वर्ल्ड कपः 32 टीमों में से 20 के मैनेजर स्वदेशी, क्योंकि विदेशी मैनेजर किसी टीम को चैम्पियन नहीं बना सके

जर्मनी के जोआकिम लोव सबसे महंगे कोच हैं। सबसे कम सैलरी 2.7 करोड़ रुपए कोस्टारिका के कोच ऑस्कर रेमिरेज की है।

DainikBhaskar.com| Last Modified - Jun 07, 2018, 11:11 AM IST

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Fifa World Cup: Manager of 20 teams is indigenous, because foreign manager could not make any team champion
जोआकिम लोव जर्मनी के लिए 150 से अधिक मैच में प्लानिंग और स्ट्रेटजी बना चुके हैं। - फाइल

 

  • इस वर्ल्ड कप के उम्रदराज मैनेजर उरुग्वे के ऑस्कर तबरेज 71 साल के हैं
  • सेनेगल के 42 साल के एलियू सीजे इस बार सबसे कम उम्र के मैनेजर हैं

 

 

 

 

खेल डेस्क. फुटबॉल वर्ल्ड कप का थ्रिल एक हफ्ते में शुरू होने वाला है। सभी अपने फेवरेट खिलाड़ियों को देखने के लिए तैयार हैं। हालांकि बिहाइंड द सीन एक व्यक्ति है, जो सभी खिलाड़ियों को एक-साथ लाकर टीम बनाता है। वह है मैनेजर या कोच। मैनेजर ही मास्टर ऑफ द गेम होता है। टीम चुनने से लेकर उसके फॉर्मेशन और स्ट्रेटजी सब कुछ उसके ही हाथ में है। वह मैच के दौरान डगआउट से टीम को निर्देश देता है, प्लानिंग-स्ट्रेटजी बनाता है। सब्स्टिट्यूट भेजता है। टीम में कितने भी टैलेंटेड खिलाड़ी हों, लेकिन हर सफल टीम को एक अच्छे मैनेजर की जरूरत होती है। इसलिए हार या जीत की जिम्मेदारी भी खिलाड़ी से अधिक मैनेजर की मानी जाती है।

 

 

 

टीम के कल्चर को नहीं समझ पाता विदेशी कोच: स्टडी 
- आज तक एक भी विदेशी मैनेजर की टीम वर्ल्ड चैम्पियन नहीं बनी है। शायद यही वजह है कि फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाली अधिकतर टीमों के कोच देसी होते हैं। इस बार भी 32 में से 20 टीम के कोच देसी हैं। 
- एक रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी कोच के वर्ल्ड कप जैसे बड़े इवेंट में नाकाम रहने की मुख्य वजह कल्चर है। वह नई वर्किंग स्टाइल, स्ट्रेटजी, फॉर्मेशन के साथ टीम से जुड़ता है। खिलाड़ी से तेजी से अपने प्लान के मुताबिक ढलने की उम्मीद करता है, लेकिन दोनों देशों के कल्चर के अलग होने के कारण पूरी तरह तालमेल नहीं बैठ पाता है। यही अंतर टीम के प्रदर्शन पर भारी पड़ जाता है।

 

वर्ल्ड कप में दिखेंगे अर्जेंटीना के 5 मैनेजर

- इस बार वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना के 5 मैनेजर दिखेंगे। जॉर्ज सम्पोली अपने ही देश के कोच हैं। पेरू, कोलंबिया, मिस्र और सऊदी अरब के मैनेजर भी अर्जेंटीना के ही हैं। 
- विटोरिया पोज्जो इकलौते मैनेजर हैं, जो लगातार दो फीफा वर्ल्ड कप जीत सके हैं। इटली के इस कोच ने टीम को 1934 और 1938 में चैम्पियन बनाया था। हालांकि इटली इस बार क्वालीफाई नहीं कर सका है। 
- मौजूदा वर्ल्ड कप में भाग लेने वाली टीमों के मैनेजरों की बात करें तो उम्रदराज और सबसे युवा मैनेजर के बीच 29 साल का अंतर है। उरुग्वे के ऑस्कर तबरेज 71 साल के हैं। वे इस वर्ल्ड कप के सबसे उम्रदराज मैनेजर हैं। सेनेगल के एलियू सीजे (42 साल) सबसे कम उम्र के हैं। 

 

इस बार वर्ल्ड कप में  मुख्य रूप से 5 फॉर्मेशन दिखेंगे
- वर्ल्ड कप में इस बार मुख्य रूप से 5 फॉर्मेशन दिखाई देंगे। ये फॉर्मेशन 4-3-3, 4-2-3-1, 4-5-1, 3-5-2, 4-4-2 हैं। 
- सबसे पॉपुलर 4-2- 3-1 फॉर्मेशन है। जर्मनी, पुर्तगाल, अर्जेंटीना, मिस्र इसी फॉर्मेशन से खेलते हैं। जर्मनी ने इसी काउंटर अटैक की स्ट्रेटजी से पिछला वर्ल्ड कप जीता था। इसमें 1 फॉरवर्ड, 3 अटैकिंग मिडफील्डर, 2 डिफेंसिव मिडफील्डर, 1-1 लेफ्ट व साइड बैक और 2 सेंटर बैक होते हैं। इसी फॉर्मेशन के दम पर जर्मनी 5 बार चैम्पियन बना है।

 

सबसे महंगे टॉप-5 मैनेजर

कोच  टीम सैलरी (रुपए में)
जोआकिम लोव जर्मनी 30 करोड़
एडेनोर लियोनार्डो बाच्ची ब्राजील 27 करोड़
डिडियर डेसचेंप्स फ्रांस 27 करोड़
जूलेन लोपेतेगुई स्पेन 23 करोड़
स्टानिस्लाव चेरचेसोव रूस 20 करोड़

 

इस बार इन 5 मैनेजर पर निगाहें
- जोआकिम लोवः पिछली बार अपनी टीम को चैम्पियन बनाने वाले जर्मनी के जोआकिम लोव इस बार भी सबकी नजरों में होंगे। वे पिछले 12 साल से जर्मनी के कोच हैं। लोव खिलाड़ियों के लिए मैदान पर डिफेंसिव और ऑफेंसिव स्ट्रेटजी बनाते हैं। उन्हें सालाना 30 करोड़ रुपए सैलरी मिलती है। पिछले वर्ल्ड कप में इटली के कोच रहे फाबियो कापेलो सबसे महंगे कोच थे। उनकी सालाना सैलरी 75 करोड़ रुपए थी।
- जूलेन लोपेतेगुईः 51 साल के जूलेन 2016 में स्पेन के मैनेजर बने थे। इस बार उन्होंने ही टीम को वर्ल्ड कप के लिए तैयार किया है। वे विरोधी टीम के मुताबिक स्ट्रेटजी बदलने के लिए जाने जाते हैं। जूलेन रियल मैड्रिड और बार्सिलोना से खेल चुके हैं। उन्हें सालाना 23 करोड़ रुपए सैलरी मिलती है। 

- डिडियर डेसचेंप्सः डिडियर फ्रांस 1998 में वर्ल्ड चैम्पियन बनने वाली फ्रांस की टीम के सदस्य थे। उनकी कोचिंग में टीम पिछले वर्ल्ड कप में क्वार्टर फाइनल खेली। फिर यूरो कप-2016 में फाइनल तक पहुंची। वे अपनी फ्लेक्सिबल स्ट्रेटजी से चौंकाते हैं। उन्हें सालाना 27 करोड़ रुपए सैलरी मिलती है। 
- लियोनार्डो बाच्चीः एडेनोर लियोनार्डो बाच्ची यानी टीटे 2016 से ब्राजील टीम के कोच हैं। 20 जून 2016 को उनके कोच बनने के बाद से ब्राजील ने 20 मैचों में से सिर्फ एक मैच हारा। ब्राजील ने वर्ल्ड कप क्वालीफाइंग में लगातार 7 मैच जीते। उन्हें सालाना 27 करोड़ रुपए सैलरी मिलती है। 
- जॉर्ज सम्पोलीः 58 साल के सम्पोली को पिछले साल ही अर्जेंटीना का कोच बनाया गया है। उनके कोच बनने के बाद अर्जेंटीना ने 11 में से 6 मैच जीते, 2 हारे और 3 ड्रॉ खेले। वे अपनी अटैकिंग रणनीति के लिए जाने जाते हैं। 

 

ईरान की टीम सबसे पहले पहुंची मॉस्को

- ईरान की टीम बुधवार को रूस पहुंच गई। वह वर्ल्ड कप के लिए रूस पहुंचने वाली पहली टीम है। ईरान ग्रुप बी में मोरक्को, स्पेन और पुर्तगाल के साथ है। उसे टूर्नामेंट के दूसरे दिन 15 जून को सेंट पीटर्सबर्ग में मोरक्को से पहला मैच खेलना है। 
- ईरान की टीम इस मैच से पहले मॉस्को में लोकोमोटिव बकोवा ट्रेनिंग सेंटर में नौ दिनों तक अभ्यास करेगी। इस दौरान वह 8 जून को लिथुआनिया के खिलाफ फ्रेंडली मैच खेलेगी।  ग्रुप बी में मोरक्को, स्पेन और पुर्तगाल के साथ है। उसे टूर्नामेंट के दूसरे दिन 15 जून को सेंट पीटर्सबर्ग में मोरक्को से पहला मैच खेलना है। 

Fifa World Cup: Manager of 20 teams is indigenous, because foreign manager could not make any team champion
जूलेन लोपेतेगुई को 2016 में स्पेन फुटबॉल टीम का मैनेजर बनाया गया था। - फाइल
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