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पुलिस की हिंसा के खिलाफ फुटबॉल फैंस एकजुट हुए, मैचों के बीच में स्टेडियम खाली छोड़ कर जा रहे

10 महीने पहले
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रूस में जेनिट और स्पार्टक क्लब के बीच मैचों में फैंस के बीच लड़ाई काफी सामान्य रही है। (फाइल)
  • पुलिस ने पिछले हफ्ते सेंट पीटर्सबर्ग में फुटबॉल मैच के दौरान कई समर्थकों को गुंडागर्दी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैंस को बार और सड़कों से उठा कर पुलिस स्टेशन पहुंचा दिया गया
  • इसके विरोध में समर्थकों के संगठन फ्रातारिया ने फैंस से मैच के 30वे मिनट में फुटबॉल स्टेडियम छोड़ने की अपील की है

मॉस्कोे. रूस में पुलिस की हिंसा के खिलाफ फुटबाॅल फैंस साथ आ गए हैं। पूरे रूस में फर्स्ट डिविजन मैचों के दौरान फैंस 30वें मिनट में स्टेडियम छोड़ रहे हैं। पिछले हफ्ते स्पार्टक मॉस्को के समर्थकों ने मैच के बायकॉट का ऐलान किया। इसके बाद से ही रूस में क्लब मैचों में यह नजीर बन गया है। 

किस घटना के विरोध में फुटबॉल फैंस?
पिछले हफ्ते सेंट पीटर्सबर्ग में जेनिट और स्पार्टक क्लब के बीच मैच के दौरान पुलिस ने 150 से 200 फुटबॉल फैंस को गिरफ्तार कर लिया था। उनकी गिरफ्तारी का कोई कारण नहीं दिया गया था। इसके बाद देश के फुटबॉल समर्थकों के संगठन ‘फ्रातारिया’ ने बयान जारी किया। संगठन ने कहा कि दोनों क्लब एक दूसरे से दुश्मनी के लिए जाने जाते हैं। अगर पुलिस ने मैच को फैंस के लिए जोखिम भरा माना था, तो अब तक उस मैच से किसी हिंसा की घटना सामने क्यों नहीं आई? 

मैच के दौरान आम लोगों को भी गिरफ्तार किया गया
रूस की आर स्पोर्ट्स न्यूज एजेंसी ने एक गवाह के हवाले से दावा किया, “पुलिस ने मैच के दौरान समर्थकों को सड़कों और बार से उठा लिया। मॉस्को में रहने वाले लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पुलिस स्टेशन ले जाया गया और उन पर उपद्रव और गुंडागर्दी करने के आरोप लगाए गए।” रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया, उनमें एक स्पार्टक फैन को फुटबॉलर अर्टेम ज्यूबा की बेइज्जती करने के लिए स्टेडियम से डेढ़ साल के लिए बैन कर दिया गया। 

सरकार के आदेश पर हिंसा-मुक्त रहा था वर्ल्ड कप
रूस में फुटबॉल स्टेडियमों में 1990 के दौर में हिंसा शुरू हुई थी। तब से टीमों के बीच की लड़ाई मैदान से बाहर फैंस की लड़ाई में तब्दील होने लगी। इस तरह की लड़ाई का सबसे ताजा मामला तीन साल पहले देखा गया था, जब फ्रांस के मार्सेल में यूरो-2016 के दौरान रूस के फैंस ने उपद्रव मचाया था। इससे शहर को काफी नुकसान हुआ था। 


रूसी सरकार ने इन घटनाओं को देखते हुए 2018 वर्ल्ड कप से पहले ही अपनी क्लीन स्टेडियम पॉलिसी शुरू की। सरकार की यह नीति बेहतरीन रही और रूस में बिना किसी हिंसक घटना के वर्ल्ड कप पूरा हुआ। इस वक्त रूस के क्लब मैचों में फैंस के बीच लड़ाई के छोटे-मोटे मामले सामने आ जाते हैं। लेकिन वर्ल्ड कप के बाद भी पुलिस का सख्त रवैया बरकरार है। 

हमारी मैच छोड़ने की अपील कारगर: फ्रातारिया
फ्रातारिया के एक मैनेजर एंटन के मुताबिक, सेंट पीटर्सबर्ग में पुलिस ने फैंस के साथ जो किया वो गलत था। इसी साल जुलाई में पुलिस ने रोस्तोव में स्टेडियम से बाहर जा रहे स्पार्टक मॉस्को के कुछ फैंस के साथ मारपीट की थी। इस घटना की कुछ फोटोज बाहर आई थीं, जिससे रूस के फुटबॉल फैंस गुस्से में आ गए थे। फ्रातारिया की फैंस से 30वें मिनट में मैच छोड़ने की अपील काफी कारगर साबित हुई है। अब तक लगभग सभी फर्स्ट डिविजन मैचों में फैंस एक साथ स्टेडियम से बाहर निकल रहे हैं। इसे कई टीमों के कोचों का भी समर्थन मिला है। 

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