भास्कर खास:मुंबई के सरफराज-अरमान का सफर स्कूल से शुरू होकर रणजी फाइनल तक पहुंचा,एक 200 बनाता तो दूसरा 300 करना चाहता

2 महीने पहले
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क्रिकेट जगत में भाइयों की कई जोड़ियों को साथ में खेलते हुए देखा होगा, लेकिन मुंबई के सरफराज खान और अरमान जाफर जैसी जोड़ी शायद ही देखने को मिली होगी। इन दोनों खिलाड़ियों ने स्कूल क्रिकेट से खेलना शुरू किया और अब रणजी के फाइनल तक पहुंचे हैं। दोनों ही खिलाड़ी टीम के सलामी बल्लेबाज हैं।

रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सीजन के टॉप स्कोरर की सूची में दोनों खिलाड़ियों का नाम शामिल है। सरफराज ने 803 रन बनाए हैं और वे टीम और लीग दोनों के टॉप स्कोरर हैं, जबकि अरमान 339 रन के साथ टीम के तीसरे सबसे सफल खिलाड़ी हैं।

दोनों ने क्रिकेट करिअर की शुरुआत 2008 में की थी। दोनों में ऐसी प्रतिस्पर्धा थी कि अगर टूर्नामेंट में कोई एक 200 बनाता था तो दूसरे पर उससे ज्यादा रन बनाने का दबाव होता था। एक 300 बनाता था तो दूसरे को उससे ज्यादा रन बनाने का दबाव रहता था। दोनों खिलाड़ियों के पिता ही उनके कोच रहे हैं। ऐसे में यह दबाव और बढ़ जाता था। अरमान 2010 में अंडर-14 जाइल्स शील्ड ट्रॉफी में 498 रन बनाकर पहली बार सुर्खियों में आए थे। इससे एक साल पहले यानी 2009 में सरफराज सुर्खियां बटोर चुके थे।

सरफराज ने हैरिस शील्ड कप में 421 गेंद में 439 रन बनाकर सचिन तेंदुलकर का 45 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था। सरफराज ने कहा, “2008 में पहली बार अरमान से मुलाकात हुई थी। वह पहले से ही रिजवी स्कूल में था और मैं एक साल बाद आया था। वहां से हम दोनों एक साथ खेलने लगे। वह कीपिंग पैड पहनकर बल्लेबाजी करने उतरता था, क्योंकि बैटिंग पैड बहुत बड़े होते थे। दिन भर साइड में नॉकिंग करता रहता था। कलीम सर इसके पापा हैं।

मैच जारी रहता तब भी यह नॉकिंग करता रहता था तो मेरी मुलाकात इससे ऐसे ही हुई।’ वहीं, अरमान ने कहा, ‘मेरे परिवार की ओर से रन बनाने का दबाव नहीं रहता था और न ही ऐसी प्रतिस्पर्धा रहती थी कि वह (सरफराज) ज्यादा रन बनाएगा या मैं। वह बल्लेबाजी करता था। वह तब भी तेज खेलता था और आज भी तेज ही खेलता है। वह सुपरफास्ट ट्रेन है। जब हम होटल में होते हैं तो हमारी कोशिश होती है कि हम अगल-बगल में ही कमरा लें। स्कूल के समय से अब हमारी बॉन्डिंग बहुत अच्छी हो गई है। हम एक दूसरे के बहुत गहरे दोस्त बन गए हैं। एक-दूसरे को बहुत अच्छे से समझते हैं।’

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