टी-20 क्रिकेट में क्यों अहम है वाइड यॉर्कर:दिग्गज बल्लेबाज भी इसके आगे रन के लिए तरस जाते हैं, जानिए ट्रेडिशनल यॉर्कर से कैसे है अलग

मुंबई2 महीने पहलेलेखक: कुमार ऋत्विज
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क्रिकेट के शॉर्ट फॉर्मेट यानी वनडे और टी-20 के कई नियम काफी हद तक बैटर्स को फेवर करते हैं। ऐसे में गेंदबाज को विकेट हासिल करने के लिए कुछ अलग करना होता है। अक्सर बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने से रोकने और उन्हें आउट करने के लिए यॉर्कर गेंद का इस्तेमाल किया जाता है। अब यॉर्कर का भी नया वर्जन वाइड यॉर्कर काफी उपयोग में लाया जा रहा है। IPL में गेंदबाज लगातार इसका प्रयोग कर रहे हैं।
क्या है वाइड यॉर्कर?
वाइड यॉर्कर की लेंथ ट्रेडिशनल यॉर्कर की ही तरह होती है, पर लाइन दोनों को अलग बनाती है। वाइड मार्क और ऑफ स्टंप के बीच में कहीं भी इस नए यॉर्कर को फेंका जाता है। वाइड यॉर्कर का सीधा फंडा है बैटर को स्लॉग करने के कम मौके देना। बल्लेबाज आमतौर पर लेग साइड में स्लॉग करता है। वाइड यॉर्कर अगर सटीक बैठे तो यह संभव नहीं हो पाता। वाइड यॉर्कर पर ऑफ साइड में शॉट लगाए जा सकते हैं। इससे बचने के लिए थर्ड मैन, डीप पॉइंट, डीप एक्स्ट्रा कवर और लॉन्ग ऑफ के चार अहम बाउंड्री पोजीशन में से अमूमन किन्हीं तीन पर फील्डर रखे जाते हैं। जो बल्लेबाज इनसाइड आउट शॉट्स अच्छा खेलता है या गेंद को फाइन स्लाइस करने की काबिलियत रखता है, उसके खिलाफ वाइड यॉर्कर कई बार बैकफायर भी कर जाता है।

फील्ड प्लेसमेंट के आधार पर बल्लेबाज कई बार अंदाजा लगा लेता है कि वाइड यॉर्कर आने वाली है। इससे निपटने के लिए वह बॉल की डिलीवरी से पहले ही ऑफ स्टंप के बाहर मूव कर जाता है। मिसाल के तौर पर हमने देखा कि राहुल तेवतिया ने यही तरीका अपनाकर पंजाब किंग्स के बॉलर ओडियन स्मिथ के खिलाफ आखिरी गेंद पर छक्का जमाया और गुजरात टाइटंस को जीत दिलाई।

जिस इलाके में वाइड यॉर्कर को डाला जाता है, वह 5वें से लेकर 7वें स्टंप की लाइन तक हो सकता है। वहीं एक ट्रेडिशनल यॉर्कर बल्लेबाज के जूतों पर फेंका जाता है। जब तक वह अपने पैर हटाता है या बल्ला नीचे लाता है, तब तक गेंद विकेटों पर लग जाती है। कई बल्लेबाज ऐसे में जख्मी भी हो चुके हैं, क्योंकि वे अपने पैर सही समय पर नहीं हटा सके। ऐसे खतरनाक यॉर्कर को क्रिकेट जगत में 'टो क्रशिंग यॉर्कर' कहा जाता है। अगर बोल्ड नहीं तो इस परिस्थिति में LBW मिलना निश्चित होता है।

बल्लेबाज सामान्य यॉर्कर को टैकल करने के लिए क्रीज में डीप खड़ा होता है ताकि यॉर्कर उसे हाफ वॉली पर मिले। वाइड यॉर्कर के लिए भी क्रीज में डीप खड़ा होना कारगर होता है।

मॉडर्न डे क्रिकेट के 2 यॉर्कर स्पेशलिस्ट में लसिथ मलिंगा और जसप्रीत बुमराह को शुमार किया जाता है।
मॉडर्न डे क्रिकेट के 2 यॉर्कर स्पेशलिस्ट में लसिथ मलिंगा और जसप्रीत बुमराह को शुमार किया जाता है।

लसिथ मलिंगा, मिचेल स्टार्क, जसप्रीत बुमराह, लॉकी फर्ग्यूसन, ट्रेंट बोल्ट और शाहीन अफरीदी हाल-फिलहाल कुछ ऐसे गेंदबाज रहे हैं जो यॉर्कर के साथ वाइड यॉर्कर फेंक सकते हैं। नई टेक्नोलोजी के आने के बाद बल्लों के एज और स्वीट स्पॉट पहले से अधिक बेहतर हुए हैं। अब बल्लेबाज बेझिझक स्टंप्स छोड़ कर निकल जाते हैं और खुद को रूम देकर गेंद को स्टम्प्स के बीच में से मारने की कोशिश करते हैं।अगर गेंद ठीक से बल्ले पर आ जाती है तो रन बनने की संभावना बढ़ जाती है। चूंकि इस दौरान पैर गेंद की लाइन में नहीं होते, तो बैटर आसानी से गेंद को बल्ले से ब्लॉक भी कर लेता है।

IPL में लगातार बढ़ रहा है वाइड यॉर्कर का प्रयोग

IPL 2019 में राइट हैंड फास्ट बॉलर्स ने राइट हैंड बल्लेबाजों को 64 वाइड यॉर्कर फेंकी। 2020 में, यह संख्या 118 हो गई, इस दौरान 84% की ग्रोथ दर्ज की गई। दिलचस्प बात यह है कि 2019 के संस्करण में गेंदबाजों ने विपरीत शैली के बल्लेबाजों 28 यॉर्कर गेंदें फेंकी। यानी जब दाएं हाथ के तेज गेंदबाज बाएं हाथ के बल्लेबाजों को गेंदबाजी करते हैं, और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज दाएं हाथ के बल्लेबाजों को गेंदबाजी करते हैं। 2020 में ऐसे वाइड यॉर्कर की संख्या बढ़कर 95 हो गई। 239% की वृद्धि । दरअसल, हेलिकॉप्टर शॉट के जमाने में वाइड यॉर्कर पारंपरिक यॉर्कर के मास्टर हिटर बल्लेबाजों के खिलाफ एक शक्तिशाली हथियार बन जाता है।

2009 में भारत के न्यूजीलैंड दौरे पर खेली गई वनडे सीरीज के दौरान एमएस धोनी शानदार फॉर्म में थे। तब काइल मिल्स ने उन्हें वाइड यॉर्कर के जाल में फंसा लिया था। मिल्स अब कोलकाता नाइट राइडर्स के गेंदबाजी कोच हैं और वह आंद्रे रसेल को ऐसी गेंदबाजी के लिए ट्रेंड कर रहे हैं।

ऋषभ पंत के बल्ले को भी खामोश कर चुका है वाइड यॉर्कर
वाइड यॉर्कर कप्तान को वन साइडेड फील्ड सेटिंग की सहूलियत देता है। IPL 14 में लेफ्ट हैंडेड हिटर ऋषभ पंत और शिमरोन हेटमायर RCB के खिलाफ अच्छी लय में नजर आ रहे रहे थे। उन्हें बड़े शॉट्स खेलने से रोकने के लिए बॉलर काइल जैमिसन ने थर्ड मैन, पॉइंट, डीप कवर, एक्स्ट्रा कवर को सर्किल के अंदर रखते हुए एक वाइडिश लांगऑफ लिया। लेग साइड पर लांग ऑन, डीप मिडविकेट के साथ शॉर्ट फाइन लेग और फिर बैकवर्ड स्क्वायर लेग को सर्कल के अंदर रखा। ऐसे में अगर बल्लेबाज शॉर्ट फाइन लेग की ऊपर से स्कूप शॉट खेलना चाहता है, तो बैटर को लाइन के साथ-साथ एंगल को भी मात देनी होती। गेंदबाज की यह रणनिति सटीक बैठी थी।

बेंगलुरु के खिलाफ वाइड यॉर्कर पर शॉट खेलने की कोशिश में ऋषभ पंत गिर पड़े थे।
बेंगलुरु के खिलाफ वाइड यॉर्कर पर शॉट खेलने की कोशिश में ऋषभ पंत गिर पड़े थे।

कैसे आता है वाइड यॉर्कर का कौशल?
ट्रेडिशनल यॉर्कर की ही तरह वाइड यॉर्कर सीखने के लिए गेंदबाज घंटों अभ्यास करता है। इस दौरान वह नेट पर पसीना बहाते हुए वाइड यॉर्कर और स्लोअर यॉर्कर को मैच के किसी भी सिचुएशन में फेंकने की तैयारी करता है। बहुत सी कहानियां निकल कर आई हैं जिनमें देखा गया है कि यॉर्कर को परफेक्ट करने के लिए स्टम्प्स के सामने और वाइड लाइन से थोड़ा पहले जूता रखकर गेंदबाज प्रैक्टिस करते हैं। वसीम अकरम और वकार यूनिस जैसे गेंदबाज इनस्विंगिंग यॉर्कर और रिवर्स स्विंग यॉर्कर करने में माहिर थे।

मॉडर्न डे क्रिकेट में परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना ही सबसे बेहतर माना जाता है। इस खेल का पलड़ा लगातार बल्लेबाजों के पक्ष में झुकता जा रहा है। ऐसे में अगर गेंदबाजों को ज्यादा रन नहीं बनने देना है तो अपनी गेंदों में वेरिएशन लाना होगा। आधुनिक गेंदबाज ट्रेडिशनल यॉर्कर के साथ-साथ वाइड यॉर्कर और स्लोअर यॉर्कर पर काम कर रहे हैं।

टी-20 क्रिकेट में बेहद तेजी से रन बनाए जाते हैं और इसे रोकने के लिए क्रिकेट के बाकी फॉर्मेट की तुलना में गेंदबाज वाइड यॉर्कर का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। खेल के सबसे छोटे फॉर्मेट में गेंदबाजों के पास सबसे ज्यादा विविधता होनी चाहिए। अगर आपको टी-20 फॉर्मेट का सफल गेंदबाज बनना है तो वाइड यॉर्कर को बेहतर तरीके से करना आना चाहिए।

IPL 15 में राजस्थान ने वाइड यॉर्कर के दम पर जीते मैच

राजस्थान रॉयल्स इस सीजन एकमात्र टीम रही है जिसने 6 मुकाबलों में टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए 5 मुकाबले जीते हैं। उनकी इस सफलता का क्रेडिट सबसे ज्यादा बॉलर्स को दिया जा रहा है। आपको दो ऐसे मौकों के बारे में बताते हैं जब 20वें ओवर में वाइड यॉर्कर डालकर राजस्थान के गेंदबाजों ने टीम को टारगेट डिफेंड करते हुए जीत दिलाई।

IPL 15 में राजस्थान रॉयल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच खेले गए मुकाबले में मार्कस स्टोइनिस जैसा धुरंधर बल्लेबाज स्ट्राइक पर था। आखिरी ओवर में लखनऊ को जीत के लिए 15 रन बनाने थे। सबको लगा कि लखनऊ कंगारू बल्लेबाज के रहते आसानी से टारगेट तक पहुंच जाएगी। ऐसे में राजस्थान के कप्तान संजू सैमसन ने IPL डेब्यू कर रहे कुलदीप सेन के हाथों में गेंद पकड़ा दी।

आश्चर्यजनक रूप से कुलदीप ने टीम को 3 रनों से मैच जिता दिया। मुकाबले के बाद पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में संजू ने बताया कि उन्होंने कुलदीप को नेट्स में वाइड यॉर्कर की प्रैक्टिस करते देखा था। संजू ने तभी सोच लिया था कि कुलदीप को प्रेशर सिचुएशन में बॉलिंग कराई जा सकती है। राजस्थान के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करने के बावजूद वाइड यॉर्कर के आगे स्टोइनिस बेबस नजर आए और टीम के लिए मैच नहीं जीत सके।

IPL 15 का 9वां मुकाबला राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियंस के बीच था। मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में MI को जीत के लिए 194 का टारगेट मिला। टी-20 क्रिकेट में 11,523 रन बना चुके कीरोन पोलार्ड के स्ट्राइक पर रहते हुए मुंबई को जीत के लिए आखिरी ओवर में 29 रन बनाने थे। कप्तान संजू सैमसन ने इस बार नवदीप सैनी के हाथों में गेंद थमाई। सैनी ने सारी गेंदें वाइड यॉर्कर डालीं। इस ओवर में बल्ले से केवल 4 रन बनाए जा सके और 4 गेंदें डॉट रहीं । यहां तक कि आखिरी गेंद को मारने की फिराक में पोलार्ड आउट भी हो गए। अगर पोलार्ड जैसा बल्लेबाज भी किसी गेंद को नहीं खेल पा रहा तो आप समझ सकते हैं कि आने वाले वक्त में इसकी अहमियत कितनी बढ़ने वाली है।