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कुश्ती / बेटियों को रेसलर बनाने के लिए रिटायर जवान ने घर में खोली एकेडमी, ट्रेनिंग ले रही लड़कियों को फीस नहीं देनी पड़ती

रिटायर सीआईएसएफ जवान की रेसलिंग एकेडमी रिटायर सीआईएसएफ जवान की रेसलिंग एकेडमी
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रिटायर सीआईएसएफ जवान की रेसलिंग एकेडमीरिटायर सीआईएसएफ जवान की रेसलिंग एकेडमी

  • महाराष्ट्र के हनुमंत फंड ने जनवरी में सीआईएसएफ से वीआरएस लिया, मार्च में बोर्डिंग एकेडमी खोली
  • एकेडमी की 10 लड़कियां नेशनल खेल चुकी हैं
  • लड़कियों को फीस नहीं देनी होती, रहने-खाने का खर्च देना पड़ता है
  • इस एकेडमी की धनश्री अंडर-15 एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लेगी

दैनिक भास्कर

Nov 18, 2019, 10:55 AM IST

औरंगाबाद (एकनाथ पाठक). महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के हनुमंत फंड का सपना था कि बेटियां पहलवान बने। उन्हें भी कुश्ती में दिलचस्पी थी। लेकिन किन्हीं वजहों से खेल नहीं सके। सीआईएसएफ से रिटायर होने के बाद घर में ही एकेडमी खोल ली, ताकि अपनी बेटियों के अलावा अन्य लड़कियों को भी मदद मिल सके। सिर्फ 9 महीने पहले खुली इस एकेडमी में 35 लड़कियां ट्रेनिंग ले रही हैं।

 

यहां सिर्फ महाराष्ट्र नहीं बल्कि अन्य राज्यों की लड़कियां भी हैं। इस बोर्डिंग एकेडमी में लड़कियों को ट्रेनिंग फीस नहीं देनी पड़ती, सिर्फ रहने और खाने का मामूली खर्च देना होता है। एकेडमी में जो कोच हैं, वे भी सेलरी नहीं लेते। सिर्फ मानदेय लेते हैं। एकेडमी की धनश्री अंडर-15 एशियन चैंपियनशिप में 50 किग्रा वेट कैटेगरी में हिस्सा लेंगी। वे 22 से 24 नवंबर तक ताइवान में आयोजित इस चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम में चुनी गई हैं। इस एकेडमी की 10 लड़कियां नेशनल भी खेल चुकी हैं।

 

एनआईएस पटियाला के कोच मोरे ट्रेनिंग दे रहे हैं
एकेडमी में 25 साल के किरण मोरे खिलाड़ियों को रेसलिंग की ट्रेनिंग देते हैं। कोल्हापुर के मोरे ने एनआईएस पटियाला से कोचिंग ली है। जब से एकेडमी खुली है, तब से वे इससे जुड़े हुए हैं। मोरे कहते हैं, 'हनुमंत रेसलिंग के लिए बहुत लगन से काम कर रहे हैं। इस एकेडमी से अगले दो साल में इंटरनेशनल रेसलर निकलने लगेंगे।' मोरे को महाराष्ट्र का क्रीड़ा रत्न अवॉर्ड मिल चुका है।

 

एकेडमी में छत्तीसगढ़ और हरियाणा की भी लड़कियां
हनुमंत का 1996 में सीआईएसएफ में सिलेक्शन हुआ। उन्होंने 22 साल तक देश की सेवा की। इस साल जनवरी में वीआरएस लिया और अपने गांव श्रीगोंदा वापस लौटे। रिटायर होने के बाद मिले पैसों से रेसलिंग एकेडमी शुरू कर समाज की सेवा करना शुरू किया। इस एकेडमी में दो इंटरनेशनल मैट और एक एनआईएस कोच किरण मोरे हैं। एकेडमी की लड़कियां हनुमंत के घर में रहती हैं। वे लड़कियों से ट्रेनिंग फीस नहीं लेते। सिर्फ रहने और खाने का खर्च करीब 3 हजार रुपए लेते हैं। इसमें नॉनवेज, अंडे और अन्य सप्लीमेंट शामिल हैं। अगर कोई लड़की खर्च नहीं दे पाती, तो उससे नहीं लेते। हनुमंत की पत्नी पूजा कबड्‌डी खिलाड़ी रह चुकी हैं। वे भी पति को सपोर्ट करती हैं। सभी लड़कियों के लिए खुद खाना बनाती हैं और ट्रेनिंग-स्ट्रेचिंग में मदद भी करती हैं। एकेडमी की काजल और दीक्षा बजाज छत्तीसगढ़ की हैं। ये दोनों स्कूल नेशनल में हिस्सा लेने वाली हैं। काजल 60 किग्रा और दीक्षा 54 किग्रा में खेलती हैं।

 

छग के अलावा एकेडमी में हरियाणा की खिलाड़ी भी हैं। हनुमंत की दो लड़कियां और एक लड़का है। दोनों लड़कियां भाग्यश्री और धनश्री पहले पुणे में एकेडमी में ट्रेनिंग लेती थीं। लेकिन अब दोनों यहीं ट्रेनिंग लेती हैं। धनश्री पहला इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने ताइवान जा रही है। भाग्यश्री 60 किग्रा वेट कैटेगरी में दो इंटरनेशनल मेडल जीत चुकी हैं।

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