मंडे पॉजिटिव / पिछड़ी इलाकों से निकलीं 450 लड़कियां फुटबॉल के जरिए जिंदगी का ‘गोल’ हासिल कर रहीं

Dainik Bhaskar

Feb 25, 2019, 10:03 AM IST



मोरक्को में कार्यक्रम के दौरान चार बार वर्ल्ड कप खेल चुके ब्राजील के काफु और 22 साल आर्सनल के कोच रहे वेंगर युवा टीम से मिले। - फाइल मोरक्को में कार्यक्रम के दौरान चार बार वर्ल्ड कप खेल चुके ब्राजील के काफु और 22 साल आर्सनल के कोच रहे वेंगर युवा टीम से मिले। - फाइल
झारखंड के एनजीओ युवा को खेल का 'लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड' मिला है। - फाइल झारखंड के एनजीओ युवा को खेल का 'लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड' मिला है। - फाइल
युवा एनजीओ पिछले 10 साल से लड़कियों को खेल और शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहा है। - फाइल युवा एनजीओ पिछले 10 साल से लड़कियों को खेल और शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहा है। - फाइल
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मोरक्को में कार्यक्रम के दौरान चार बार वर्ल्ड कप खेल चुके ब्राजील के काफु और 22 साल आर्सनल के कोच रहे वेंगर युवा टीम से मिले। - फाइलमोरक्को में कार्यक्रम के दौरान चार बार वर्ल्ड कप खेल चुके ब्राजील के काफु और 22 साल आर्सनल के कोच रहे वेंगर युवा टीम से मिले। - फाइल
झारखंड के एनजीओ युवा को खेल का 'लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड' मिला है। - फाइलझारखंड के एनजीओ युवा को खेल का 'लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड' मिला है। - फाइल
युवा एनजीओ पिछले 10 साल से लड़कियों को खेल और शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहा है। - फाइलयुवा एनजीओ पिछले 10 साल से लड़कियों को खेल और शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहा है। - फाइल
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  • इनकी सफलता के पीछे लड़कियों के लिए देश के सबसे बड़े स्पोर्ट्स प्रोग्राम में से एक- ‘युवा’, अमेरिका के फ्रैंज गैसलर ने 2009 में की शुरुआत की थी
  • ‘युवा’ को खेल का 'लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड' मिला, ‘युवा’ का मकसद लड़कियों में खेल के जरिए 3-C कैरेक्टर, कॉन्फिडेंस, करेज का विकास करना

रांची. मोरक्को में बीते हफ्ते खेल की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित 'लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड' दिए गए। खेल की बेहतरी के लिए काम करने पर झारखंड के स्पोर्ट्स एनजीओ ‘युवा’ को स्पोर्ट फॉर गुड अवॉर्ड दिया गया। झारखंड और आसपास के तमाम क्षेत्र ऐसे हैं, जहां छोटी उम्र की लड़कियों के बाल विवाह या मानव तस्करी का शिकार हो जाने का अंदेशा रहता है। ऐसे में युवा एनजीओ 10 साल से लड़कियों को खेल और शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहा है। मकसद है- लड़कियों में कैरेक्टर (व्यक्तित्व निर्माण), कॉन्फिडेंस (आत्मविश्वास) और करेज (हिम्मत) का विकास करना।

 

 

अमेरिका के फ्रैंज गैसलर ने 10 साल पहले की थी शुरुआत
2009 में अमेरिकी नागरिक फ्रैंज गैसलर ने झारखंड पहुंचकर युवा की शुरुआत की थी। यहां लड़कियों और लड़कों की जिंदगी के बड़े अंतर को देखा और इसे दूर करने के लिए मुख्य तौर पर खेल की राह चुनी। उन्होंने कम बेहतर जगहों से निकलीं कुछ लड़कियों को इकट्‌ठा कर उनकी टीम बनाई और फुटबॉल के जरिए उनके व्यक्तित्व विकास पर जोर दिया। धीरे-धीरे ये संख्या 100, फिर 300 और अब करीब 450 तक पहुंच चुकी है। ये संख्या ही इन्हें देश के सबसे बड़े स्पोर्ट्स प्रोग्राम में से एक बनाती है। 


ग्राउंड नहीं मिले तो वीरान पड़े खेतों को ही खेल का मैदान बना लिया 
युवा की शुरुआत हुई तो संसाधन कम थे। लड़कियों के खेलने के लिए मैदान की जरूरत थी। ऐसे में आस-पास के जो खेत इस्तेमाल में नहीं थे, उन्हीं को सपाट करके खेलने लायक बना लिया। इसके अलावा आस-पास जो भी मैदान थोड़ा समतल दिखता, लड़कियां वहीं अपने फुटबॉल खेलने की व्यवस्था कर लेतीं। धीरे-धीरे लड़कियां जुड़ती गईं और परिस्थितियां भी बेहतर होती गईं।

 

अब तो यहां सिखाने वाली 90% कोच भी महिलाएं
2015 में युवा स्कूल भी खोला गया। ताकि खेल के साथ-साथ पढ़ाई पर भी ध्यान दिया जा सके। इस स्कूल में 6 से 18 साल तक की लड़कियां हैं। युवा स्कूल खुलने के बाद से खेल के साथ-साथ लड़कियों की शिक्षा पर भी खासा ध्यान दिया गया है। यहां लड़कियों के लिए इंटरनेशनल लेवल के शिक्षकों की व्यवस्था रहती है। यही वजह है कि युवा की 30 से ज्यादा लड़कियां टेड-एक्स इवेंट या इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बतौर स्पीकर हिस्सा ले चुकी हैं। 2011 की जनसंख्या के मुताबिक, झारखंड देश का चौथा सबसे कम साक्षरता दर (66.4%) वाला राज्य है। 2017 में आई रिपोर्ट के मुताबिक- झारखंड में 15 से 19 साल तक की 49% लड़कियों की शादी हो जाती है।

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