वो 20 मिनट जब धोनी ने हारा मैच पलट दिया:10वें ओवर तक KKR जीत रही थी, धोनी ने तुरुप का इक्का फेंका और मैच झोली में आ गया

7 महीने पहले

जाते-जाते IPL ने फिर से ये कहने का मौका दे दिया कि महेंद्र सिंह धोनी दुनिया के सबसे समझदार क्रिकेटर्स और कप्तान में से एक हैं। फाइनल मैच में जब ये लगने लगा था कि चेन्नई हार की ओर बढ़ चली है। तब धोनी ने 20 मिनट में विकेट के पीछे से सारा खेल बदल दिया।

आइए आपको IPL के फाइनल के उन 20 मिनटों में लिए चलते हैं, जब धोनी अपनी जीत की कहानी खुद लिखी-

वक्त था कि हर तरफ से धोनी के खिलाफ खड़ा हो गया था। कोलकाता के सबसे शानदार खिलाड़ी वेंकटेश अय्यर का कैच खुद धोनी से दो-दो बार छूट गया था। गिल आउट हुए गेंद ने स्पाइडर कैम को छू लिया और उसे डेड बॉल दे दिया गया। CSK के खिलाड़ियों में निराशा छाने लगी थी। 10 ओवर बीत चुके थे। किसी भी बॉलर को विकेट नहीं मिल रहे थे। वेंकटेश अय्यर और शुभमन गिल क्रीज पर नजरें गड़ा चुके थे। दोनों आसानी से रन बनाते चले जा रहे थे।
वक्त था कि हर तरफ से धोनी के खिलाफ खड़ा हो गया था। कोलकाता के सबसे शानदार खिलाड़ी वेंकटेश अय्यर का कैच खुद धोनी से दो-दो बार छूट गया था। गिल आउट हुए गेंद ने स्पाइडर कैम को छू लिया और उसे डेड बॉल दे दिया गया। CSK के खिलाड़ियों में निराशा छाने लगी थी। 10 ओवर बीत चुके थे। किसी भी बॉलर को विकेट नहीं मिल रहे थे। वेंकटेश अय्यर और शुभमन गिल क्रीज पर नजरें गड़ा चुके थे। दोनों आसानी से रन बनाते चले जा रहे थे।
लगभग इसी तरह के हालात में एक मैच पहले ऋषभ पंत को भरपूर निराश होते हुए देखा गया था। लेकिन ये ऋषभ नहीं धोनी थे जो आखिरी गेंद तक कमाल की उम्मीद रखते हैं। फिर अभी तो 10 ही ओवर निकले थे। उन्होंने अपना तुरुप का इक्का निकाला, शार्दुल ठाकुर। वो शार्दुल के पास गए और उनसे थोड़ी बात की। फिर रवींद्र जडेजा को एक खास जगह पर फील्डिंग के लिए लगाया।
लगभग इसी तरह के हालात में एक मैच पहले ऋषभ पंत को भरपूर निराश होते हुए देखा गया था। लेकिन ये ऋषभ नहीं धोनी थे जो आखिरी गेंद तक कमाल की उम्मीद रखते हैं। फिर अभी तो 10 ही ओवर निकले थे। उन्होंने अपना तुरुप का इक्का निकाला, शार्दुल ठाकुर। वो शार्दुल के पास गए और उनसे थोड़ी बात की। फिर रवींद्र जडेजा को एक खास जगह पर फील्डिंग के लिए लगाया।
दरअसल, शार्दुल के पहले ओवर में धोनी से ही एक कैच छूट गया था। तब शार्दुल काफी निराश हो गए थे। धोनी ने भांप लिया कि टीम में नकारात्मक भाव आता जा रहा है। इसलिए वो शार्दुल के पास गए और उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद फील्डर को जहां लगाया था उसी के अनुसार बॉल करने को कहा। नजीता ये निकला कि वेंकटेश अय्यर ठीक वैसे ही आउट हुए जैसे धोनी ने फील्ड सेट की थी। कैच जडेजा के पास ही गया।
दरअसल, शार्दुल के पहले ओवर में धोनी से ही एक कैच छूट गया था। तब शार्दुल काफी निराश हो गए थे। धोनी ने भांप लिया कि टीम में नकारात्मक भाव आता जा रहा है। इसलिए वो शार्दुल के पास गए और उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद फील्डर को जहां लगाया था उसी के अनुसार बॉल करने को कहा। नजीता ये निकला कि वेंकटेश अय्यर ठीक वैसे ही आउट हुए जैसे धोनी ने फील्ड सेट की थी। कैच जडेजा के पास ही गया।
हालांकि यहां से कहानी खत्म नहीं, शुरू हुई थी। जब एक विकेट मिला तो धोनी ने चौकसी और बढ़ा दी। वो फिर चलकर शार्दुल के पास आए। धोनी को बहुत कम बार देखा जाता है कि वो चलकर बॉलर के पास आते हैं। लेकिन जब-जब जाते हैं कुछ करके ही लौटते हैं। उन्होंने इस बार अपनी टीम के सबसे तगड़े दोनों फील्डर रवींद्र जडेजा और फाफ डुप्लेसिस को उन जगहों पर तैनात किया जो नीतीश राणा के स्ट्रॉन्ग एरिया थे। नतीजा ये निकला कि राणा ने फाफ डुप्लेसिस को कैच थमा दिया।
हालांकि यहां से कहानी खत्म नहीं, शुरू हुई थी। जब एक विकेट मिला तो धोनी ने चौकसी और बढ़ा दी। वो फिर चलकर शार्दुल के पास आए। धोनी को बहुत कम बार देखा जाता है कि वो चलकर बॉलर के पास आते हैं। लेकिन जब-जब जाते हैं कुछ करके ही लौटते हैं। उन्होंने इस बार अपनी टीम के सबसे तगड़े दोनों फील्डर रवींद्र जडेजा और फाफ डुप्लेसिस को उन जगहों पर तैनात किया जो नीतीश राणा के स्ट्रॉन्ग एरिया थे। नतीजा ये निकला कि राणा ने फाफ डुप्लेसिस को कैच थमा दिया।
अब धोनी के अंदर का वो शख्स जाग गया था जो बाजी बदलने का आदी है। फट से उन्होंने गेंद अपनी टीम के सबसे काबिल गेंदबाज जॉस हेजलवुड को थमाई। जमे हुए बल्लेबाज उन्हें ठीक से खेल रहे थे। लेकिन जब नए बल्लेबाज आए तो धोनी ने फटाफट उन्हें वापस बुलाया। इसका फायदा मिला मैच को पलटने की ताकत रखने वाले सुनील नरेन सिर्फ 2 रन पर आउट हो गए। उनका कैच भी जडेजा ने पकड़ा।
अब धोनी के अंदर का वो शख्स जाग गया था जो बाजी बदलने का आदी है। फट से उन्होंने गेंद अपनी टीम के सबसे काबिल गेंदबाज जॉस हेजलवुड को थमाई। जमे हुए बल्लेबाज उन्हें ठीक से खेल रहे थे। लेकिन जब नए बल्लेबाज आए तो धोनी ने फटाफट उन्हें वापस बुलाया। इसका फायदा मिला मैच को पलटने की ताकत रखने वाले सुनील नरेन सिर्फ 2 रन पर आउट हो गए। उनका कैच भी जडेजा ने पकड़ा।
अब धोनी और जीत के बीच में दो खिलाड़ी आ रहे थे। ओएन मोर्गन और दिनेश कार्तिक। धोनी ने इनके लिए अलग से रणनीति बनाई। जब-जब ओएन मोर्गन बैटिंग एंड पर आते बॉलर किसी तरह से उन्हें लंबे शॉट लगाने से रोकते। मोर्गन का विकेट चटकाने के बजाए ऐसी बॉलिंग करते कि वो रन न बना पाएं। भले आउट न हों। लेकिन जैसे ही क्रीच पर दिनेश कार्तिक आते बॉलर ऐसी गेंदें फेंकते जिनपर लंबे शॉट भी लग सके लेकिन विकेट मिलने के चांस भी रहें। अंत में कार्तिक रायडू को कैच थमा कर चलते बने।
अब धोनी और जीत के बीच में दो खिलाड़ी आ रहे थे। ओएन मोर्गन और दिनेश कार्तिक। धोनी ने इनके लिए अलग से रणनीति बनाई। जब-जब ओएन मोर्गन बैटिंग एंड पर आते बॉलर किसी तरह से उन्हें लंबे शॉट लगाने से रोकते। मोर्गन का विकेट चटकाने के बजाए ऐसी बॉलिंग करते कि वो रन न बना पाएं। भले आउट न हों। लेकिन जैसे ही क्रीच पर दिनेश कार्तिक आते बॉलर ऐसी गेंदें फेंकते जिनपर लंबे शॉट भी लग सके लेकिन विकेट मिलने के चांस भी रहें। अंत में कार्तिक रायडू को कैच थमा कर चलते बने।
कार्तिक के जाने के बाद धोनी की रणनीति वही रही। ज्यादा से ज्यादा उन बैट्समैन को टारगेट किया जो नए आ रहे हैं। मोर्गन भले खड़े रहें पर उन्हें या तो बैटिंग से दूर रखा गया या फिर रन नहीं बनाने दिया गया।
कार्तिक के जाने के बाद धोनी की रणनीति वही रही। ज्यादा से ज्यादा उन बैट्समैन को टारगेट किया जो नए आ रहे हैं। मोर्गन भले खड़े रहें पर उन्हें या तो बैटिंग से दूर रखा गया या फिर रन नहीं बनाने दिया गया।
जैसा धोनी ने चाहा, वैसा ही होता गया। मोर्गन एक तरफ खड़े रहे। दूसरी ओर से शाकिब अल हसन, राहुल त्रिपाठी भी आउट हो गए। जिस कोलकाता का स्कोर 10.3 ओवर में 91 रन था और विकेट एक भी नहीं गिरा था। उसी कोलकाता का स्कोर 15.4 ओवर में 123 रन था और 7 विकेट गिर चुके थे। ये उन्हीं 20 मिनट की कहानी थी, जब 29 गेंदें फेंकी गईं 32 रन बने और 7 विकेट गिरे। दूसरी टीम के कप्तान मोर्गन क्रीच पर खड़े रह गए और मैच धोनी ने अपनी झोली में डाल दिया।
जैसा धोनी ने चाहा, वैसा ही होता गया। मोर्गन एक तरफ खड़े रहे। दूसरी ओर से शाकिब अल हसन, राहुल त्रिपाठी भी आउट हो गए। जिस कोलकाता का स्कोर 10.3 ओवर में 91 रन था और विकेट एक भी नहीं गिरा था। उसी कोलकाता का स्कोर 15.4 ओवर में 123 रन था और 7 विकेट गिर चुके थे। ये उन्हीं 20 मिनट की कहानी थी, जब 29 गेंदें फेंकी गईं 32 रन बने और 7 विकेट गिरे। दूसरी टीम के कप्तान मोर्गन क्रीच पर खड़े रह गए और मैच धोनी ने अपनी झोली में डाल दिया।