स्पेन / 108 साल से चल रही ये साइकल रेस, दूसरा राउंड मैथ्यूज ने जीता; आखिरी राउंड 31 को



रेस का दूसरा राउंड ऑस्ट्रेलिया के माइकल मैथ्यूज ने जीता। रेस का दूसरा राउंड ऑस्ट्रेलिया के माइकल मैथ्यूज ने जीता।
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रेस का दूसरा राउंड ऑस्ट्रेलिया के माइकल मैथ्यूज ने जीता।रेस का दूसरा राउंड ऑस्ट्रेलिया के माइकल मैथ्यूज ने जीता।

  • ये टूर ऑफ कैटालोनिया साइकल रेस स्पेन में 1911 से हो रही
  • रेस का पहला राउंड 164 किमी का था, जो बेल्जियम के थॉमस डी गेंट ने जीता

Dainik Bhaskar

Mar 28, 2019, 07:53 AM IST

कैटालोनिया सिटी. स्पेन के कैटालोनिया में टूर ऑफ कैटालोनिया साइकिल रेस शुरू हुई। रेस का पहला राउंड बेल्जियम के थॉमस डी गेंट ने, जबकि दूसरा राउंड ऑस्ट्रेलिया के माइकिल मैथ्यूज ने जीता। रेस का आखिरी राउंड 31 मार्च को होगा। पहला राउंड 164 किमी और दूसरा राउंड 179.6 किमी का था। दूसरे राउंड में फिनिश लाइन के 40 किमी पहले तक ब्रिटेन के रेसर क्रिस फूम आगे चल रहे थे, लेकिन उनकी साइकिल दूसरी से भिड़ गई और वे पिछड़ गए। यहां से मिली लीड को मैथ्यूज ने अंत तक बरकरार रखा।

स्पेन के साइक्लिस्ट सबसे ज्यादा 60 बार जीत चुके हैं

  1. टूर ऑफ कैटालोनिया 1911 से हो रही है। इन 108 साल में रेस के 98 एडिशन हुए हैं। ये दुनिया की चौथी सबसे पुरानी रेस है। टूर डी फ्रांस (1903 से), टूर ऑफ बेल्जियम (1908 से) और गिरो डी इटैलिया (1909 से) सबसे पुरानी रेस में पहले 3 पायदान पर हैं।

  2. स्पेन का रेस में अब तक वर्चस्व रहा है। पहला खिताब स्पेन के साइक्लिस्ट सेबेस्टिया मासड्यू ने जीता था। सबसे ज्यादा 7 बार रेस जीतने का रिकॉर्ड भी स्पेन के ही साइक्लिस्ट मारियाना कानार्डो के नाम है।

  3. पिछले साल 2018 में भी स्पेन के ही एलेक्जांद्रो वालवेदरे ने रेस जीती थी। ओवरऑल स्पेन के साइक्लिस्ट ने कुल 60 बार रेस जीती है। फ्रांस ने 11, जबकि इटली के साइक्लिस्ट 10 बार चैंपियन बने हैं।

  4. 1911 में पहली रेस हुई थी; तब 34 रेसर थे, अब 195

    1911 में पहली टूर ऑफ कैटालोनिया रेस हुई थी। तब रेस 3 राउंड में कुल 363 किमी की हुई थी। इसमें कुल 34 रेसर ने हिस्सा लिया था। अब रेस 7 राउंड और 1178.4 किमी की हो चुकी है। इस साल रेस में कुल 195 साइक्लिस्ट हिस्सा ले रहे हैं।Spain

  5. पहली रेस में साइक्लिस्ट की औसत रफ्तार करीब 23 किमी प्रति घंटा थी, जो अब बढ़कर करीब 41 किमी प्रतिघंटा हो चुकी है। 1911 में शुरू हुई ये रेस प्रथम विश्वयुद्ध की वजह से 2 साल बाद ही बंद करनी पड़ी थी। 1914 से 1919 तक रेस आयोजित नहीं हुई। 1920 में ये फिर शुरू हो सकी।

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