बैडमिंटन / यूरोप में मानिषी ने 2 ब्रॉन्ज जीते; फैमिली थी खिलाफ, प्रैक्टिस कर रात 10 बजे लौटती तो गेट बंद कर देते थे



स्वर्ण और रजत पदक विजेता खिलाड़ियों के साथ मानिषी। स्वर्ण और रजत पदक विजेता खिलाड़ियों के साथ मानिषी।
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स्वर्ण और रजत पदक विजेता खिलाड़ियों के साथ मानिषी।स्वर्ण और रजत पदक विजेता खिलाड़ियों के साथ मानिषी।

  • इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट में मानिषी सिंह ने सिंगल और डबल्स टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज मेडल  जीता
  • यूरोप में हुए यूरोपियन मास्टर गेम में 72 देशों के 8 हजार खिलाड़ी शामिल हुए

Dainik Bhaskar

Aug 15, 2019, 04:59 PM IST

खेल डेस्क. यूरोप में आयोजित यूरोपियन मास्टर गेम 2019 में शहर की मानिषी सिंह ने बैडमिंटन में दो ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। 26 जुलाई से 4 अगस्त के बीच हुए इस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में मानिषी ने सिंगल और डबल्स दोनों टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। दोनों में उन्हें ब्रॉन्ज मेडल हासिल हुआ। टूर्नामेंट में 72 देशों के आठ हजार प्लेयर शामिल हुए। सक्सेस का ये सफर मानिषी के लिए आसान नहीं रहा।

 

उन्हें फैमिली को इस टूर्नामेंट में पार्टिसिपेट करने की परमिशन लेने के लिए काफी मनाना पड़ा। जब फैमिली मेंबर्स मान गए तो वीजा ही कैंसिल हो गया, लेकिन वीजा कैंसिल होने की बात घरवालों से छिपाकर मानिषी दिल्ली में छह दिन तक डटी रहीं और आखिरकार वीजा हासिल करने में कामयाब भी रहीं।

 

‘पिता सिटी के बाहर होने वाले टूर्नामेंट में खेलने से मना करने लगे’
मूलरूप से कोरबा की रहने वालीं मानिषी ने खिताब जीतने के बाद शहर में सिटी भास्कर से बातचीत में अपनी सक्सेस स्टोरी शेयर की। मानिषी ने बताया, ‘पिता प्रो. केपी सिंह बैडमिंटन खेलते थे, उन्हें देखकर हम तीन बहनें और एक भाई भी खेलने लगे। स्कूल में कुछ टूर्नामेंट में पार्टिसिपेट किया और मेडल जीतने में सक्सेस रहे। धीरे-धीरे भाई-बहनों का इंट्रेस्ट खत्म हो गया, लेकिन मैंं गेम खेलती रही। बड़े होने के बाद पिता सिटी के बाहर होने वाले टूर्नामेंट में खेलने से मना करने लगे और मैं शहर में ही होने वाले टूर्नामेंट तक सिमट कर रह गई।’

 

‘पति ने कहा सिर्फ फिटनेस के लिए खेलो’
मानिषी ने आगे कहा, ‘शादी के बाद पति अमित कुमार सिंह को अपने शौक के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सिर्फ फिटनेस के लिए खेलो। लेकिन मुझे सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि टूर्नामेंट जीतने के लिए भी खेलना था। देश के लिए मेडल लाना था। पति हर बार मना करते और मैं उन्हें मनाती। वो जिद्दी है कहकर नाराज होते, लेकिन जब मेडल लाती तो मुझ पर प्राउड फील करते। कई बार तो ऐसा भी हुआ कि बैडमिंटन की प्रैक्टिस के कारण घर लौटने में रात 10 बज जाते। पति नाराज होकर दरवाजा बंद कर देते और खोलते नहीं। दरवाजे के बाहर से ही बात करके उन्हें मनाती और फिर वो दरवाजा खोलते।’

 

गवर्नमेंट स्कूल में टीचर हैं मानिषी, स्पोर्ट्स में भी माहिर
मानिषी मूल रूप से कोरबा में बालको टाउनशिप में रहती हैं, उनके पति जॉब के सिलसिले में कोरबा और रायपुर दोनों जगह आना-जाना करते हैं। मानिषी भी बीच-बीच में उनके साथ रायपुर आती हैं। वे बालको टाउनशिप से 21 किलोमीटर दूर उरगा शासकीय स्कूल में 11वीं और 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स को पॉलिटिकल सब्जेक्ट पढ़ाती हैं। स्कूल से शाम 5 बजे घर लौटती हैं। घर के काम करके 7 बजे बैडमिंटन प्रैक्टिस के लिए जाती हैं। रोज 10 बजे तक लौटती हैं।

 

बर्थडे के दिन स्विट्जरलैंड की खिलाड़ी के साथ था मैच
मानिषी का 30 जुलाई को बर्थडे था। इसी दिन वे स्विट्जरलैंड के साथ सिंगल टूर्नामेंट का मैच खेल रही थीं। उन्होंने बताया, जिंदगी में पहली बार ऐसा हुआ जब मैंने बर्थडे नहीं मनाया। केक तक नहीं काटा। मानिषी ने सिंगल्स में आखिरी मैच जर्मनी से और वुमंस डबल में आखिरी मैच फ्रांस की खिलाड़ी के साथ खेला। वे दोनों में ब्रॉन्ज जीतने में कामयाब रहीं।

 

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