IPL में पंत का सुपर फ्लॉप शो:13 मैच से नहीं लगा सके एक भी फिफ्टी, 5 पॉइंट्स में समझिए ऋषभ की नाकामी की वजह

मुंबई6 महीने पहले

ऋषभ पंत भारत के नंबर वन विकेटकीपर बल्लेबाज हैं। टीम इंडिया को उनसे टी-20 वर्ल्ड कप में बेहतरीन प्रदर्शन की आस है। इस बीच पंत को IPL 15 में कप्तानी के बोझ तले टूटते देखा जा रहा है। यकीन कर पाना मुश्किल है कि इस पॉकेट डायनामाइट ने IPL के इस सीजन में एक भी 50 नहीं लगाई है।

उम्मीद जताई जा रही थी कि सीजन के लास्ट फेज में कम से कम उनका बल्ला बोलेगा, लेकिन PBKS के खिलाफ भी ऋषभ लापरवाही कर बैठे और 7 रन बनाकर चलते बने। लिविंगस्टोन पर हावी होने के लिए पंत क्रीज से आगे तो बढ़ गए, लेकिन सही समय पर लौट नहीं सके। विकेटकीपर जितेश शर्मा ने पंत को आसानी से स्टंप कर दिया। आइए आपको 5 कारण बताते हैं, जिनकी वजह से पंत इस सीजन नाकाम हुए हैं। उसके पहले इस पोल में हिस्सा ले सकते हैं।

1. पंत नहीं समझ पा रहे कप्तान और सिर्फ प्लेयर होने का फर्क
ऋषभ पंत को यह एहसास नहीं हो पा रहा कि सिर्फ खिलाड़ी और कप्तान होने में फर्क होता है। एक प्लेयर के तौर पर आप कई बार सिचुएशन का ध्यान रखे बिना खुलकर शॉट खेलते हुए विकेट गंवा देते हैं। उस वक्त आप पर सवाल खड़े होते हैं, लेकिन तब रवैया बदलने के लिए कैप्टन और कोच आपको समय देते हैं। खुद कप्तान होने के नाते आपसे जिम्मेदार होने की उम्मीद की जाती है।

जिस वक्त क्रीज पर कप्तान के रूप में ठहर कर टीम को बड़े स्कोर की ओर ले जाना चाहिए, पंत सबसे पहले पहले आउट होकर वापस पवेलियन की ओर चल देते हैं। जितने भी सफल कप्तान रहे हैं, उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस से टीम में अपनी जगह सुनिश्चित की है। आप सिर्फ कप्तान हैं, इसलिए टीम में आपकी जगह लंबे अरसे तक पक्की नहीं हो सकती। आपको परफॉर्मेंस के बलबूते अपनी जगह हासिल करनी होगी।

2. ओवर एग्रेशन के चक्कर में विकेट फेंक रहे हैं
पंत अति-आक्रामकता के शिकार हो रहे हैं। वह आते ही पहली बॉल से अटैक करने लगते हैं। फिर सस्ते में अपना विकेट गंवा कर चलते बनते हैं। आउट होने के बाद जिस तरह वह प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं, उन जैसे दिग्गज खिलाड़ी को शोभा नहीं देता। 13 पारियों में एक भी अर्धशतक ना होना पंत जैसे दिग्गज बल्लेबाज के लिए चिंताजनक है। ऋषभ पंत के पिटारे में तमाम तरह के शॉट्स हैं।

अगर वह थोड़ी देर क्रीज पर टिक जाएंगे, तो किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की बखिया उधेड़ सकते हैं। ऋषभ को सिर्फ यह समझना है कि ओवर एग्रेसिव होकर विकेट गंवा देने की बजाय शुरुआती कुछ ओवर धीमी गति से बल्लेबाजी की जा सकती है। एक बार नजर जम जाए, फिर उनके लिए बड़े शॉट खेलना मुश्किल नहीं होगा।

3.अपने खेल से ज्यादा अंपायर के निर्णय पर सवाल खड़े करने में ऊर्जा लगा रहे पंत
एक कप्तान के तौर पर ऋषभ अपने बर्ताव से भी क्रिकेट प्रेमियों को निराश कर रहे हैं। जिस तरह राजस्थान के खिलाफ 20वें ओवर के नो बॉल विवाद में उन्होंने अपने दोनों बल्लेबाजों को बीच मैच में वापस आने का इशारा किया, वह किसी भी खिलाड़ी को शोभा नहीं देता।

इतने वर्षों से टीम इंडिया और दिल्ली के लिए खेल रहे पंत का व्यवहार गली क्रिकेट के खिलाड़ी की तरह लगा। मानो अगर किसी ने हमें बैटिंग नहीं दी तो बदले में हम अपना बैट वापस लेकर और विकेट उखाड़ कर मैच नहीं होने देंगे।

जब रॉवमैन पॉवेल के खिलाफ 20वें ओवर में डाली गई इस गेंद को अंपायर ने नो-बॉल करार नहीं दिया, तो नाराजगी में पंत ने दोनों बल्लेबाजों को वापस लौटने का इशारा किया।
जब रॉवमैन पॉवेल के खिलाफ 20वें ओवर में डाली गई इस गेंद को अंपायर ने नो-बॉल करार नहीं दिया, तो नाराजगी में पंत ने दोनों बल्लेबाजों को वापस लौटने का इशारा किया।

यह बर्ताव उनकी नासमझी दिखाता है। रोहित शर्मा के बाद पंत को टीम इंडिया के कप्तान के तौर पर देखा जा रहा है। भारत को दो वर्ल्ड कप जिताने वाले युवराज सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ी पंत की पैरवी कर रहे हैं। वह तो ऋषभ को टेस्ट टीम की कप्तानी सौंपना चाहते हैं। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जो बल्लेबाज टी-20 में इतनी आसानी से अपना विकेट फेंक रहा है, क्या हुआ टेस्ट टीम की कप्तानी कर पाएगा ?

अगर ऋषभ को आगे चलकर टीम इंडिया की कप्तानी करनी है, तो उन्हें परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढालना सीखना होगा। साथ ही अपना रवैया बदलना होगा। कल को अगर वह टीम इंडिया की कमान संभालते हैं, तो अंपायर के विवादित निर्णय पर उनका रिएक्शन देश की छवि धूमिल कर सकता है। अंपायर के फैसलों पर अधिक फोकस और अपने खेल पर कम ध्यान देने का ही परिणाम है, पंत इस सीजन बुरी तरह फ्लॉप रहे हैं।

4. छवि में कैद होकर रह गए हैं ऋषभ
ऋषभ पंत की इमेज एक ताबड़तोड़ बल्लेबाज की है। फैंस को लगता है कि अगर पंत मैदान में आएगा, तो सिर्फ धमाकेदार शॉट लगाएगा। अपनी पुरानी छवि के दबाव में पंत खेलने का अंदाज नहीं बदल पा रहे हैं। जरूरी नहीं है कि टॉप ऑर्डर में आते ही 200 की स्ट्राइक रेट से रन बनाने हैं। अगर आप बड़े शॉट्स खेलने में विकेट गंवा रहे हैं, तो यह जिम्मेदारी थोड़े समय के लिए दूसरा बल्लेबाज उठा सकता है।

वह नॉन-स्ट्राइक पर रहकर भी क्रीज पर समय बिता सकते हैं। पंत को शायद लगता है कि अगर वह खेलने का स्टाइल बदलेंगे, तो फिर पुराने तरीके से खेल पाना उनके लिए मुश्किल होगा। ऐसे में ऋषभ को हार्दिक पंड्या की IPL 2022 की जर्नी से कुछ सीखना चाहिए। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ हार्दिक ने धीमा अर्धशतक लगाया और बदले में टीम को करारी शिकस्त मिली।

हार्दिक की काफी आलोचना हुई। हकीकत यह है कि उस पारी ने हार्दिक को कॉन्फिडेंस दिया, जिसका परिणाम था कि अगले ही मैच में उन्होंने नाबाद रहकर टीम को मुकाबला जिताया। एक इनिंग ने हार्दिक की बैटिंग को पूरी तरह बदल कर रख दिया। ऋषभ फॉर्म में वापसी से सिर्फ एक बड़े स्कोर दूर हैं। PBKS के खिलाफ तीसरी गेंद पर स्टंप आउट होने से पंत की फॉर्म नहीं लौटेगी। गेंदबाज पर हावी होने के चक्कर में आते ही विकेट गंवाना उनके करियर का बड़ा नुकसान करेगा।

पंजाब के पार्ट-टाइमर बॉलर लियाम लिविंगस्टोन पर हावी होने की फिराक में एक छक्का जड़ने के बावजूद पंत ने क्रीज से बढ़कर शॉट खेलना चाहा और अपना विकेट गंवा बैठे।
पंजाब के पार्ट-टाइमर बॉलर लियाम लिविंगस्टोन पर हावी होने की फिराक में एक छक्का जड़ने के बावजूद पंत ने क्रीज से बढ़कर शॉट खेलना चाहा और अपना विकेट गंवा बैठे।

5. पारी एंकर करने का महत्व नहीं समझ पा रहे पंत
टॉप ऑर्डर में खेलने वाला बल्लेबाज पिंच हिटर नहीं होता। उस पर इनिंग को एंकर करने की जिम्मेदारी भी होती है। पृथ्वी शॉ बीमारी की वजह से टीम का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में पंत को अंतिम ओवर तक टिककर बल्लेबाजी करने की सोच रखनी चाहिए।

आगे चलकर भी उन्हें ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ेगा, जहां पर तेजी से रन बनाने की बजाय संभलकर खेलना ज्यादा जरूरी होगा। कई बार 20 बॉल पर 50 बनाने की बजाय साथी खिलाड़ियों को साथ लेकर 50 बॉल में 70 बनाना भी टीम के लिए जरूरी होता है। जरूरत है कि पंत इनिंग को एंकर करने की कोशिश करें और ज्यादा से ज्यादा वक्त तक पारी को अपने इर्द-गिर्द चलाएं।