फुटबॉल / ईपीएल विजेता सिटी पर नियम तोड़ने का आरोप, चैंपियंस लीग के एक सीजन का बैन लग सकता है: रिपोर्ट



Manchester City were banned from Champions League for breaching FFP rules
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Manchester City were banned from Champions League for breaching FFP rules

  • मैनचेस्टर सिटी पर स्पांसरशिप डील को बढ़ाकर दिखाने का आरोप
  • नियम तोड़ने पर 2014 में सिटी पर 450 करोड़ का जुर्माना लगा था
  • 125 साल पुराने क्लब ने छह बार ईपीएल का खिताब जीता

Dainik Bhaskar

May 15, 2019, 08:14 AM IST

खेल डेस्क. इंग्लिश फुटबॉल क्लब और मौजूदा ईपीएल चैंपियन मैनचेस्टर सिटी पर चैंपियंस लीग खेलने पर एक साल का बैन लग सकता है। सिटी पर यूएफा (यूनियन ऑफ यूरोपियन फुटबॉल एसोएिशन) के वित्तीय फेयर प्ले नियम तोड़ने का आरोप है। टीम पर स्पांसरशिप डील को बढ़ाकर दिखाने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूएफा की जांच कमेटी ने सिटी को एक साल तक बैन करने की सिफारिश की है। जांच कमेटी इस हफ्ते यूएफा को रिपोर्ट सौंप सकती है। पिछले साल जर्मनी के एक मैगजीन ने सिटी पर नियम तोड़ने के संबंध में रिपोर्ट छापी थी। हालांकि सिटी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकार दिया था।

 

मैनचेस्टर सिटी ने मौजूदा सीजन में लगातार दूसरी बार ईपीएल (इंग्लिश प्रीमियर लीग) का खिताब जीता है। जर्मन मैगजीन के अनुसार सिटी ने एक एयरलाइन कंपनी से 545 करोड़ रुपए की स्पांसरशिप डील की थी। लेकिन उसे कंपनी से केवल 73 करोड़ रुपए ही मिले। डील के बचे पैसे एक अन्य कंपनी से आए। इस कारण टीम वित्तीय नियम तोड़ने के मामले में फंस गई। इसके अलावा क्लब पर अन्य वित्तीय आरोप भी लगे हैं। इससे पहले सिटी पर नियम तोड़ने के कारण लगभग 450 करोड़ रुपए का जुर्माना यूएफा की ओर से लगा था। एक अन्य क्लब पेरिस सेंट जर्मेन पर भी 2014 में जुर्माना लग चुका है।

 

बेल्जियम के पूर्व पीएम जांच कमेटी के चेयरमैन
बेल्जियम के पूर्व प्रधानमंत्री येवेस लित्रेमे जांच कमेटी के चेयरमैन हैं। जांच कमेटी के सदस्य दो हफ्ते पहले स्विट्जरलैंड में बैठक करके क्लब के विभिन्न पहलूओं पर चर्चा की और इस बारे में किसी नतीजे पर पहुंचे। वे इस हफ्ते अपनी रिपोर्ट दे सकते हैं। सिटी पर बैन इंग्लिश क्लब के लिए झटका माना जा रहा है। टीम ने पिछले आठ साल में चार ईपीएल खिताब जीते हैं। टीम ने अब तक कुल छह बार टूर्नामेंट का खिताब जीता है। सिटी की जगह एक अन्य इंग्लिश क्लब को टूर्नामेंट में उतरने का मौका दिया जा सकता है।

 

मौजूदा नहीं अगले सीजन में उतरने पर बैन लगेगा
चैंपियंस लीग का मौजूदा सीजन 25 जून से शुरू हो रहा है। ऐसे में यदि सिटी पर बैन लगाया जाता है तो उसके पास कोर्ट ऑफ एट्रिब्यूशन के पास अपील करने का मौका रहेगा। ऐसे में निर्णय आने में देरी होने के कारण टीम मौजूदा 2019-20 का सीजन खेल सकेगी। तब उसे 2020-21 सीजन के लिए बैन किया जाएगा। 2018 में फोर्ब्स ने सिटी को 17 हजार 290 करोड़ रुपए के साथ दुनिया का पांचवां सबसे महंगा क्लब माना था। यूएफा ने 2011 में क्लब के घाटे को कम करने के लिए फेयर प्ले नियम बनाया था।

 

2008 में अबुधाबी ग्रुप ने क्लब को खरीदा था
2008 में अबुधाबी यूनाइटेड ग्रुप ने थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा से मैनचेस्टर सिटी फुटबॉल क्लब खरीदा। इसके बाद से क्लब की सुविधाओं पर काफी पैसे खर्च हुए। 125 साल पुराने क्लब की सुविधाओं को बढ़ाने पर 900 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए। इंग्लैंड के अलावा ऑस्ट्रेलिया, जापान, स्पेन, उरुग्वे और चीन में भी टीम खेलती है। जल्द भारत में भी वह एक क्लब खरीदने जा रहा है। खालदून अल मुबारक टीम के चेयरमैन हैं। टीम के ओनर शेख मंसूर बिन जाएद अल नाहयान हैं।

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