5 कारणों में जानिए क्यों फ्लॉप हुए रोहित शर्मा:फास्ट बॉलिंग के सामने नहीं चला बल्ला, मानसिक तौर पर थके हुए नजर आए

मुंबई6 महीने पहलेलेखक: कुमार ऋत्विज

रोहित शर्मा को हमेशा से मौजूदा दौर के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में शुमार किया जाता रहा है। दिग्गज खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट ने 2009 में आयोजित IPL के दूसरे सीजन में ही कह दिया था कि हिटमैन कप्तानी के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वह वक्त भी आया, जब इस साल रोहित को टीम इंडिया के तीनों फॉर्मेट का कप्तान बना दिया गया।

इंडियन टीम की कमान संभालने के बाद उम्मीद थी कि रोहित अपने प्रदर्शन से मुंबई को छठी बार IPL की ट्रॉफी दिलाएंगे। IPL 2022 के 14 मुकाबलों में रोहित ने 19 की औसत से केवल 268 रन बनाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 120 का रहा। रोहित मुंबई इंडियंस के कमजोर बैटिंग लाइनअप की मजबूत कड़ी नहीं बन सके। आगे बढ़ने से पहले इस पोल में जरूर हिस्सा लें।

इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि रोहित किसी IPL सीजन में एक भी फिफ्टी नहीं लगा सके। इस सीजन रोहित की खराब फॉर्म से जुड़ी पांच वजह समझने का प्रयास करते हैं।

1. कमजोर फुट मूवमेंट ने प्रभावित किया रोहित का खेल
रोहित का हैंड आई कोऑर्डिनेशन हमेशा से शानदार रहा है। इसके साथ उनका फुट मूवमेंट रोहित के बैटिंग की खासियत हुआ करता था। IPL 2022 में रोहित के पैर बिल्कुल नहीं चले। वह गेंद की पिच तक जाने की बजाय खड़े-खड़े शॉट लगाने का प्रयास करते देखे गए। परिणाम हुआ कि इस क्रम में उन्होंने अपने विकेट गंवाए।

रोहित के बचपन के कोच दिनेश लाल भी इस बात को स्वीकार करते हैं। दिनेश बताते हैं कि हिटमैन के पैर बल्लेबाजी के दौरान उतने नहीं चल रहे, जितना जरूरी है। हालांकि, दिनेश जल्दी ही रोहित शर्मा के फॉर्म में वापसी की उम्मीद जताते हैं।

2. सफलता दोहराने का दबाव रोहित के प्रदर्शन में दिखा
किसी भी कप्तान ने आज तक IPL में पांच ट्रॉफी नहीं जीतीं। इस सफलता को दोहराने का दबाव रोहित के ऊपर साफ तौर पर नजर आया। लास्ट सीजन की विफलता के बाद वह हर मुकाबले में कुछ अलग करने का प्रयास करते दिखे। अगर ओपनिंग करते हुए समस्या आ रही थी, तो रोहित मिडिल ऑर्डर में कुछ मुकाबले खेल सकते थे।

शुरुआती ओवर की सीम और स्विंग की बजाय रोहित अगर पिच से तेज गेंदबाजों को मिल रही मदद खत्म होने के बाद बैटिंग पर उतरते, तो उनके लिए बेहतर रहता। एक बड़ी पारी से रोहित का कॉन्फिडेंस IPL में लौट सकता था, जो टीम की बैटिंग को मजबूत करता। सीजन में जल्दी सफलता पाने के लिए रोहित ने हर दांव आजमाया, हालांकि वह सफल नहीं हो सके।

3. फास्ट बॉलिंग के सामने नहीं टिक सके रोहित
तेज गेंदबाजों के सामने इस बार रोहित का बल्ला बिल्कुल नहीं चला। वह 14 पारियों में 9 बार फास्ट बॉलर्स का शिकार हुए। रोहित ने तेज गेंदबाजों के सामने 219 रन बनाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 121 का ही रहा। जो रोहित पुल शॉट पर फास्ट बॉलिंग के सामने लगातार कड़े प्रहार करते थे, वह इस सीजन उनके सामने सिर्फ 12 छक्के और 24 चौके ही लगा सके। फास्ट बॉलिंग खेलने को लेकर रोहित की ये कमजोरी पूरी टीम पर भारी पड़ गई।

4. लगातार क्रिकेट खेल रहे हिटमैन मानसिक तौर पर थके हुए नजर आए
रोहित लगातार क्रिकेट खेल रहे हैं। इस कारण मानसिक थकान भी उनके खेल में नजर आई। टीम के आखिरी लीग मैच के बाद हिटमैन ने स्वीकार किया कि बहुत सारी चीजें जो मैं करना चाहता था, इस सीजन नहीं कर सका। रोहित कहते हैं- मैं अपने प्रदर्शन से बहुत निराश हूं। हालांकि, ऐसा मेरे साथ पहले भी हो चुका है। मैं मेंटल आस्पेक्ट का ध्यान रखते हुए फॉर्म में वापसी का प्रयास करूंगा। इसके लिए जब भी ऑफ टाइम मिलेगा, अपने खेल के तरीके में थोड़ा बदलाव करूंगा।

5. दूसरे बैटर्स की नाकामी ने बढ़ाया रोहित पर दबाव
वर्ल्ड क्रिकेट के टॉप थ्री व्हाइट बॉल बैट्समेन में शुमार रोहित की बैटिंग पर मुंबई के प्रमुख बल्लेबाजों की विफलता का असर भी दिखाई पड़ा। हालांकि, ईशान किशन सीजन की समाप्ति तक 400 रनों का आंकड़ा जरूर पार कर गए, लेकिन शुरुआत में टीम को मिली 8 हार के दौरान उनका प्रदर्शन भी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। ऐसे में रोहित खुलकर अपनी इनिंग प्लान नहीं कर सके।

मुंबई का मिडिल ऑर्डर कीरोन पोलार्ड के निराशाजनक प्रदर्शन के कारण दबाव में आ गया। जब तक MI पूरी तरीके से IPL से बाहर नहीं हो गई, तब तक पोलार्ड को लगातार प्लेइंग 11 में मौका दिया जाता रहा। हार्दिक पंड्या और क्रुणाल पंड्या के ना होने से MI शुरुआती मुकाबलों में बेस्ट प्लेइंग इलेवन के लिए भी तरसती दिखी।

पहले रोहित खुलकर शॉट्स खेल पाते थे, क्योंकि उन्हें मिडिल ऑर्डर में पोलार्ड और पंड्या ब्रदर्स पर मुकाबले फिनिश करने का यकीन था। इस बार वैसे हालात नहीं थे। आखिरी छह मुकाबलों में 4 जीत के साथ मुंबई ने सीजन समाप्त किया है। टीम को टिम डेविड जैसा भरोसेमंद मैच फिनिशर भी मिल गया है।

उम्मीद है कि अब टीम मैनेजमेंट ने खिलाड़ियों का कॉन्बिनेशन ठीक तरीके से समझ लिया होगा। ऐसे में रोहित अगले साल बाद में आने वाले बल्लेबाजों के प्रदर्शन का दबाव लिए बिना खुलकर बल्लेबाजी कर पाएंगे।