एनालिसिस / धोनी भावना नहीं प्रदर्शन के बल टीम में जगह कायम रखें



Analysis of Ayaz Menon, Dhoni will have to improve performance
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Analysis of Ayaz Menon, Dhoni will have to improve performance

  • धोनी का आखिरी टूर्नामेंट हो सकता है 2019 वर्ल्ड कप
  • धोनी का पिछले दो साल से बैटिंग फॉर्म अच्छा नहीं रहा

Dainik Bhaskar

Oct 28, 2018, 07:29 AM IST

खेल डेस्क. भारतीय चयनकर्ताओं ने शुक्रवार को जो फैसले लिए उनमें दो बेहद अहम रहे। पहला वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए महेंद्र सिंह धोनी का न चुना जाना और दूसरा रोहित शर्मा की टेस्ट टीम में वापसी। धोनी इससे पहले कभी किसी टीम से बाहर नहीं किए गए थे। वहीं, रोहित शर्मा को टेस्ट टीम में स्थापित होने के लिए संभवत: आखिरी मौका दिया गया है।

 

धोनी का बाहर होना एक युग का अंत
इन दोनों में धोनी का न चुना जाना ज्यादा चर्चित फैसला रहा। उन्होंने भारत को पहले वर्ल्ड टी20 में जीत दिलाई थी। वे इस फॉर्मेट में कई वर्षों तक भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ रहे। उनका बाहर होना एक युग का अंत है। हाल-फिलहाल कुछ खिलाड़ियों ने खुद को बाहर किए जाने पर चयनकर्ताओं के साथ संवादहीनता का हवाला दिया था। मुझे नहीं लगता है कि धोनी के मामले में ऐसा कुछ होगा। धोनी भारत ही नहीं बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट में बड़ी हस्ती हैं। इस तरह के फैसले से पहले उनसे बात न की गई हो ऐसा लगता नहीं है। 

 

2020 टी20 वर्ल्ड कप में धोनी के खेलने की उम्मीद कम
टी20 टीम में धोनी के न चुने जाने से साफ संकेत मिल रहे हैं कि वे कब खेल को अलविदा कहेंगे। पूरी संभावना है कि इंग्लैंड में होने वाला 2019 वर्ल्ड कप उनका आखिरी टूर्नामेंट हो। टी20 वर्ल्ड कप उसके एक साल बाद है। तब धोनी करीब 40 साल के हो जाएंगे और तब तक उनके खेलने की उम्मीद न के बराबर है। इसलिए अगर वे अब भी टी20 टीम में बने रहते तो इस फॉर्मेट के वर्ल्ड कप के लिए विकेटकीपर बल्लेबाज ढूंढने में देर हो सकती थी। इससे रिषभ पंत को अपनी भूमिका में ढलने में सहूलियत होगी। 

 

वर्ल्डकप पर फोकस करेंगे धोनी
टी20 टीम का हिस्सा न होने से धोनी को वनडे और अगले वर्ल्ड कप पर फोकस रखने में मदद मिलेगी। इस टूर्नामेंट एक खिलाड़ी, मेंटर और सीनियर के नाते धोनी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। वे टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं। उनका रिकॉर्ड अब भी बेहतरीन है। उनके खाते में वर्ल्ड कप (2011) और चैंपियंस ट्रॉफी (2013) जैसे खिताब हैं। हालांकि, इसके बावजूद उनको ड्रॉप किए जाने से वर्ल्ड कप से पहले कुछ अनिश्चितता भी खड़ी होती है।

 

पिछले दो साल से उनका बैटिंग फॉर्म अच्छा नहीं रहा है। जरूरत पड़ने पर वे बहुत कम मैचों को अपने बल पर फिनिश कर पाए हैं। पहले अच्छा मैच फिनिशर होना धोनी की पहचान थी। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं धोनी के प्रदर्शन में आई तेज गिरावट कहीं टीम की संभावनाओं को प्रभावित करना न शुरू कर दे। हालांकि, अभी इस नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

 

विकेट के पीछे धोनी सर्वश्रेष्ठ
धोनी आज भी विकेट के पीछे सर्वश्रेष्ठ विकल्प हैं। अब जबकि पंत और अन्य खिलाड़ी फिनिशर की भूमिका लेने के लिए तैयार हैं, विराट भी धोनी को बैटिंग ऑर्डर में दूसरी भूमिका देने के लिए तैयार हैं। यह टीम और धोनी दोनों के लिए अच्छा है। हालांकि, इसके बावजूद धोनी को पर्याप्त रन बनाने होंगे, जो टीम की संभावनाओं को आगे बढ़ाते रहे। उन्हें जल्द ही फॉर्म और लय हासिल करनी होगी।

 

अब वर्ल्ड कप से पहले महज 15 वनडे मैच शेष रह गए हैं। ऐसे में धोनी को प्रदर्शन के बूते अपनी जगह तय करने की जरूरत है न कि सिर्फ भावनाओं के दम पर।

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