेल्थ गेम्स का बजट 88 साल में दस हजार गुना बढ़ गया। पहले गेम्स में जहां सिर्फ 64 लाख रुपए खर्च हुए थे, वहीं 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स (12470 लाख ऑस्ट्रेलियन डॉलर) में करीब 6437 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स अब तक के सबसे महंगे थे। आठ साल बाद हो रहे गोल्ड कोस्ट गेम्स की लागत दिल्ली के मुकाबले 55% है।

 

 

 

 

 

सबसे ज्यादा खर्च दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में हुआ

सन स्थान देश इवेंट एथलीट खर्च (रुपए में)
1930 हैमिल्टन (कनाडा) 11 59 400 64 लाख
2010 दिल्ली (भारत) 71 272 4,352 11,687.75 करोड़
2014 ग्लासगो (स्कॉटलैंड) 71 261 4,947 4,968 करोड़
2018 गोल्ड कोस्ट (ऑस्ट्रेलिया) 71 275 4,423 6,437 करोड़ (बजट)

 

क्यों अधिक रही दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स की लागत
- गोल्ड कोस्ट में स्टेडियमों और गेम्स विलेज के निर्माण पर 2,839 करोड़ रुपये का खर्च आया है। वहीं दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए स्टेडियम बनाने पर 4,459.48 करोड़ रुपये का खर्च हुए थे, यानी इस बार के मुकाबले करीब 40 फीसदी अधिक। जबकि इसमें गेम्स विलेज के निर्माण पर आई लागत शामिल नहीं है।
- ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ गेम्स पांचवीं बार हो रहे हैं। ऐसे में वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बहुत अधिक खर्चा नहीं आया। भारत में पहली बार इतने बड़े खेल का आयोजन हुआ था, इसलिए नए सिरे से इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया। इस कारण भी बजट बढ़ा। 
- इसके अलावा इन खेलों की तैयारियों के दौरान भ्रष्टाचार और घोटाले हुए। कई टेंडर ज्यादा कीमत पर निकाले गए। जैसे टाइम इक्विपमेंट के लिए स्विस कंपनी को 141 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया। आरोप है कि यह बहुत ज्यादा कीमत थी। इससे 90 करोड़ रुपये राजस्व की हानि हुई।

 

     
गोल्ड कोस्ट में 12 स्टेडियम, 1100 घंटे लाइव प्रसारण

- गोल्ड कोस्ट में पैरा गेम्स समेत 19 खेल होंगे। ये 12 स्टेडियमों में खेले जाएंगे। ट्रैक साइक्लिंग और शूटिंग इवेंट्स ब्रिसबेन तथा बास्केटबाॅल के मुकाबले केयर्न्स और ट्राउंसविले में खेले जाएंगे। 
- खेलों के प्रसारण के लिए 350 कैमरे लगाए गए हैं। कुल 1,100 घंटे का लाइव प्रसारण किया जाएगा। 
- स्टेडियम और गेम्स विलेज बनाने पर 2,839 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।  
- गेम्स विलेज 29 हेक्टेयर में बना है। इसमें 18 नई बिल्डिंग बनाई गई हैं, जिनमें 1,170 अपार्टमेंट और 82 टाउनहाउस हैं।
- गेम्स विलेज में डोपिंग टेस्ट के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। यहां एक डोपिंग कंट्रोल स्टेशन है। इसमें खिलाड़ियों के डोप नमूनों को सात साल तक रखा जा सकता है।

 

रोजाना 18 हजार डिश बनेंगी 
- 12 दिन चलने वाले इन गेम्स में खिलाड़ियों की सेहत का खास ध्यान रखा जाएगा। ऐसा बताया जा रहा है कि इस दौरान खिलाड़ियों के लिए करीब  8,00,000 फलों का इंतजाम किया गया है।  

- एथलीटों और सपोर्टिंग स्टाफ के लिए रोजाना 18,000 व्यंजन परोसे जाएंगे। गेम्स के दौरान खिलाड़ियों को 1,21,000 केले बांटे जाएंगे। 
- गेम्स विलेज में हरियाली के लिए 136,420 पौधे लगाए गए। 

 

चार बार में मिला कॉमनवेल्थ गेम्स नाम
- कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम कई बार बदले गए। 1930 से 1950 तक इन्हें ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के नाम से जाना जाता था।इसके बाद 1954 से 1966 तक इसका नाम ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स रहा।

- 1970 से 1974 तक इनका नाम ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स रखा गया।

- 1978 में कनाडा के एडमॉन्टन में जब इनका आयोजन हुआ तो इसे कॉमनवेल्थ गेम्स नाम देने पर सहमति बनी। तब से अब तक इसका नाम कॉमनवेल्थ गेम्स है। 

 

हर बार पहला इवेंट होता है क्वींस बैटन रिले
- कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत क्वींस बैटन रिले से होती है। इन खेलों की मेजबानी करने वाले सबसे छोटे देश वेल्स ने 1958 में कॉमनवेल्थ देशों को क्वींस बैटन रिले की सौगात दी। बैटन रिले की यात्रा लंदन के बकिंघम पैलेस से शुरू होती है। क्वीन एलिजाबेथ बैटन को पहले रिले धावक को सौंपती हैं। इसमें उनका संदेश भी होता है।

- कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह में आखिरी धावक बैटन को क्वीन या उसके प्रतिनिधि को सौंपता है। वह प्रतिनिधि क्वीन के संदेश को पढ़कर गेम्स की आधिकारिक शुरुआत करता है।

- 1994 तक बैटन रिले का आयोजन इंग्लैंड और मेजबान देश में ही होता था, लेकिन मलेशिया के कुआलालंपुर में 1998 कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले पहली बार बैटन ने अन्य कॉमनवेल्थ देशों का भी दौरा किया। तब से यही परंपरा चालू है। 


2010 में भारत ने जीते सबसे ज्यादा मेडल 
- कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने पहली बार 1934 में भाग लिया। राशिद अनवर ने रेसलिंग (वेल्टरवेट, 74 किग्रा) में ब्रॉन्ज जीता। भारत ने 1950, 1962, 1986 में भाग नहीं लिया।
- स्वतंत्र भारत के रूप में 1954 में पहली बार भाग लिया। कोई मेडल नहीं मिला।
- कार्डिफ कॉमनवेल्थ गेम्स- 1958 में स्वतंत्र भारत के रूप में कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार मेडल (दो गोल्ड, 1 सिल्वर) जीते। रेसलिंग में लीला राम सांगवान और एथलेटिक में मिल्खा सिंह ने गोल्ड जीता था। 

लक्ष्मीकांत पांडेय ने सिल्वर जीता। टैली में आठवें स्थान पर रहा।

- दो बार 1938 (सिडनी) और 1954 (वैंकूवर) में कोई पदक नहीं जीत सका।
- 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का अब तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। 38 गोल्ड समेत 101 पदक जीते।

 

80 साल बाद भारत ने की मेजबानी

- कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत के 80 साल बाद 2010 में पहली बार भारत ने मेजबानी की। 

- यह दूसरा मौका था, जब एशिया में कॉमनवेल्थ गेम्स हुए। इन खेलों के लिए डॉ. करनी सिंह शूटिंग रेंज, सिरी फोर्ट स्पोर्ट्स काॅम्प्लेक्स, त्यागराज स्पोर्ट्स काॅम्प्लेक्स, यमुना स्पोर्ट्स काॅम्प्लेक्स और दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टेडियम बनाए गए, जबकि अन्य रेनोवेट किए गए।

- दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स की दुनियाभर में तारीफ हुई। हालांकि, भारत में ये बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी में तब्दील हुए क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोप लगे।

 

इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स 
- 20 कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया मेडल टैली में 12 बार शीर्ष पर रहा। इंग्लैंड को सात और कनाडा को एक बार यह गौरव हासिल हुआ।
- 1966 से 2014 तक के कॉमनवेल्थ गेम्स में 2010 को छोड़कर मेडल टैली में पहले तीन स्थानों पर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा ही रहे हैं।
- 2010 में मेडल टैली में भारत, ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे नंबर पर था। यह उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 
- 1994 और 2010 को छोड़कर अन्य सभी कॉमनवेल्थ गेम्स में इंग्लैंड मेडल टैली में हर बार शीर्ष दो में रहा है। 2010 में इंग्लैंड तीसरे नंबर पर था।
- 1978 में एडमोंटन में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार मस्कट बना।
- 1998 में मलेशिया के कुआलालंपुर में कॉमनवेल्थ गेम्स हुए। इस खेल का एशिया में यह पहला आयोजन था।
- 1998 कॉमनवेल्थ गेम्स में मेंस क्रिकेट और वूमेंस हॉकी, नेटबॉल, रग्बी सेवन्स की भी स्पर्धाएं हुईं। 
- 1998 में क्वीन्स बैटन को स्टेडियम तक एक हाथी लेकर आया।
- केवल छह देश ही ऐसे हैं, जिन्होंने हर कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया है। ये ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स हैं।
- 2002 मैनचेस्टर, इंग्लैंड कॉमनवेल्थ गेम्स में अब तक सर्वाधिक 72 देशों ने भाग लिया है। 
- 2022 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में 22वें कॉमनवेल्थ गेम्स होने हैं। इन खेलों के लिए लगी बोली में सिर्फ उसी ने हिस्सा लिया था। 

Common Wealth Games 2018, Gold Coast, CWG, कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 का आगाज आज, 88 साल में 1000 गुना बढ़ा बजट
गोल्ड कोस्ट में पैरा गेम्स समेत 19 खेलों की स्पर्धाएं होंगी। ये खेल 12 स्टेडियमों में खेले जाएंगे।
Common Wealth Games 2018, Gold Coast, CWG, कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 का आगाज आज, 88 साल में 1000 गुना बढ़ा बजट
इस बार खेल गांव में खिलाड़ियों के लिए हर दिन 18 हजार डिश बनेंगी।
Common Wealth Games 2018, Gold Coast, CWG, कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 का आगाज आज, 88 साल में 1000 गुना बढ़ा बजट
1930 में हुए पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में करीब 64 लाख रुपए खर्च हुए थे। (फाइल)
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