खिलाड़ियों की कमाई पर सरकार का डाका, देश के 7 बड़े प्लेयर्स ने जताया विरोध

हरियाणा सरकार ने खिलाड़ियों से कमाई का एक तिहाई मांगा, विवाद होने पर आदेश स्थगित किया

dainikbhaskar.com| Last Modified - Jun 08, 2018, 10:11 PM IST

Controversy : Haryana Govt notification asks players to deposit one-third of income
खिलाड़ियों की कमाई पर सरकार का डाका, देश के 7 बड़े प्लेयर्स ने जताया विरोध

नेशनल डेस्क। हरियाणा सरकार के एक नोटिफिकेशन से खेल जगत में बवाल मचा हुआ है। इस नोटिफिकेशन के अनुसार अगर सरकारी नौकरी करने वाला कोई खिलाड़ी किसी प्रोफेशनल स्पोर्ट इवेंट या कमर्शियल एंडोर्समेंट से कोई कमाई करता है, तो उसे उसका एक तिहाई हिस्सा हरियाणा स्टेट स्पोर्ट्स काउंसिल को देना होगा। विवाद बढ़ने पर सरकार ने नोटिफिकेशन को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया। 

 

इस संबंध में DainikBhaskar.com ने पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग, हॉकी के पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै, ओलंपिक में सिल्वर मेडलिस्ट रेसलर सुशील कुमार, ओलंपियन बॉक्सर सुमित सांगवान, प्रो कबड्डी के सबसे महंगे खिलाड़ी मोनू गोयत, कबड्डी वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया के प्लेयर दीपक हुड्डा और पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेटर जेपी यादव से बात की। कुछ ने खुलकर तो कुछ ने दबी जुबान में हरियाणा सरकार के इस नोटिफिकेशन की आलोचना की। 

 

सुशील कुमार ( रेसलर, ओलंपियन) : मैं तो पहली बार ऐसी पॉलिसी सुन रहा हूं। सरकारें तो खिलाड़ियों को बढ़ावा देने की योजनाएं लागू करती हैं। जहां तक सरकार द्वारा नौकरी देने की बात है तो वह कोई एहसान तो कर नहीं रही। खिलाड़ी की योग्यता के कारण ही सरकार ने उसे नौकरी दी है। ऐसी पॉलिसी से तो खिलाड़ी का मॉरल ही डाउन होगा। 

 

धनराज पिल्लै (हॉकी के पूर्व कप्तान ) : खिलाड़ी देश के लिए खेलता है। अपना खून-पसीना एक कर देता है। ऐसे में अगर उसे अपने खेल की वजह से कहीं कमाई होती है, तो उसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। फिर खिलाड़ी का खेल जीवन ही अधिकतम 10 से 15 साल होता है। इतने ही साल में उसे कुछ अर्न करने का मौका होता है। तो ऐसे में हरियाणा सरकार का यह निर्णय खिलाड़ियों के हित में नहीं है। 

 

सुमित सांगवान (ओलंपियन बॉक्सर ) : कुछ हासिल करने से पहले खिलाड़ी अपने दम पर मेहनत करता है। तब सरकार कहीं नहीं होती। लेकिन जब वह मेडल हासिल कर लेता है, कुछ पा लेता है तो उससे देश और राज्य की भी वाहवाही होती है। तब सरकार भी उसे जॉब दे देती है। जॉब पर लगने के बाद अब खिलाड़ी अपनी स्किल के बल पर कुछ अर्न करना चाहता है तो फिर इसमें सरकार कटौती क्यों करना चाहती? या तो वह हर खिलाड़ी को शुरू से मदद करें या फिर इस तरह की पॉलिसी लागू नहीं करें। 

 

वीरेंद्र सहवाग (पूर्व क्रिकेटर) : सहवाग से इस मामले में बात की गई तो उन्होंने हालांकि कुछ भी खुलकर बताने से इनकार कर दिया, लेकिन bhaskar.com द्वारा यह पूछे जाने पर कि अगर कोई खिलाड़ी इतनी मेहनत से पैसे कमाता है और फिर टैक्स तो देता ही है। तो इसके बाद भी उससे एक तिहाई राशि लेना क्या अन्याय नहीं है? इस पर सहवाग ने कहा कि हां, वह तो है। सहवाग ने यह भी कहा कि उन्होंने भी ONGC इसीलिए छोड़ी थी कि वहां भी कुछ ऐसा ही था।   


मोनू गोयत ( प्रो कबड्डी सीजन 6 के सबसे महंगे खिलाड़ी) : स्पोर्ट्स पर्सन अगर कमाता है तो उसे अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए काफी खर्च भी करना पड़ता है। फिर कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाता है। ऐसे में अगर सरकार एक तिहाई भी ले लेगी तो फिर खिलाड़ी के पास क्या बचेगा?

 

दीपक हुड्डा (कबड्डी वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया के प्लेयर) : सरकार खिलाड़ियों की कोई मदद नहीं करती। ऊपर से इस तरह के नियम बनाकर खिलाड़ी जो थोड़ा बहुत कमाता है, उस पर भी डाका डाल रही है। 2016 में इंडिया ने वर्ल्ड कप जीता था। उस समय सरकार ने प्रत्येक खिलाड़ी को 25-25 लाख रुपए देने का वादा किया था, लेकिन आज तक वही पैसा नहीं मिल पाया है। 

 

जेपी यादव (पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेटर) : इसको लेकर उनकी पर्सनल सोच यही है कि यह पॉलिसी खेल और खिलाड़ी के हित में नहीं है। सरकार ने अगर जॉब दी है तो वह उसकी उपलब्धियों की वजह से ही दी है। वैसे भी खिलाड़ी का खेल करियर बहुत सीमित होता है। 30-35 साल की उम्र के बाद तो उसे नौकरी ही करनी है। तो वह अपनी स्किल से जो अर्न कर रहा है, उसे मौका मिलना ही चाहिए।

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