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IPL बायोबबल में कैसे पहुंचा कोरोना:खिलाड़ियों को दी गई ट्रैकिंग डिवाइस खराब निकली; अफसरों ने प्रोटोकॉल में लापरवाही बरती

नई दिल्ली7 महीने पहले
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IPL-14वें सीजन के बीच में 4 खिलाड़ियों सहित दो सहायक कोचों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने से बायो-बबल के ट्रैकिंग डिवाइस और कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों को सख्ती से पालन कराने के लिए नियुक्त कोरोना अफसरों पर सवाल उठने लगे हैं। सोमवार को KKR के दो खिलाड़ियों वरुण चक्रवर्ती और संदीप वॉरियर और चेन्नई सुपर किंग्स के बॉलिंग कोच एल बालाजी सहित तीन लोग पॉजिटिव पाए गए। वहीं बुधवार को केकेआर के ऋद्धिमान साहा और दिल्ली कैपिटल्स के अमित मिश्रा भी संक्रमित पाए गए। जिसके बाद IPL को स्थगित करना पड़ा। इसके बाद बायो-बबल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ट्रैकिंग डिवाइस का खराब होना
दरअसल, खिलाड़ी बायो बबल एरिया में रहें और जो एरिया निर्धारित की गई है, उससे बाहर न जाएं। इस पर नजर रखने के लिए सभी खिलाड़ियों को ट्रैकिंग डिवाइस दी गई थी। यह डिवाइस रिस्ट बैंड की तरह थी। जिसे हमेशा खिलाड़ियों को होटल कमरे से बाहर निकलने पर पहनना जरूरी था। ये डिवाइस ब्लूटूथ के जरिए मोबाइल फोन में एक ऐप से जुड़ी रहती है। यह डिवाइस खिलाड़ियों को जाने-अनजाने में बायो बबल तोड़ने से रोकने में मददगार थी। इससे खिलाड़ियों को पता चलता कि उन्हें किन जगहों पर जाना है और कौन सी जगह बायो- बबल के तहत आती है। जैसे ही खिलाड़ी बायो-बबल एरिया से बाहर होंगे, इस डिवाइस से आवाज आएगी और खिलाड़ी अलर्ट हो सकेंगे। यह डिवाइस सेंट्रल पैनल से जुड़ा थी। इससे बोर्ड को पता चलता कि कौन से खिलाड़ी बायो-बबल का उल्लंघन कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक बोर्ड ने चेन्नई की एक कंपनी से ये FOB डिवाइस ली थी, जो ठीक तरीके से काम नहीं कर रही थी। इसकी शिकायत फ्रेचाइजी ने बोर्ड से भी की थी। एक टीम के एक अधिकारी के मुताबिक वह एक शहर से दूसरे शहर चले गए, लेकिन जब डिवाइस का डेटा आया, तो उसमें पिछले शहर की जानकारी थी।

पिछली बार यूके की कंपनी ने मुहैया कराई थी डिवाइस
यूएई में IPL के पिछले सीजन के दौरान यूके की कंपनी ने रिस्टबैंड के रूप में ट्रैकिंग डिवाइस उपलब्ध कराई थी। हालांकि उसको लेकर किसी भी फ्रेंचाइजी ने कोई शिकायत नहीं की थी।

कोरोना ऑफिसर प्रोटोकॉल का पालन नहीं करा पाए
यूएई में पहली बार बायो-बबल में आयोजित हुए IPLके दौरान हर टीम के साथ 1 कोरोना ऑफिसर नियुक्त किया गया था। लेकिन इस बार कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती पालन कराने के लिए सभी टीमों के साथ चार-चार कोरोना ऑफिसर नियुक्त किए गए थे। ताकि टीमें बायो-बबल के नियमों का पालन करने में कोताही न बरतें, लेकिन चार खिलाड़ियों और एक कोच के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद कोरोना ऑफिसर की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के मुताबिक कोरोना ऑफिसर्स टीमों से कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन नहीं करा पाए। यूएई में केवल एक अधिकारी नियुक्त किया गया था। लेकिन यहां चार अधिकारी नियुक्त गए थे कि वह होटल से लेकर टीम के बाहर जाने पर नजर रख सके और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करा सके।

होटल में बायो-बबल बनाने में लापरवाही
सूत्रों के मुताबिक खिलाड़ियों और कोचों के कोरोना संक्रमित होने की सबसे बड़ी वजह होटल में बायो-बबल तैयार करने में लापरवाही रही। कई टीमों ने जल्दीबाजी में होटल बुक कराए। वहीं होटल में खिलाड़ियों के प्रवेश से पहले होटल कर्मचारियों को पहले से क्वारैंटाइन नहीं किया गया। बल्कि कई टीमों के खिलाड़ी जब क्वारैंटाइन थे, तभी होटल कर्मचारी भी क्वारैंटाइन रहे। ऐसे में यह संभावना है कि होटल कर्मचारियों से ही खिलाड़ी संक्रमित हो गए हों।

IPLकी ट्रैवल पॉलिसी भी खिलाड़ियों के संक्रमित होने की वजह
सूत्रों के मुताबिक कई टीमों को एक हफ्ते के अंदर दो ट्रैवल करने पड़े। ऐसा माना जा रहा है कि ट्रैवल के दौरान भी खिलाड़ी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए हों। साथ ही टीमों ने इस दौरान भी लापरवाही बरती। बसों और प्लेन के कर्मचारी को 14 दिन क्वारैंटाइन नहीं रखा गया। ऐसे में संभावना है कि इस दौरान खिलाड़ी कोरोना संक्रमित हो गए हों।
कोलकाता को एक हफ्ते के अंदर दो ट्रैवल करने पड़े। टीम ने मुंबई में पहला मैच 21 अप्रैल को चेन्नई सुपर किंग्स के साथ और दूसरा मैच 24 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के साथ खेला। इसके बाद टीम अहमदाबाद के लिए रवाना हो गई। सूत्रों के मुताबिक हो सकता है कि इसी दौरान खिलाड़ी संक्रमित हुए हों।

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