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सेलिब्रिटी / लक्ष्य हर मैच की कमियों को डायरी में लिखते हैं; पिता बैडमिंटन कोच, भाई इंटरनेशनल कोच



लक्ष्य और उनके बड़े भाई चिराग सेन प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं। - फाइल लक्ष्य और उनके बड़े भाई चिराग सेन प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं। - फाइल
लक्ष्य के पिता डीके सेन (बाएं) जाने-माने बैडमिंटन कोच हैं। - फाइल लक्ष्य के पिता डीके सेन (बाएं) जाने-माने बैडमिंटन कोच हैं। - फाइल
लक्ष्य ने बड़े भाई चिराग (दाएं) को देखकर ही बैडमिंटन खेलने की इच्छा जताई। - फाइल लक्ष्य ने बड़े भाई चिराग (दाएं) को देखकर ही बैडमिंटन खेलने की इच्छा जताई। - फाइल
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लक्ष्य और उनके बड़े भाई चिराग सेन प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं। - फाइललक्ष्य और उनके बड़े भाई चिराग सेन प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं। - फाइल
लक्ष्य के पिता डीके सेन (बाएं) जाने-माने बैडमिंटन कोच हैं। - फाइललक्ष्य के पिता डीके सेन (बाएं) जाने-माने बैडमिंटन कोच हैं। - फाइल
लक्ष्य ने बड़े भाई चिराग (दाएं) को देखकर ही बैडमिंटन खेलने की इच्छा जताई। - फाइललक्ष्य ने बड़े भाई चिराग (दाएं) को देखकर ही बैडमिंटन खेलने की इच्छा जताई। - फाइल

  • भारत के इस युवा शटलर को खाली समय में दोस्तों के साथ घूमना पसंद
  • जूनियर वर्ल्ड चैम्पियन रहे लक्ष्य ने 2017 में सीनियर नेशनल में जीता था रजत

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2018, 09:41 AM IST

खेल डेस्क. भारतीय शटलर लक्ष्य सेन ने यूथ ओलिंपिक में शनिवार को पुरुष सिंगल्स में सिल्वर मेडल जीता। भारत को आठ साल बाद इस खेल में पदक मिला। लक्ष्य  ने इसी साल जूनियर एशियन चैम्पियनशिप के पुरुष वर्ग में हमें 53 साल बाद स्वर्ण पदक दिलाया। दो बार के ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और पांच बार के वर्ल्ड चैम्पियन चीन के लिन डैन भी जूनियर एशियन चैम्पियनशिप से ही स्वर्ण पदक जीतकर सबकी नजर में आए थे। अब 17 साल के लक्ष्य से भविष्य अन्य बड़े टूर्नामेंट में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। 

लक्ष्य के दादा भी शटलर थे

  1. लक्ष्य सेन का पूरा परिवार बैडमिंटन से जुड़ा है। पिता डीके सेन बैडमिंटन कोच हैं, जबकि बड़े भाई चिराग सेन भी बैडमिंटन के इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं। चिराग जूनियर रैंकिंग में वर्ल्ड नंबर-2 रह चुके हैं। उनके दादा भी बैडमिंटन खिलाड़ी थे।

  2. लक्ष्य ने तीन साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया। 2011 में नौ साल की उम्र में जूनियर नेशनल टूर्नामेंट के दौरान वे भाई चिराग के साथ नेशनल टूर्नामेंट में शामिल होने बेंगलुरु आए थे। चिराग वहां अंडर-13 कैटेगरी में चैम्पियन बने। 

  3. जीत के बाद चिराग को प्रकाश पादुकोण अकादमी में जगह मिली। लक्ष्य ने भी अकादमी में शामिल होने की इच्छा जताई। अकादमी के कोच विमल कुमार ने उनका ट्रायल लिया। फिर अकादमी में शामिल करने का फैसला किया।

  4. लक्ष्य जब भी गेम हारते, तो कोर्ट में किनारे जाकर चिल्लाते थे। 15 साल की उम्र में ही लक्ष्य ने अंडर-17 और अंडर-19 नेशनल में गोल्ड जीता और कई इंटरनेशनल मेडल भी अपने नाम किए। उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रहने वाले लक्ष्य हमेशा अपने साथ एक डायरी रखते हैं और अपनी कमियों को उसमें लिखते हैं।

  5. लक्ष्य जब भी गेम हारते, तो कोर्ट में किनारे जाकर चिल्लाते थे। 15 साल की उम्र में ही लक्ष्य ने अंडर-17 और अंडर-19 नेशनल में गोल्ड जीता और कई इंटरनेशनल मेडल भी अपने नाम किए। उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रहने वाले लक्ष्य हमेशा अपने साथ एक डायरी रखते हैं और अपनी कमियों को उसमें लिखते हैं।

  6. लक्ष्य कई बार व्यस्तता के चलते घर नहीं जा पाते थे। वे सिर्फ परीक्षा के समय अल्मोड़ा जा पाते थे। इस कारण उनका परिवार दो महीने पहले ही बेंगलुरु शिफ्ट हो गया। लक्ष्य ने बताया कि फ्री टाइम में उन्हें दोस्तों के साथ घूमना पसंद है। 12वीं क्लास के छात्र लक्ष्य वीकेंड (सप्ताहांत) में फिल्में देखते हैं।

  7. लक्ष्य की अभी सिंगल्स में वर्ल्ड रैंकिंग 87 है। वे इसे अंडर-50 में लाना चाहते हैं और 2020 टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई करना लक्ष्य का मुख्य लक्ष्य है।

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